पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां-चापलूस गीदड़ 

पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां-चापलूस गीदड़ 

पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां-चापलूस गीदड़ 

किसी जंगल में एक चालाक गीदड़ रहता था। वह बहुत ही चतुर था और अक्सर अपना काम निकालने के लिए चापलूसी किया करता था।

एक दिन वह अपने भोजन की तलाश में जंगल में घूम रहा था, तभी उसकी नजर एक मरे हुए हाथी पर पड़ी। उसे मरा हुआ हाथी देख कर बहुत खुशी हुई। वह तो उसके लिए कई सप्ताह का भोजन बन सकता था। वह जल्दी से अपनी दावत शुरू करना चाहता था पर उसके सामने एक समस्या थी। हाथी की खाल इतनी कड़ी थी कि वह लाख कोशिश करने पर भी उसे नहीं चीर सकता था।

जब वह हाथी की खाल के साथ जूझ रहा था तो उसने एक शेर को उधर आते देखा। वह जल्दी से शेर के पांवों में गिर गया और प्रणाम कर बोला, “महाराज! मैं आपके लिए इस मरे हुए हाथी की रखवाली कर रहा था। आइए, आप इसे खा कर अपनी भूख शांत कीजिए।” 

शेर ने पहले हाथी को और फिर गीदड़ को गुस्से से देखा तथा गरजा, “क्या तुम जानते नहीं कि मैं किसी का मारा हुआ शिकार नहीं करता। तुमने मुझे ऐसा भोजन देने की हिम्मत कैसे की?” वह दहाड़ते हुए वहां से चला गया। 

गीदड़ ने चैन की सांस ली। लेकिन उसकी परेशानी का अब भी कोई हल नहीं निकला था। अचानक ही उसे अपनी ओर एक तेंदुआ आता दिखाई दिया। ‘अरे! यह जानवर तो शेर जैसा नहीं दिखता। मैं यहां चापलूसी से काम नहीं चला सकता। यहां तो अपना दिमाग ही लगाना होगा-‘ गीदड़ ने सोचा। 

वह चिल्लाया, “महोदय! मैं इस मरे हुए हाथी की रखवाली कर रहा हूं, जिसे शेर ने मारा है। जंगल के राजा ने कहा है कि अगर शिकार के आसपास कोई तेंदुआ आता दिखाई दे तो मैं उन्हें तुरंत इसकी खबर दूं। इसलिए मैं आपको सावधान कर रहा हूं।” 

पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां-चापलूस गीदड़ 

तेंदुआ शेर से बहुत डरता था। वह गीदड़ के आगे विनती करने लगा कि वह शेर से कुछ न कहे और वहां से दुम दबा कर भाग खड़ा हुआ। इसके फौरन बाद ही वहां एक चीता आ गया। जब गीदड़ ने उसे आता देखा तो वह खुश हुआ और सोचने लगा, ‘यह चीता मेरी परेशानी दूर कर सकता है! इसके पास बहुत मजबूत पंजे और दांत हैं। अगर यह हाथी की खाल को चीर दे तो मेरे लिए सब कुछ बहुत आसान हो जाएगा पर मुझे इसके साथ एक चाल चलनी होगी ताकि इससे अपना काम निकलवा सकू।’ 

जब चीते ने मरे हुए हाथी पर हमला किया तो गीदड़ दुष्टता से मुस्कुराता हुआ उसे देखता रहा। फिर वह बोला, “नमस्ते 

पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां

महोदय! आप बिल्कुल सही समय पर आए हैं। इस हाथी को जिस शेर ने मारा है। वह जरा टहलने गया है। उसके आने से पहले आप हाथी का थोड़ा स्वाद चख सकते हैं। मैं यहां से निगरानी करूंगा। जैसे ही शेर आता दिखाई देगा। मैं आपको इशारा कर दूंगा।” 

“यह तो बहुत अच्छी बात है। मेहरबानी!” चीते ने कहा और मरे हुए हाथी की खाल उतारने लगा। कुछ ही देर बाद गीदड़ ने ऐसा दिखावा किया मानो उसने शेर को आता देखा हो। उसने चीते को बताया तो वह वहां से सिर पर पांव रख कर भागा। तब तक वह हाथी की सारी खाल उतार चुका था। 

इसके बाद गीदड़ ने बड़े ही मजे से हाथी के मांस की दावत की। अगर कोई दूसरा गीदड़ उसके पास आता, तो वह उसे खदेड़ कर भगा देता। उसने अपनी चतुराई से कई दिन के लिए भोजन का प्रबंध कर लिया था। 

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानियां-वफादार नेवला

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानियां-वफादार नेवला

किसी गांव में देव शर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह रोज भिक्षा मांग कर लाता। उसे जो भी मिलता, वह उसी से अपने परिवार का पेट भरता। उसका विवाह हो चुका था। उसकी पत्नी भी उसकी तरह ही दयालु स्वभाव की थी। दोनों पति-पत्नी बहुत ही सीमित साधनों से अपना गुजारा चलाया करते थे।

कुछ समय बाद उनके यहां एक पुत्र ने जन्म लिया। उसी दिन देव शर्मा को नेवले का छोटा-सा बच्चा भी मिला, जो अब अनाथ था। पति और पत्नी बहुत दयालु थे इसलिए वे उस नेवले को घर ले आए। वे उसे अपने दूसरे बेटे की तरह पालने लगे। मां अपने बच्चे की देखरेख करने के साथ-साथ नेवले की भी देखभाल करती। पिता अपने बच्चे की तरह नेवले को भी दुलार देता। पति और पत्नी को नेवले के बच्चे से बहुत प्यार हो गया था। 

 पर देव शर्मा की पत्नी को कभी-कभी डर भी लगता कि वह सोचती, ‘मुझे अपने बच्चे का ध्यान रखना चाहिए, कहीं यह न हो कि नेवला इसे किसी तरह से चोट पहुंचा दे।’ वह हमेशा सावधानी से अपने बच्चे का पालन करती। 

एक दिन उनके घर में पीने का पानी खत्म हो गया। उसे पानी लेने के लिए नदी पर जाना पड़ा। उसका पति बच्चे से खेल रहा था और नेवले का बच्चा उनके आसपास ही घूम रहा था। जब वह नदी पर पानी लेने जाने लगी तो उसने अपने पति से कहा, “मेहरबानी करके बच्चे की देखभाल करना। नेवले के बच्चे पर नजर रखना, कहीं वह हमारे बच्चे को चोट न पहुंचा दे।” उसके पति ने कहा बोला, “तुम जाओ, चिंता मत करो। मैं देख लूंगा।” इसके बाद वह बच्चे से खेलने लगा। 

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानियां-वफादार नेवला

कुछ ही देर बाद पति अपनी पत्नी की कही बात भूल गया। उसका भिक्षा मांगने का समय हो गया था। उसने अपना झोला अपने कंधे पर टांगा और बच्चे तथा नेवले को घर पर छोड़ कर चला गया। उसके जाने के बाद नेवला बच्चे के साथ खेलता रहा। अचानक नेवले ने देखा कि बिल से निकलकर एक सांप घर में आ रहा है। 

नेवले को भी बच्चे से बहुत प्यार था। वह उसके साथ ही तो पला-बढ़ा था। उसे लगा कि सांप बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है। 

ज्यों ही सांप बच्चे की ओर बढ़ा, उसने अपने तेज पंजों व दांतों से सांप पर हमला कर दिया ताकि बच्चे को सुरक्षित रख सके। और आखिर सांप के टुकड़े-टुकड़े कर दिए, सांप मर गया। जब बच्चे की मां घर आई तो उसने देखा कि नेवले के मुंह और पंजों पर खून लगा हुआ है। वह भाग कर दरवाजे के पास गया ताकि मां को सांप के बारे में बता सके, लेकिन ब्राह्मणी यह सोच कर घबरा गई कि नेवले ने बच्चे को मार दिया है। 

उसने आव देखा न ताव पानी से भरा मटका नेवले पर दे मारा। बेचारा नेवले का बच्चा वहीं मर गया। 

पंचतंत्र की शिक्षाप्रद कहानियां-वफादार नेवला

इसके बाद वह जोर-जोर से रोते हुए बच्चे के झूले के पास गई। वहां जा कर उसने देखा कि बच्चा तो आराम से खेल रहा है। उसके पास ही एक सांप मरा पड़ा है, जिसके कई टुकड़े हो चुके हैं। अब उसे अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने हड़बड़ाहट में आ कर कितनी बड़ी भूल कर दी थी। उसने अपने परिवार के सदस्य की तरह रहने वाले वफादार नेवले को मार दिया था। अब वह उसके लिए पछतावा करने लगी पर नेवले को तो वापस नहीं लाया जा सकता था। 

इसलिए हमें कोई भी काम करने से पहले, सोच-विचार कर लेना चाहिए वरना बाद में पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं आता। 

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