बच्चों की कहानियां कार्टून-नन्हा कुबड़ा

बच्चों की कहानियां कार्टून

बच्चों की कहानियां कार्टून-नन्हा कुबड़ा

बहुत समय पहले की बात है। काशगर में एक दर्जी अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनमें बहुत गहरा प्यार था। एक दिन एक नन्हा कुबड़ा दर्जी की दुकान के बाहर बैठकर तंबूरा बजाने लगा। 

दर्जी को उसका संगीत अच्छा लगा। वह उसे अपने साथ घर ले गया, ताकि उसकी पत्नी भी संगीत सुन सके। संगीत सुनने के बाद उन्होंने कुबड़े को अपने साथ खाना खाने का न्यौता दिया। 

दर्जी की पत्नी ने बहुत स्वादिष्ट मछली पकाई थी। वे खाना खा रहे थे कि अचानक मछली का कांटा कुबड़े के गले में फंस गया। अचानक उसका दम घुटने लगा और वह वहीं मर गया। दर्जी और उसकी पत्नी डर गए कि अगर कोतवाल को पता चल गया, तो वह उन्हें पकड़ ले जाएगा।

दर्जी की पत्नी ने कहा, “आपसे किसने कहा था कि एक अजनबी को घर ले आओ। देखो, बैठे-बिठाए हमारे सिर पर मुसीबत आन पड़ी। उफ! अब हम क्या करें?” 

दर्जी कोई जवाब नहीं दे सका। उसकी पत्नी सच ही कह रही थी। उसे कुबड़े को अपने घर नहीं लाना चाहिए था, लेकिन अब तो कुछ नहीं हो सकता था। 

दोनों ने तय किया कि कुबड़े को पड़ोस में रहने वाले हकीम के यहां डाल दें। फिर वे उसे अंधेरे रास्ते से हकीम के घर ले गए। जब उसका नौकर बाहर आया, तो उन्होंने उसे थोड़ा पैसा देकर कहा, “ये पैसा हकीम को दे देना और कहना कि इस रोगी का इलाज कर दे।” 

जब नौकर अपने मालिक को बुलाने घर के अंदर चला गया, तो दोनों वहां से भाग खड़े हुए। जब हकीम बाहर आया, तो कम रोशनी के कारण वह कुबड़े पर गिर पड़ा। हकीम घबरा गया कि वह किस पर गिर पड़ा। जब वह उठा, तो उसने कुबड़े को पड़ा देखा। उसने रोशनी में देखा कि रोगी की जान जा चुकी थी। 

हकीम ने सोचा कि उसके गिरने के कारण ही वह आदमी मरा है, अतः उसका दिमाग चकरा गया। उसकी पत्नी भी डरी हुई थी। उसने कहा कि यह लाश तेल वाले पड़ोसी के घर रख देनी चाहिए। 

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“यह तो गलत बात होगी। हम अपने पड़ोसी को परेशानी में क्यों डालें। कुछ तो शर्म करो। अल्लाह पाक सब देख रहा है। गुनाह हमसे हुआ और 

हम इसका इल्जाम दूसरे के सिर थोप दें।” हकीम ने अपनी पत्नी को नसीहत देते हुए कहा। 

“वह सुलतान के यहां मक्खन और तेल बेचता है। अगर कोई बात हुई, तो वह संभाल लेगा।” उसकी पत्नी बोली। 

इसके बाद हकीम और उसकी पत्नी कुबड़े को अपने घर की छत पर ले गए और उसे तेल वाले के गोदाम के पास खड़ा कर दिया। वहां चूहों की भरमार थी। तेल वाले ने रात में किसी आदमी को गोदाम के पास देखा, तो उसने सोचा कि उसके गोदाम में कोई चोर सेंध लगा रहा है। 

“अच्छा तो तू है वह चोर। अभी मजा चखाता हूं।” फिर उसने अपने मूसल से कुबड़े पर वार कर दिया। 

कुबड़ा लड़खड़ाकर गिर पड़ा। तेल वाले ने रोशनी में कुबड़े को देखा, तो उसे लगा कि उसने चोर को जान से मार दिया है। बच्चों की कहानियां कार्टून

‘हाय! अब लाश को ठिकाने लगाना होगा, वरना झंझट में फंस जाऊंगा। मैं तो सुलतान के यहां आता-जाता हूं। इस बात की खबर फैलते ही मेरी बहुत बदनामी होगी। लोग कहेंगे कि तेल वाले ने अपने घर में किसी की जान ले ली, यह कितने शर्म की बात है। मैंने गुस्से में आकर गलत काम कर दिया, लेकिन अब इस लाश को छिपाए बिना बात नहीं बनेगी।’ उसने सोचा।

तत्पश्चात् तेल वाले ने कुबड़े को उठाया और बाजार में ले जाकर एक दुकान के आगे खड़ा कर दिया। तभी शराब के नशे में चूर एक व्यापारी अपने घर जा रहा था। वह चलते-चलते कुबड़े से टकरा गया और दोनों जमीन पर गिर पड़े। 

शराबी उठा और कुबड़े को एक चूंसा मारकर चिल्लाया, “तूने मेरे रास्ते में आने की हिम्मत कैसे की?” 

तभी वहां का चौकीदार आ गया। उसने सोचा कि इस शराबी ने कुबड़े को जान से मार दिया है। अतः चौकीदार ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सुबह शराबी को जज के सामने पेश किया गया। जज ने तय किया कि शराबी ने ही कुबड़े की जान ली है, इसलिए उसे फांसी की सजा सुना दी।

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अगले दिन बाजार में यह खबर फैल गई और शराबी व्यापारी को सरेआम फांसी पर लटकाने की तैयारी होने लगी। अब उस व्यापारी का नशा उतर चुका था। वह बार-बार हाथ जोड़कर सबको बता रहा था कि उसने कुबड़े की जान नहीं ली। किसी के साथ टक्कर होने से उसकी जान कैसे जा सकती है। लेकिन कोई भी व्यक्ति उसकी बात सुनने को तैयार नहीं था। चौकीदार ने उसके खिलाफ गवाही दी थी और अब उसकी सजा तय हो चुकी थी। 

जब तेल वाले ने यह सब देखा, तो वह दौड़ता हुआ आया और बोला, “ठहरो! यह आदमी बेकसूर है। इसने किसी को नहीं मारा। यह खून मैंने किया है।” फिर उसने सबको बताया कि वह किस तरह लाश को बाजार में छोड़ गया था। 

जब तेल वाले को फांसी पर चढ़ाया जाने लगा, तो हकीम को इस बारे में पता चला। उसने सोचा कि खून तो उसके हाथों हुआ था, फिर कोई दूसरा सजा क्यों भुगते। इसलिए वह गवाही देने आ गया। उसने सबको बताया कि किस तरह कुबड़े पर गिरने से उसकी मौत हो गई थी। 

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अब हकीम को फांसी पर चढ़ाने का फैसला किया गया, तभी वहां दर्जी आ गया। वह कोतवाल से बोला, “महाशय! मैं ही कुबड़े को अपने घर ले गया था। मछली का कांटा उसके गले में फंसने से वह मर गया। लेकिन हम लोग डर गए थे, इसलिए इसे हकीम के यहां छोड़ दिया।” लोगों को फांसी पर चढ़ाने वाला जल्लाद खीझकर बोला, “मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि फांसी किसे देनी है। यह तो जीवन में पहली बार देखा है कि लाश एक है और चार लोग उसका हत्यारा होने का दावा कर रहे हैं। क्या मुझे इन चारों को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए?” 

तभी वहां खड़े हुए लोग बोले, “नहीं, नहीं! ऐसा करना ठीक नहीं होगा। सभी लोग उसके हत्यारे नहीं हैं। दर्जी के घर में कुबड़े की मौत हुई है, लेकिन उसका कहना है कि उसने भी उसे नहीं मारा। उसके गले में मछली का कांटा फंस गया था।” 

कोतवाल बोला, “यह मामला अपने बस का नहीं है। इसे तो सुलतान के पास ही ले जाना चाहिए।” 

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तभी उन चारों की पत्नियां भी वहां आ गईं, जिनके पतियों पर कुबड़े की मौत का इल्जाम लग रहा था। वे सब मिलकर रोने-पीटने लगीं। चारों तरफ शोर-शराबा मच गया। सारे लोग अपनी-अपनी राय देने लगे।

कोतवाल ने सबको वहां से हटा दिया। सभी लोग अपनी दुकानें बंद करके बाहर आ गए। दरअसल, वे देखना चाहते थे कि सुलतान की ओर से इस मामले में क्या फैसला किया जाता है। 

इसके बाद कोतवाल चारों अभियुक्तों और कुबड़े की लाश लेकर सुलतान के पास पहुंचा। सुलतान को यह कहानी सुनकर बड़ी हैरानी हुई। उसने कहा कि यह मामला राज्य के इतिहास में दर्ज किया जाए। फिर उसने चारों लोगों को माफ कर दिया। 

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