क्यों प्रसिद्ध है अजंता-एलोरा? 

क्यों प्रसिद्ध है अजंता-एलोरा? 

क्यों प्रसिद्ध है अजंता-एलोरा? 

बात जब प्राचीन भारतीय मूर्तिकला, स्थापत्य-कला और चित्रकला की हो रही हो, तो अजंता और एलोरा का उल्लेख किए बिना यह अधूरी-सी लगती है।

 ये गुफाएं चट्टानों में से काटे गए मंदिरों के लिए प्रसिद्ध हैं। महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद के निकट स्थित अजंता-एलोरा की गुफाओं को देखने हजारों देशी-विदेशी पर्यटक जाते हैं। अजंता में लगभग 30 गुफाएं हैं। इन सभी में चट्टानों को काटकर बुद्धकालीन मंदिर बने हुए हैं। ये मंदिर ग्रेनाइट की चट्टानों को खोखली करके बनाए गए हैं। इन मंदिरों का निर्माण ई. पू. पहली शताब्दी से लेकर ईसा के बाद की 7वीं शताब्दी के बीच किया गया था। ये मंदिर दो प्रकार के हैं-चैत्य और विहार। 

क्यों प्रसिद्ध है अजंता-एलोरा? 

इन गुफाओं में बने मंदिरों की दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित चित्र बने हुए हैं। एलोरा में पहाड़ी के साथ-साथ लगभग दो किलोमीटर की दूरी तक गुफाएं बनी हुई हैं। ये गुफाएं तीन हिस्सों में बंटी हुई हैं। ये तीन हिस्से बुद्ध, हिंदू तथा जैन धर्म से संबंधित हैं। यहां पर 34 मंदिर और विहार हैं, जिनका निर्माण चौथी से नौवीं शताब्दी के बीच हुआ था।

इन सभी मंदिरों में कैलाशनाथ का मंदिर बहुत सुंदर और वैभवपूर्ण है। यह एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसमें बहुत ही सुंदर मूर्तियां पत्थरों को तराश कर बनाई गई हैं। यहां का शिव मंदिर आठवीं शताब्दी के राजपूत काल में बनाया गया था। इन मंदिरों में भारतीय शिल्प कला का सुंदरतम इतिहास छिपा है। 

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