छोटे बच्चों की छोटी कहानी-गधे का गाना

छोटे बच्चों की छोटी कहानी

छोटे बच्चों की छोटी कहानी-गधे का गाना

गधे का गाना एक मोटा-सा गधा धोबी के लिए काम करता था। वह बहुत अच्छा और वफादार गधा था इसलिए धोबी अक्सर उसे रात को अकेला चरने भेज देता। गधा सारी रात मजे से खेतों में चरता और सुबह सही समय पर वापस काम करने आ जाता। 

एक दिन रात को गधे की दोस्ती गीदड़ से हो गई, जो रात को चोरी से गांव वालों की मुर्गियां चुरा कर खा जाता था। गीदड़ ने गधे को बताया कि कुछ गांव वालों ने अपने खेतों में बहुत ही रसीले खीरे उगाए हुए हैं। वह गधे को अपने साथ खीरों के खेत में ले गया। गधे ने मजे से खीरे खाए और गीदड़ ने मुर्गियों पर हाथ साफ किया। 

कुछ दिन तक यह सब बहुत अच्छी तरह चलता रहा। एक रात पूरा चांद उगा हुआ था। चारों ओर चंद्रमा की रोशनी फैली हुई थी। गधे का गाना गाने का मन होने लगा। उसने गीदड़ से कहा कि वह गीत गाना चाहता है। गीदड़ तो यह सुन कर हैरान रह गया। वह सोचने लगा, ‘गधा कितना बड़ा मूर्ख है, रेंकने को गाना भला कैसे कहा जा सकता है।’ 

“नहीं, तुम्हें गाना नहीं गाना चाहिए,” गीदड़ ने कहा। उसे उम्मीद थी कि गधा शायद उसकी बात मान लेगा। वह बोला, “दोस्त! तुम कोई गायक नहीं हो, और फिर हम किसान के यहां चोरी करने आए हैं। अगर उसने तुम्हें गाते हुए सुन लिया तो वह उठ कर हम दोनों को बहुत पीटेगा। इसलिए चुपचाप खीरे खा कर यहां से चलो।”

“यह क्या! तुम्हें लगता है कि मुझे गाने की समझ नहीं है। मुझे तो सारे राग और धुनें याद हैं। हर तरह की लय और ताल की जानकारी भी है। मुझे यह भी पता है कि मुझे इस समय किस राग में गाना चाहिए,” गधे ने झट से कहा। 

“देखो! पहले मुझे छिप जाने दो। इसके बाद ही अपना गाना शुरू करना,” गीदड़ ने कहा। वह भाग कर किसान के खेत में झाड़ी के पीछे जा कर छिप गया। वह जानता था कि इसके बाद क्या होने वाला है। 

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गधे ने अपना गला साफ किया और अपना सुर खोल कर जोर से रेंकने लगा। उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे बेहतरीन गायक है। जैसे-जैसे गाने का स्वर तीव्र होता गया, किसान और उसके पड़ोसी आवाज सुन कर जाग गए। वे आधी रात को गधे के रेंकने की आवाज सुन कर गुस्से में आ गए। उन्होंने अपने हाथों में लाठियां लीं और गधे से निपटने भागे। 

जब गधे ने उन्हें पास आते देखा तो उसे बहुत खुशी हुई। उसे लगा कि आज उसके गाने की कद्र करने वाले मिल गए हैं। वे सब उसके गाने की तारीफ करने आ रहे हैं, इसलिए वह और भी तेज सुर में रेंकने लगा। 

वही हुआ, जिसके बारे में गीदड़ ने कहा था। किसानों ने जब जम कर गधे की पिटाई की तब गधे को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसे लगा कि उसने कुछ ऐसा किया है, जिसे नहीं करना चाहिए था। लेकिन अब बात बिगड़ चुकी थी। उन्होंने एक लकड़ी का लंबा टुकड़ा गधे के गले में बांध दिया ताकि वह भाग न सके। फिर उन्होंने उसे खेत से खदेड़ दिया। 

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गधा शर्मिंदा हो कर अपने घर की ओर चल दिया। गले में बंधी लकड़ी के कारण वह बुरी तरह घायल हो गया था। वह लंगड़ा रहा था। रास्ते में उसे अपना दोस्त गीदड़ दिखाई दिया। वह बोला, “दोस्त! मुझे तुम्हारी बात सुननी चाहिए थी। अब से मुझे खीरे भी खाने को नहीं मिलेंगे। केवल घास और पत्तियां खा कर ही पेट भरना होगा। अच्छा अलविदा!” 

इसके बाद गधे ने कभी अपने गाने और सुरों की डींग नहीं हांकी।

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