अकबर बीरबल के रोचक किस्से-दो मूर्ख

अकबर बीरबल के रोचक किस्से

अकबर बीरबल के रोचक किस्से-दो मूर्ख

बादशाह अकबर अक्सर बीरबल के आगे नए से नए सवाल पेश करते ताकि उनकी बुद्धिमानी और समझदारी की परीक्षा ले सकें। उन्हें कभी निराश नहीं होना पड़ता था क्योंकि बीरबल की अक्लमंदी बेजोड़ थी। 

एक बार अकबर ने बीरबल से कहा, “बीरबल! जाओ, हमारे राज्य में से चार मूों को पकड़ कर हमारे सामने लाओ। हम उन महामों से मिलना चाहते हैं।” पहले तो बीरबल यह बात सुन कर चौंके परंतु फिर हाथ जोड़ कर बोले, “महाराज! मैं ऐसा ही करूंगा पर मुझे कुछ दिन का समय चाहिए क्योंकि इस दुनिया में मूर्ख तो भरे हुए हैं और मैं आपके सामने सबसे बड़े मूल् को पेश करना चाहता हूं।” 1 अकबर ने बीरबल की बात मान ली। बीरबल बाजार से निकले और अपना पहला मूर्ख तलाश करने लगे। उन्होंने एक आदमी को एक बड़ा सा थाल ले कर जाते देखा। उस थाल में महंगे उपहार, कपड़े, मिठाई व अन्य सामान आदि रखे थे। बीरबल ने हैरानी से पूछा, “ये सामान कहां ले जा रहे हो?” 

वह आदमी बोला, “मेरी पत्नी मुझे छोड़ कर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगी है। उसके घर बेटा हुआ है। उसके लिए ही मैं ये सब ले जा रहा हूं।” बीरबल को लगा कि उन्हें उनका पहला मूर्ख मिल गया है। उन्होंने उसे कहा कि वह अगले दिन दरबार में महाराज के सामने हाजिर हो। मूर्ख ने झट से हामी भर दी।

फिर बीरबल अपने दूसरे मूर्ख की तलाश में आगे बढ़े। इस बार वे खेतों की ओर आ गए। उन्होंने देखा कि एक आदमी भैंस की सवारी करने की कोशिश कर रहा है। उसने अपने सिर पर घास का बड़ा गट्ठर उठा रखा था। वे उसके पास गए और कहा, “तुम इस तरह भैंस की सवारी करने की कोशिश क्यों कर रहे हो? यह घास का बोझा इसकी पीठ पर क्यों नहीं रख देते?” 

अकबर बीरबल के रोचक किस्से

उस आदमी ने कहा, “श्रीमान! मेरी भैंस मां बनने वाली है। अगर मैं इसकी पीठ पर सारा बोझ लाद दूंगा तो यह बहुत बुरी बात होगी इसलिए मैंने सारा बोझ अपने सिर पर ले रखा है ताकि इस पर ज्यादा भार न आए।” जवाब सुन कर बीरबल को यह तय करने में देर नहीं लगी कि यही उनका दूसरा मूर्ख था। उन्होंने उसे भी अगले दिन दरबार में हाजिर होने को कहा। वह आदमी हामी दे कर चला गया। 

अगले दिन बीरबल दरबार में उन दोनों मूर्यो के साथ गए और उनके किस्से बादशाह अकबर को बताए। वे दिल खोल कर हंसे। फिर उन्होंने कहा, “बीरबल! मैंने तुम्हें चार मूर्ख लाने को कहा था। बाकी दो मूर्ख कहां हैं?” 

अकबर बीरबल के रोचक किस्से

बीरबल ने उत्तर दिया, “जहांपनाह! आप बुरा न मानें तो एक बात कहना चाहूंगा। तीसरे मूर्ख आप हैं, जिन्होंने मुझे मूखों की तलाश करने भेजा और चौथा मूर्ख मैं हूं, जो आपके कहने से यह काम करने निकल पड़ा। जिस काम को करने की कोई वजह न हो, उसे करने वाला मूर्ख ही तो कहलाएगा।” यह सुन कर अकबर हंसे बिना नहीं रह सके और अपने दीवान को शाबाशी भी दी। वे मान गए कि वाकई बीरबल एक वफादार साथी थे। वे अकबर को उनकी किसी गलत बात पर टोकने से भी नहीं हिचकिचाते थे।

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