काजीरंगा नेशनल पार्क

Kaziranga national park in Hindi,

काजीरंगा नेशनल पार्क के बारे में जानकारी-Kaziranga national park in Hind

काजीरंगा का नाम लेते ही आंखों के सामने एक सींग वाले गैंडे का दृश्य उभर आता है। यह राष्ट्रीय पार्क असम का एकमात्र राष्ट्रीय पार्क है। ऊबड़ खाबड़ मैदानों, लंबी-ऊंची घास, भयंकर दलदलों से यह अटा है। यहां की स्थानीय जनजाति कार्बी के शब्दों में काजीरंगा का अर्थ है- वह स्थान जहां पहाड़ी बकरा पानी पीता हो।

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इस पार्क में प्रसिद्ध एक सींग वाले गैंडे के अलावा हाथी, जंगली भैंसा, दलदली हिरण, सांभर, जंगली सुअर, जंगली भालू, वाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, लंगूर, सियार आदि जानवर प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। शरद ऋतु में यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन भी होता है। इस पार्क की खूबसूरती एवं जैव विविधता को देखते हुए ही इसको 11 फरवरी 1974 को राष्ट्रीय पार्क घोषित कर दिया गया। 

 

elephant

काजीरंगा जाने वाले पर्यटक जीप और हाथी से सफारी की सैर का लुत्फ अवश्य उठाते हैं। अगर आप सही समय पर सैर करने जाएं तो दो दिनों में ही अनेक जानवर देख सकते हैं। तीन से चार घंटे की सफारी यात्रा के दौरान काजीरंगा पार्क का संपूर्ण लुत्फ उठाया जा सकता है। छोटी नदियों के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद उठाने के साथ ही छोटी आकार के झीलों में हाथियों द्वारा किए जा रहे करतब अपनेआप में एक अनूठा अनुभव होता है। आमतौर पर पार्क के हाथी दोपहर वाद मिहिमुख, जो कोहोरा सर्किट के समीप है, के झरनों में नहाने का मजा लेते हैं। ऐसे में सैलानी, खासकर बच्चे हाथियों को नजदीक से देख सकते हैं। 

bird

बागोरी पार्क का पश्चिमी छोर है, जो पार्क के विहंगम दृश्य को देखने के लिए जाना जाता है। इस रूट पर शाम को घूमने का मजा ही अलग है। यह वह वक्त होता है जब हाथी झुंड में घास के खुले मैदान में अंगड़ाई ले रहे होते हैं। शाम के वक्त आप सौभाग्य से ही सही, दलदल में हिरणों की गतिविधियों को देख सकते हैं, जिसको इस पार्क का शृंगार भी कहा जाता है। 

 

lizard

यह तथ्य बहुत कम लोगों को मालूम है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पक्षी प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग है। कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के बाद काजीरंगा दूसरा ऐसा उद्यान है, जहां पक्षियों की विविधता और बहुलता दोनों एक साथ देखने को मिलती है। इस उद्यान में 450 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पायी जाती हैं, जिसमें प्रवासी पक्षी भी हैं। काजीरंगा पार्क में लुप्त हो रहे बंगाल फ्लोरिकन के अलावा हार्नबिल और उल्लू की प्रजातियां भी देखने को मिल जाती हैं।

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