छोटे बच्चों की कहानियां-ऊंट की घंटी

छोटे बच्चों की कहानियां-ऊंट की घंटी

छोटे बच्चों की कहानियां-ऊंट की घंटी

किसी गांव में श्यामू नाम का एक गरीब व्यक्ति रहता था। वह बैलगाड़ी बनाने का काम करता था, लेकिन उसे ज्यादा काम नहीं मिलता था। उसने तय किया कि वह पैसे कमाने के लिए कोई दूसरा धंधा आरंभ करेगा। वह कोई काम खोजने के लिए पड़ोसी गांव की ओर चल दिया। रास्ते में उसने एक ऊंटनी को देखा, जिसने बहुत सुंदर बच्चे को जन्म दिया था। अब उसने तय कर लिया कि वह कोई अन्य काम करने की बजाए उस ऊंटनी तथा उसके बच्चे को ही घर ले जाएगा और पालेगा। 

उसने ऊंटनी की देखरेख की, उसे पत्तियां खिलाईं और जब वह ताकतवर हो गई तो वह उसे और उसके बच्चे को अपने घर ले आया। वह उन दोनों की बहुत सेवा करता था।

कुछ ही महीने में ऊंट का बच्चा बड़ा हो गया। वह बहुत ताकतवर था। श्यामू को ऊंट के बच्चे से बहुत प्यार था। वह उसे प्यार से मोनू बुलाने लगा। उसने मोनू के गले में एक घंटी बांध दी ताकि जब वह चले तो टुन-टुन की आवाज आया करे और उसे यह भी पता चल जाए कि वह कहां है। 

पंचतंत्र कहानी कार्टून,

वह ऊंटनी का दूध बेचने लगा। उसने तय किया कि उसके लिए यही काम सही रहेगा। वह गुजरात गया और वहां से एक ऊंट खरीद लाया। इसके बाद उसके घर में बहुत सारे ऊंट हो गए। उसने अपने ऊंटों की देखरेख के लिए एक नौकर रख लिया। इस तरह ऊंटनी का दूध व ऊंट बेच कर वह धनवान हो गया। 

श्यामू ऊंटों को हर रोज जंगल में ले जाता। वहां वे ताजी पत्तियां और लताएं खाते। वहीं पास में एक झील भी थी। वे शाम को वहां से भरपेट ताजा पानी पीने के बाद घर वापस आ जाते। ऊंटों का रखवाला हमेशा उनके साथ रहता।

मोनू से सब प्यार करते लेकिन अब वह बहुत ही घमंडी हो गया था। उसे लगता था कि वह दूसरों से बेहतर है। इसलिए उसने झुंड के साथ चलने से इनकार कर दिया- वह अपनी ही मौज में अकेला चरता।

कई बार तो वह सबको वहीं छोड़ कर, अकेला ही जंगल की सैर को निकल जाता। उसकी मां तथा दूसरे ऊंटों ने उसे ऐसा करने से मना भी किया, लेकिन वह किसी की नहीं सुनता था। 

उसकी मां ने कहा, “बेटा! तुम्हें हमेशा झुंड के साथ रहना चाहिए। जंगल में शिकारी जानवर रहते हैं और तुम्हारी घंटी का सुर। तो मीलों दूर से सुनाई दे । जाता है। तुम्हें कोई भी, कभी भी आसानी से मार सकता है।” 

लेकिन घमंडी मोनू ने अपनी मां की सलाह पर कोई ध्यान नहीं दिया। वह हमेशा की तरह मनमानी करता रहा– भई, वह घंटी वाला ऊंट जो था। 

एक दिन झील में पानी पीते शेर ने मोनू की घंटी की आवाज सुन कर, सिर उठा कर देखा कि ऊंटों का झुंड नदी पर पानी पीने आ रहा है। वह वहीं झाड़ियों के पीछे दुबक कर खड़ा हो गया। उस झुंड में उसने एक नन्हे ऊंट को भी देखा, जिसके गले में घंटी बंधी थी और वह अपने झुंड से अलग हट कर ताजी-ताजी पत्तियां खा रहा था। वह अपनी मस्ती में था। 

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पूरा झुंड पानी पी कर कब लौट गया, इसका मोनू को पता ही नहीं चला। वह वहां अकेला ही रह गया। ज्यों ही वह वहां पहुंचा जहां शेर छुप कर बैठा था, शेर ने उस पर झपट्टा मारा और उसे वहीं खत्म कर दिया। घमंड की वजह से मोनू छोटी उम्र में ही मारा गया। 

इसलिए हमें हमेशा अपने बड़ों का कहना मानना चाहिए। अगर मोनू ने अपनी मां की बात सुनी होती और अपने झुंड का साथ न छोड़ा होता, तो उसे अपनी जान से हाथ न धोने पड़ते।

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