किडनी कैसे काम करती है-kidney kaise kaam karti hai

किडनी कैसे काम करती है

गुर्दे कैसे काम करते हैं?-How the kidney works 

किडनी कैसे काम करती है-  गुर्दे दो ऐसे घर हैं, जिनका आकार सोयाबीन के जैसा है। ये ठोस इंद्रियां हैं और ये हमारे सभी अंगों के समान अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। लगभग 4 इंच लंबे ये दोनों गुर्दे रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ कमर के पास होते हैं। 

गुर्दे शरीर से अनैच्छिक द्रव्य को निकालते हैं। अर्थात् जो चीज हमारे शरीर को नहीं चाहिए, उससे हमें छुटकारा दिलाते हैं। ये हमारे शरीर में मौजूद पानी की मात्रा को नियत करते हैं और दूसरे जरूरी द्रव्यों को, जो रक्त में मौजूद होते हैं, उनकी नियमित व्यवस्था करते हैं। हर गुर्दे के बाहरी हिस्से में जो रक्त की सूक्ष्म नलियां होती हैं, ये गेंद के समान गोल छल्ले से अलग होती हैं, जोकि बहुत महीन और कोमल झिल्ली से ढकी रहती है।

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गुर्दे कैसे काम करते हैं?-

हर गुर्दे के अंदर लगभग 150000 की संख्या में छोटी गेंदे होती है, जिन्हें ‘ग्लामेरूली’ कहा जाता है। अपने अपेक्षाकृत आकार के छोटे होने के बाद हृदय से निकलने वाले रक्त का लगभग 20 प्रतिशत भाग गुर्दो को मिलता है। 

‘ग्लामेरूली’ नामक ये छोटी गेंदे कुछ रक्त को बहने देती हैं, जो बहुत पतला द्रव्य होता है तथा इन कोमल झिल्लियों में से होकर निकलता है। जो पतला द्रव्य इन झिल्लियों में होकर निकलता है, उसे ‘यूरिन’ कहते हैं। यह प्यालों के समान दीवारों के अंदर ही एकत्रित होता है, यह हर ग्लामेरूली को ढकता है। एक बहुत ही कोमल ट्यूब जिसे कि ‘ट्यूबले’ कहते हैं, इस यूरीन को कपों से बहाती है।

जैसे ही यूरिन इन सूक्ष्म ट्यूबलों में से होकर बहना शुरू होता है, उसी समय भीतरी कोशिकाएं रक्त और यूरीन के मध्य तत्वों का आदान-प्रदान प्रारंभ कर देती हैं। ये द्रव्य, जिनकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है, पुनः रक्त में ले लिए जाते हैं और इस प्रकार हमारे शरीर से शर्करा खत्म नहीं होती। 

ट्यूबले में बहुत-सा पानी भी रक्त में आकर चला जाता है, इस प्रकार गुर्दे हमारे शरीर को अच्छी प्रकार से नम रखने में सहायक होते हैं। अगर एक व्यक्ति को बहुत अधिक पसीना आ रहा है और वह पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता है तो गुर्दे ज्यादा रक्त प्रवाहित करेंगे। तब यूरिन भी कम बनेगा तथा गुर्दे के ट्यूबले एसिड को रक्त में नियमित करने में सहायक भी होंगे। 

सभी छोटे ट्यूबले अंदरूनी भाग में एकत्रित होते हैं और बहुत ही कोमल थैलीनुमा झिल्ली में जाकर खुलते हैं, गुर्दे के निचले भाग में, जिसे ‘पेल्विस’ कहते हैं। तब यूरिन नीचे की दो ट्यूबों में जाता है, जिन्हें ‘यूट्स’ कहते हैं, जोकि दोनों गुर्दो को मूत्राशय से जोड़ता है।

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