केदारनाथ तीर्थ स्थल-Kedarnath tirth sthal

केदारनाथ तीर्थ स्थल

केदारनाथ तीर्थ स्थल-Kedarnath tirth sthal

 केदारनाथ  उत्तराखंड राज्य में समुद्र तल से लगभग 4000 मीटर ऊंचे केदारनामक पर्वत पर स्थित है। शिवपुराण के अनुसार नर-नारायण (भगवान विष्णु के चौथे अवतार) केदार शृंग पर तप किया करते थे। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रगट हुए और नर-नारायण की प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां सदैव वास करने का उन्हें वरदान दिया। 

सतयुग में उपमन्यू ने और द्वापर में पांडवों ने भी यहां तपस्या की थी। केदारनाथ के दर्शनों का बड़ा माहात्म्य है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बदरीनाथ की यात्रा करता है, तो उसे यात्रा का फल नहीं मिलता। उल्लेखनीय है कि केदारनाथ में निर्मित मूर्ति नहीं है, केवल एक बहुत बड़ा त्रिकोण पर्वत खंड है। यात्री स्वयं जाकर पूजा करते हैं और अंकमाल देते हैं। 

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केदारनाथ में दर्शनीय स्थल-Kedarnath mein darshniya sthal

Kedarnath tirth sthal

शंकराचार्य की समाधि : वैदिक धर्म को पुनः प्रतिष्ठित करने वाले आदिगुरु शंकराचार्य ने इसी जगह पर अपना शरीर त्यागा था। 

पांचों पांडवों की मूर्तियां : यहां पांचों पांडवों की सुंदर मूर्तियां हैं। 

केदारनाथ मंदिर की मूर्तियां : श्रीकेदारनाथ मंदिर में उषा, अनिरुद्ध, पांचों पांडवों, श्रीकृष्ण तथा शिव-पार्वती की सुंदर मूर्तियां हैं। 

उषीमठ : जाड़ों में केदारनाथ बर्फ से ढक जाता है, इसलिए उनकी पूजा-अर्चना करना कठिन कार्य हो जाता है। ऐसी स्थिति में केदारनाथ की चल-मूर्ति उषीमठ में स्थानांतरित कर दी जाती है। शीतकाल में उनकी पूजा यहीं की जाती है। 

कालीमठ : मंदाकिनी के उस पार कालीमठ है। यहां महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती के मंदिर विशेषरूप से दर्शनीय हैं। 

केदारनाथ कब जाए

मई से जून और सितंबर से अक्तूबर तक। 

 केदारनाथ कैसे जाएं

हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा जॉलीग्रांट है, जो देहरादून में स्थित है। देहरादून से केदारनाथ की दूरी 239 किलोमीटर है। यहां से किराए के वाहनों की सेवाएं मिलती हैं। 

रेल मार्ग : निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो केदारनाथ से 189 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग : केदारनाथ उत्तराखंड के कई शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है, जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, पौड़ी तथा चमोली इत्यादि। 

केदारनाथ में कहा ठहरे

 केदारनाथ के निकट अतिथि-गृह, धर्मशालाएं तथा होटल उपलब्ध हैं, जिनमें ठहरा जा सकता है।

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तीर्थ स्थल क्या है

तीर्थ वह पुण्य स्थल है जहां व्यक्ति धर्म का अनुशीलन करके मन की शांति के लिए जाते हैं। पौराणिक दृष्टि से देखें, तो तीर्थ उसे कहा जाता है जिसके माध्यम से मनुष्य पापादि से मुक्त हो जाए। इसीलिए तीर्थ को पापादिकों से मुक्ति का स्थल कहा गया है, यथा-‘तरति पापादिकं यस्मात् 

तीर्थ स्थल क्या है

तीर्थ स्थल का महत्व

तीर्थस्थल भारतीय संस्कृति की गरिमा के परिचायक हैं। इनका आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व भी है, जिसका वर्णन पौराणिक व ऐतिहासिक ग्रंथों में यत्र-तत्र मिलता है। चार धामों, सप्तपुरियों, नदियों आदि का जो महत्व प्राचीन भारत में था, वही महत्व अर्वाचीन भारत में भी है। इन तीर्थस्थलों के प्रति वर्तमान में भी धर्मपरायण लोगों की आस्था जुड़ी है। 

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