लेटेस्ट गुड थॉट्स इन हिंदी-अपना बजट मत बिगाडिए (Do Not Go Beyond Your Budget) 

लेटेस्ट गुड थॉट्स इन हिंदी

अपना बजट मत बिगाडिए (Do Not Go Beyond Your Budget) 

1.सरकारों, संस्थाओं एवम् कम्पनियों की भाँति हर व्यक्ति को भी अपना घरेलू एवम् व्यवसाय सम्बन्धी बजट बनाकर ही आगे बढ़ना चाहिए और अपने बजट का सदैव ध्यान रखना चाहिए. सरकारों को तो मजबूरी में घाटे के बजट बनाने पड़ते हैं, परन्तु किसी व्यक्ति के समक्ष ऐसी कोई मजबूरी नहीं हो सकती. इसलिए अपनी सम्भावित आय के अनुसार ही ‘प्रस्तावित बजट’ तैयार करें और अपनी वास्तविक आय के अनुसार उसे संशोधित करते चलें.

2. लाभ के लिए भले ही देर से सोचें, किन्तु खर्चों के लिए तत्काल सोचें. खर्चों के साथ ही बचत की भी सोचें. अर्थात् सोच-समझकर ही खर्च करें, खर्चने से पहले बचत करें. बचत के बिना बजट का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए जब भी बजट बनावें, बचत वाला ही बनावें.

3. यह सही है कि जो आय से अधिक खर्च करता है, उसके पास सिर्फ कर्ज बचता है. वस्तुतः कर्ज ही आदमी का सबसे बड़ा मर्ज होता है. कर्जदार होना ही गरीब होना है. गरीब होना ही बदनसीब होना है. बदनसीबी से बचने के लिए बजट बनाकर चलिए और बजट के अनुसार ही अपने हाथ-पैर फैलाइए, तब आपको किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

4. यह सदैव याद रखें कि आपकी संभावित आय में यकायक वृद्धि संभव नहीं है. साथ ही आकस्मिक खर्चों का पूर्वानुमान भी संभव नहीं है. इसलिए अपने बजट में बचत के पर्याप्त प्रावधान रखते चलें, ताकि आकस्मिक खर्चों से निपटा जा सके. जो अपनी आमदनी का कम-से-कम पच्चीस प्रतिशत तक बचा लेता है, वह बजट को ही नहीं, अपने जीवन को भी अपने पक्ष में कर लेता है. अर्थात् बजट का अर्थ ही बचत है और बचत का आधार ही बजट है.

5. अपनी बचत को ऐसी बहुआयामी योजनाओं में निवेशित करें, जहाँ आयकर की बचत के साथ-साथ आकर्षक ब्याज/लाभांश/ बोनस आदि प्राप्त हो सके. बचत पर अर्जित आय को इस प्रकार पुनः निवेशित करें कि भविष्य में एक बड़ी राशि प्राप्त हो सके. परिपक्वता पर प्राप्त राशि को किसी लाभप्रद योजना में पुनः निवेशित करते रहें. अर्थात् जो भी बचत करें, लम्बे समय के लिए करें. यह भी मानकर चलें कि खर्चों की तुलना में कभी आय नहीं बढ़ेगी, इसलिए बचत करके ही अपनी आय बढ़ायी जा सकती है.

6. याद रखें, बचत में ही बचत है. बचत ही आमद है. बचत ही जिन्दगी को निश्चित व एवम् निरापद बनाती है, इसलिए आवश्यक खर्चों में मितव्ययता बरतें, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगावें. कुछ खर्चों को फिलहाल स्थगित रखें, तो स्वतः ही बचत होती रहेगी. जो भी क्षण गुजरता है, कुछ न कुछ दायित्व सृजित करता है. बकौल मोहन आलोक-‘सहेज, कुछ न कुछ सहेज, घड़ी जो जायेगी, मांगेगी दहेज.’ 

7.यदि आप सम्पदा सृजित करते चलेंगे, तो सदा सुविधा सम्पन्न रहेंगे. यदि आप देनदारियाँ सृजित करते चलेंगे तो सदा दुविधा ग्रस्त रहेंगे. यदि आप बजट नहीं बनायेंगे अथवा बजट के अनुरूप नहीं चल पायेंगे तो मानकर चलें, देनदारियाँ ही सृजित करते चलेंगे. और तब आपकी सृजित सम्पदा भी बिक जायेगी और आप देनदारियों से कभी मुक्त भी नहीं हो पायेंगे.

8. धन कमाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना धन का सदुपयोग करना है. उधार लेना और देना दोनों ही बुरी आदतें हैं, इसलिए दोनों से ही बचकर रहें. याद रखें, उधार मांगने वाले के सामने एक बार ‘नहीं’ कहने पर आप सौ बार ‘नहीं’ सुनने से बच सकेंगे. उधार देने का मतलब अपने धन को पराये धन में बदलना है और उधार लेने का मतलब अपनी नींद गिरवी रखना है. उधार पर अंकुश रखने का एक मात्र उपाय है, अपने बजट पर नजर रखना.

9. ऐसी कोई योजना हाथ में न लें, जिसके लिए आवश्यक मार्जिन मनी भी उपलब्ध न हो. एक योजना पूरी होने पर ही दूसरी योजना हाथ में लें, अन्यथा आपका बजट गड़बड़ा जायेगा. आय और व्यय के बीच सन्तुलन बनाये रखें. बाजार में अपनी साख बनायें रखें. कर्ज लेने से पहले उसे चुकाने की योजना बनायें. कर्ज देने से पहले, उस राशि के बिना गुजारा करने की आदत बनायें. जिस कार्य के लिए कर्ज लें, कर्ज को उसी मद में खर्च करें. जिस कार्य के लिए कर्ज दें, उस पर निगरानी रखें. अत्यधिक आवश्यक होने पर ही कर्ज लें, शौक के बतौर कर्ज न लें. कर्ज लेने को शौक न बनायें, बल्कि कर्ज चुकाने को शौक बनायें.

बजट पर नियन्त्रण- आप उत्पादन, व्यापार, कृषि, सेवा, सलाहकार आदि किसी भी व्यवसाय में हों, (क) बजट बनाना और उस पर चलना आवश्यक है, (ख) प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अपना प्रस्तावित बजट तैयार करें, मदवार संभावित आय एवम् व्यय को दर्शायें. (ग) फिर पूरे साल तक इस बात का प्रयास करते रहें कि आपकी आय प्रस्तावित आय से अधिक हो और खर्चा बजट प्रावधानों की तुलना में कम हो. (घ) जिस मद में अनुमान से आय कम हो और व्यय अधिक हो, उस पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित करें. ज्ञात कारणों एवम् कठिनाइयों को दूर करें तथा अगले वर्ष के लिए अपने बजट में तदानुसार बढ़ा-चढ़ा कर आय न दिखावें, तब ही बजट पर आपका पूर्ण नियन्त्रण रह सकेगा. (ङ) आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक से अधिक आय प्राप्त करने के लगातार प्रयास करते रहें. (च) छीजत पर नियंत्रण करें तथा उधार वसूली पर अधिक ध्यान केन्द्रित करें. (छ) आय के नये-नये स्रोतों का सृजन भी करते रहें. किसी एक मद की आय से कभी सन्तुष्ट न हों. छोटी-छोटी आमदनी मिलकर ही बड़ी आमदनी का सृजन करती हैं. (ज) खर्चों पर पूर्ण नियंत्रण रखें. जिसके बिना अभी काम चल सकता है, वह वस्तु न खरीदें. अधिक से अधिक बचत करें और बचत को अच्छे लाभ वाली योजनाओं में निवेशित करते चलें. 

हिसाब-किताब साफ सुथरा एवम् आ-दिनांक रखिए (Keep Your Accounts Neat & Clean and Update) 

1.यह सही है कि जिन्दगी कोई गणित नहीं है, किन्तु गणित के बिना भी हमारी गति नहीं है. यह कतई महत्वपूर्ण नहीं है कि विद्यार्थी जीवन में आप गणित विषय में कैसे थे? महत्वपूर्ण तो यही है कि आप जिन्दगी के हिसाब-किताब में कैसे हैं. अक्सर गणित में कमजोर रहने वाला व्यक्ति अपने दैनिक हिसाब-किताब में दक्ष बन जाता है और गणित में दक्ष व्यक्ति जिन्दगी के हिसाब-किताब में फैल हो जाता है.

2. दैनिक जीवन में हमें एक-दूसरे के साथ विचारों, वस्तुओं एवम् धन राशियों का आदान-प्रदान करना पड़ता है, और इस आदान-प्रदान का लेखा-जोखा भी रखना पड़ता है. यह लेखा-जोखा जितना साफ सुथरा होगा, हमारा व्यवहार उतना ही विश्वास भरा होगा. इसलिए प्रत्येक लेन-देन को तत्काल लिखने की आदत बना लें. यही आदत आपके लिए वरदान सिद्ध होगी.

3. दैनिक आमद-खर्च, लेन-देन आदि का अंकन नियमित रूप से करते रहें. जिस आमद-खर्च का हिसाब किसी अन्य को न देना हो, तब भी उसका पूरा हिसाब रखें. अपनी याद-दाश्त पर अधिक भरोसा न करें. यदि समय पर हिसाब नहीं लिखा तो मौखिक रूप से याद रखने के लिए स्मृति पर भार बढ़ता चला जायेगा, तब स्मरण शक्ति का अत्यधिक अपव्यय होगा. हिसाब-किताब को बार-बार दोहराते रहने पर भी आप पूरी तरह याद नहीं रख पायेंगे और धीरे-धीरे स्मृति पटल से बहुत कुछ मिटता चला जायेगा. दूसरों की तो छोड़िए, तब खुद पर खुद का विश्वास भी उठता चला जायेगा. इसलिए पेपर अथवा इलैक्ट्रोनिक मीडिया पर लेन-देन, आमद-खर्च आदि की तत्काल प्रविष्टियाँ करते चलें.

4. यदि आप दैनिक आय-व्यय की मदवार प्रविष्टियाँ करने की नियमित आदत बना लेंगे तो आपको एक साथ अनेक लाभ होंगे. अपनी स्मृति, चिन्तन-शक्ति और हर घड़ी का अन्य उपयोगी कार्यों में सदुपयोग कर सकेंगे. खर्चों पर नियन्त्रण रख सकेंगे. बचत के रास्ते खुलेंगे. भूल-चूक होने, क्रय शुदा वस्तु के खराब होने एवम् भविष्य में खरीददारी करते समय दैनिक लेखे काफी मददगार साबित होते हैं.

5. अपनी पारिवारिक एवम् व्यावसायिक गतिविधियों से सम्बन्धित सभी आवश्यक मदों की अलग-अलग पत्रावलियाँ संधारित करते चलें और तत्सम्बन्धी पत्रादि को तत्काल संलग्न करते रहें, अगर आप रिकॉर्ड रखेंगे तो सभी विवादों से बचे रहेंगे. और आवश्यकता पड़ने पर बिल, बाउचर, रसीद, अनुबन्ध पत्र, रजिस्टर्ड दस्तावेज, लीज-डीड, रेण्ट-डीड, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, उपचार एवम् निदान स्लीप्स एवम् रिपोर्ट्स, विद्युत, जल, फोन, स्कूल- फीस, लीज-मनी, गृहकर, आयकर, वाणिज्य कर, आदि के बिल, नोटिस एवम् रसीदें आदि तत्काल तलाश कर सकेंगे. इसलिए समस्त पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक एवम् व्यावसायिक गतिविधियों सम्बन्धी कागजात को अलग-अलग पत्रावलियों में सुरक्षित लगाते चलें. अधिक पत्रावलियां होने पर पत्रावलियों का विवरण एक पृथक रजिस्टर में दर्ज करते रहें.

6. नियमित हिसाब-किताब रखने पर दिमाग काफी हल्का रहेगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा. लोगों का आप पर भरोसा बढ़ेगा. आमद-खर्च, लाभ-हानि, लेनदारी-देनदारी, आदि का तत्काल पता लगाया जा सकेगा. भविष्य की योजनाओं के लिए अपेक्षित जानकारी उपलब्ध रहेगी. तब आप न खुद अंधेरे में रहेंगे, न दूसरों को अंधेरे में रखेंगे.

7. अलग-अलग मदों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग लेजर/केश बुक/स्टॉक रजिस्टर आदि संधारित करें और तत्सम्बन्धी प्रविष्टियाँ हाथोंहाथ करते रहें. बैलेन्स आदि साथ-साथ अंकित करते चलें, ताकि लेजर, आदि खोलते ही लेनदारी/देनदारी/बचत आदि का पता चल सके. इस तरह हिसाब-किताब साफ सुथरा रखते हुए आप अपनी विश्वसनीयता बनाये रख सकते हैं. याद रखें, आप सबको धोखा दे सकते हैं, किन्तु अपने आपको धोखा नहीं दे पायेंगे. स्वयम् को दिया जाने वाला धोखा सबसे खतरनाक होता है, इसलिए सबके साथ-साथ स्वयम् के प्रति भी  उत्तरदायी  बने रहें.

8. यदि आपका समूचा हिसाब-किताब कम्प्यूटर पर हो, तब भी समय-समय पर प्रिन्ट आउट निकालते रहें और सम्बन्धित पत्रावलियों में लगाते रहें, ताकि कम्प्यूटर के खराब होने पर रिकॉर्ड उपलब्ध रह सके. जब भी किसी को बिल, लेजर आदि की प्रति दें, उसकी एक प्रति फाइल में अवश्य लगा लें. याद रखें, प्रिन्ट मीडिया का महत्व सदा से रहा है और आगे भी रहेगा, इसलिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया से पेपर अवश्य तैयार करते रहें..

9. हिसाब-किताब रखने पर आपको अपना बजट बनाने में काफी सुविधा रहेगी. वित्तीर्य वर्ष की समाप्ति पर आय-व्यय की सम्पूर्ण जानकारी सुलभ संदर्भ हेतु उपलब्ध रहेगी. हिसाब-किताब रखना जिन्दगी का एक अभिन्न एवम् महत्वपूर्ण हिस्सा है. जिस प्रकार व्यक्ति को अपने परिवार एवम् समाज के प्रति अपने एक-एक क्षण का हिसाब देना होता है, उसी प्रकार परस्पर लेन-देन एवम् आय-व्यय सम्बन्धी हिसाब रखना आवश्यक है. हिसाब न रखने पर व्यावहारिक, आर्थिक एवम् वैधानिक समस्याओं का अम्बार लग जायेगा.

हिसाब का कमाल- मिस्टर हिसाबीलाल को बचपन से ही हिसाब-किताब रखने की आदत थी. सरकारी सेवा के दौरान आय-व्यय का नियमित लेखा संधारित करते रहे. सेवा में आने से पूर्व की चल-अचल सम्पत्तियों एवम् सेवा के दौरान अर्जित/सृजित सम्पत्तियों का सम्पूर्ण विवरण रखते रहे. कृषि भूमियों में बोई गई फसलों का विवरण पटवारी से तथा उपज की बिक्री का विवरण कृषि उपज मण्डी से प्राप्त करते रहे. भवन के किरायेदारों से प्राप्त किराये एवम् अन्य स्त्रोतों से होने वाली आय का विवरण मय रसीदों के रखते रहे. वार्षिक आय–व्यय एवम् बचत सम्बन्धी रिकॉर्ड तैयार होता रहा. दुर्भाग्यवश किसी की शिकायत पर एक बार हिसाबीलाल के यहाँ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का छापा पड़ गया. किन्तु आइने की तरह साफ सुथरा हिसाब-किताब देखकर ब्यूरो के अधिकारी भी आश्चर्यचकित रह गये. हिसाबीलाल को सम्मानपूर्वक छोड़ दिया गया. अधिकारी हिसाबीलाल से बहुत कुछ सीखकर ही गये. तो आप भी हिसाबीलाल बनिए और चैन की नींद सोइए. 

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