लैला मजनू की प्रेम कहानी

ऐतिहासिक प्रेम कहानियाँ-लैला मजनू की प्रेम कहानी

दुनिया में सैकड़ों साल बाद भी लैला-मजनूं की प्रेम कहानी अमर है। कहा जाता है कि लैला और मजनू एक दूजे से बेपनाह मोहब्बत करते थे लेकिन उन्हें जबरन जुदा कर दिया गया था। उनके अमर प्रेम के चलते ही लोगों ने दोनों के नाम के बीच में ‘और’ लगाना मुनासिब नही समझा और दोनों हमेशा के लिए ‘लैला-मजनूं’ के रूप में ही पुकारे गए। यहां के लोग इस मजार को लैला-मजनू की मजार कहते हैं। 

यह उस दौर की कहानी है, जब प्रेम एक गुनाह था। अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस (मजनू) की किस्मत में यह प्रेमरोग हाथ की लकीरों में ही लिखा था। उसे देखते ही ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि कैस प्रेम दीवाना होकर दर-दर भटकता फिरेगा। ज्योतिषियों की भविष्यवाणी को झुठलाने के लिए शाह अमारी ने खूब मन्नतें की कि उनका बेटा इस प्रेमरोग से महरूम रहे, लेकिन कुदरत अपना खेल दिखाती ही है। 

दमिश्क के मदरसे में जब उसने नाज्द के शाह की बेटी लैला को देखा तो पहली नजर में उसका आशिक हो गया। मौलवी ने उसे समझाया कि वह प्रेम की बातें भूल जाए और पढ़ाई में अपना ध्यान लगाए, लेकिन प्रेम दीवाने ऐसी बातें कहाँ सुनते हैं। कैस की मोहब्बत का असर लैला पर भी हुआ और दोनों ही प्रेम सागर में डूब गए।

नतीजा यह हुआ कि लैला को घर में कैद कर दिया गया और लैला की जुदाई में कैस दीवानों की तरह मारा-मारा फिरने लगा। उसकी दीवानगी देखकर लोगों ने उसे मजनू’ का नाम दिया। आज भी लोग उसे मजनू के नाम से जानते हैं और मजनू मोहब्बत का पर्याय बन गया है। 

लैला-मजनूं को अलग करने की लाख कोशिशें की गई लेकिन सब बेकार साबित हुई। लैला की तो बख्त नामक व्यक्ति से शादी भी कर दी गई। लेकिन उसने अपने शौहर को बता दिया कि वह सिर्फ मजनूँकी है। मजनूं के अलावा उसे और कोई नही छू सकता।

बख्त ने उसे तलाक दे दिया और मजनूं के प्यार में पागल लैला जंगलों में मजनूं-मजनूँ पुकारने लगी। जब मजनूँ उसे मिला तो दोनों प्रेमपाश में बँध गए। लैला की माँ ने उसे अलग किया और घर ले गई। मजनूं के गम में लैला ने दम तोड़ दिया। लैला की मौत की खबर सुनकर मजनूँ भी चल बसा। 

लोगों का मानना है कि लैला-मजनूं सिंध प्रांत के रहने वाले थे। उनकी मौत यही हुई थी यह तो सब मानते है, लेकिन मौत कैसे हुई इसके बारे में कई मत है। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के इश्क का पता चला तो उसे बर्दाश्त नही हुआ और उसने क्रूर तरीके से मजनूं की हत्या कर दी। 

लैला को जब इसका पता चला तो वह मजनूं के शव के पास पहुंची और खुदकुशी कर जान दे दी। कुछ लोगों का मत है कि घर से भाग कर दर-दर भटकने के बाद वे यहां तक पहुंचे और प्यास से उन दोनों की मौत हो गई। वही, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अपने परिवार वालों और समाज से दुखी होकर उन्होंने एक साथ सुसाइड कर लिया था। जो भी था लेकिन दोनों को साथ-साथ दफनाया गया ताकि इस दुनिया में न मिलने वाले लैला-मजनूँ जन्नत में जाकर मिल जाएँ। 

हर साल 15 जून को लैला-मजनूं की मजार पर दो दिन का मेला लगता है। जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के प्रेमी और नवविवाहित जोड़े आते हैं और अपने सफल विवाहित जीवन की कामना करते हैं। खास बात यह है कि इस मेले में सिर्फ हिंदू या मुस्लिम ही नही बल्कि बड़ी संख्या में सिख और ईसाई भी शरीक होते हैं। 

यहां मांगी जाने वाली हर मन्नत पूरी होती है। यह पवित्र मजार प्रेम के सबसे बड़े धर्म की एक मिसाल है। समय की गति ने उनकी कब्र को नष्ट कर दिया है, लेकिन लैला-मजनूं की मोहब्बत जिंदा है और जब तक दुनिया है जिंदा रहेगी।

लैला मजनू की प्रेम कहानी-2

लैला मजनू की एक और कहानी प्रसिद्ध है

लैला राज घराने से संबध रखती थी वो बहुत सुंदर थी। मजनू ने जब पहली बार उसे देखा तो वो उससे प्यार करने लगा। वो उसकी खूबसूरती पर मरता था। एक दिन वो उससे मिलने उसके महल पंहुचा । वहां जा कर वो उसके कमरे में गया और अपने जेब से पायल निकलकर उसके खूबसूरत पैरों में पहना दी उसके बाद उसने उन पैरों को अपने होठों से चूमा।

जब वो दूसरी पायल पहनाने लगा तो लैला ने करवट बदल ली फिर मजनू ने दूसरी पायल नहीं पहनाई और उसे निशानी समझकर अपने पास रख ली। 

जब सबेरे राजकुमारी लैला उठी तो उसने अपने पैरों में उस पायल को देखा वो हैरान रह गई। अगले दिन मजनू फिर राजमहल गया और सीधे लैला के कमरे में पहुच गया। वहां जा कर उसने लैला के गालों को छुआ और फिर वो उसके क़दमों में आ गया ।

तब उसने अपने जेब से दूसरी पायल निकालकर उसे पहना दी जब उसके पैरों को चूमने लगा तो लैला ने करवट बदल ली और मजनू ने देखा की लैला के पैर में पायल नहीं थी। उसने कहा की हम तो अपना दिल भी तेरे क़दमों में रख गए और तुने उसे ठोकर मार दी ।

तभी लैला जाग गई और मजनू को पकड़ लिया। फिर उससे उसके बारे में पूछा। उनकी बातचीत कुछ इस प्रकार थी लैला – तुम कौन हो मजनू – आपका सेवक लैला – तुम रहते कहाँ हों मजनू – आपके चरणों में लैला- तुम काम क्या करते हो मजनू- आपकी पूजा और यह कह मजनू ने लैला के पैरों को चूम लिया। लैला उससे बहुत खुश हुई और वो भी उससे प्यार करने लगी।

लैला ने मजनू को अपने पास आने को कहा तो मजनू ने जवाब दिया की वो तो बस आपके क़दमों में अपनी उम्र गुजारना चाहता है। इस प्यार का जब लैला के पिता को पता चला तो वो बहुत नाराज हुए उन्होंने मजनू को बुलवाया और उससे कहा की यदि वो चाहे तो वो राजमहल की किसी भी सुंदर से सुंदर दासी को ले जा सकता है पर लैला को भूलने के बाद।

मजनू ने उनसे कहा की राजमहल की सभी दासी लैला के चरणों की धुल के सामान भी नहीं है और उसे किसी भी दोलत का लालच नहीं है। इसपर नाराज होकर लैला के पिता ने मजनू को देश निकला दे दिया और लैला की शादी किसी राजा के साथ कर दी लैला शादी के बाद अपने पति के साथ इराक चली गयी वो खुश नहीं थी। लैला इराक पहुच कर बहुत बीमार हो गयी तब वैद ने राजकुमार से मजनू को बुलवाने को कहा 

तब राजकुमार ने मजनू को बुलवाया । मजनू राजमहल पहुच कर लैला के कमरे में जाता है लैला वहां पर सो रही होती है मजनू लैला के पैरों के पास बैठ जाता है और उन्हें चूमने लगता है तभी लैला जाग जाती है और उसे उसके क़दमों से उठने को कहती है तब मजनू कहता है की वो बस अब इन पैरों में ही रहकर इन्हें चूमना चाहता है। 

तब लैला के बार बार कहने पर मजनू उससे गले मिलता है तभी वहां पर राजकुमार पहुच जाता है|राजमहल पहुच कर लेला के कमरे में जाता है लैला वहां पर सो रही होती है मजनू लैला के पैरों के पास बैठ जाता है और उन्हें चूमने लगता है तभी लैला जाग जाती है और उसे उसके क़दमों से उठने को कहती है तब मजनू कहता है की वो बस अब इन पैरों में ही रहकर इन्हें चूमना चाहता है। 

तब लैला के बार बार कहने पर मजनू उससे गले मिलता है तभी वहां पर राजकुमार पहुच जाता है और वो मजनू को लैला के चरणों में देखकर अचम्भे में पर जाते है और वो उन दोनों को आजाद कर देते है जब लैला और मजनू दोनों वहां से चले आते है तो रेगिस्तान में उनपर हमला होता है और लैला वहीं पर मर जाती है मज्नु भी उसके गम में मरने लगता है तो उसे लैला को दिया हुआ वचन याद आता है की वो उसके क़दमों में ही मरेगा तब वो उसके पैरों के पास जाकर उन्हें चूमता हुआ मर जाता है। 

वो प्यार आज भी अमर है ऐसे प्रेमी बहुत कम मिलते है जो एक दुसरे के लिए जान भी दे देते है।

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