अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी-अंधों की नगरी

अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी-

अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी-अंधों की नगरी

आगरा के बादशाह अकबर अपनी बहादुरी के अलावा अपनी दरियादिली के लिए भी जाने जाते थे। वे अक्सर लोगों को दान में कपड़े व अन्य वस्तुएं दिया करते थे। 

पूरे राज्य में लोग उनकी दानप्रियता के बारे में जानते थे इसलिए कई बार ऐसे लोग भी दान लेने आ जाते, जिनके पास पहले से ही सब कुछ होता था। 

एक बार की बात है। अकबर ने तय किया कि वे अपने राज्य में रहने वाले अंधों को दान देंगे। वे नहीं चाहते थे कि कोई भी अंधा छूटे इसलिए एक दरबारी से कहा गया कि वह राज्य में रहने वाले सभी अंधे लोगों की एक सूची तैयार करे। यह सूची आखिर में बीरबल द्वारा जांची जानी थी।

दरबारी ने सूची बना कर बीरबल को थमा दी। अकबर ने बीरबल से कहा कि वे अंधे लोगों को दान देने का प्रबंध करें। 

बीरबल बोले, “महाराज! मुझे लगता है कि इस सूची में कुछ कमी है। हमारे राज्य में तो और भी बहुत से अंधे लोग हैं। दरअसल यहां अंधे लोगों की गिनती अधिक है। यह सूची अधूरी है।” 

बादशाह अकबर चकरा गए और बोले, “अगर यही बात है तो तुम नई सूची बना कर लाओ। हो सकता है कि हमारे दरबारी से कोई कमी रह गई हो।” 

असल में, बादशाह अकबर को बताना चाहते थे कि अंधे होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी की दोनों आंखें न हों। अंधों की श्रेणी में तो वो भी आते हैं, जिनकी आंखें तो होती हैं, लेकिन उनका व्यवहार अंधों-सा होता है।

बीरबल उसी शाम भीड़ से भरे बाजार में पहुंचे। उनका नौकर भी साथ था। वे अपने साथ चारपाई बुनने का सामान भी ले गए थे। उन्होंने अपने सामान को वहीं रखा और चारपाई तैयार करने लगे। उनका नौकर हाथ में कागज और कलम लेकर खड़ा हो गया।

अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी-

वहां से निकल रहे एक आदमी ने रुक कर बीरबल को देखा व पूछा, “आप क्या कर रहे हैं?” बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया। वे अपने नौकर के कान में धीरे से कुछ बोले और उसने अपने कागज पर कुछ लिख लिया। 

इसके बाद और भी लोग इसी तरह आ कर सवाल करते रहे पर किसी को बीरबल से कोई जवाब नहीं मिला। वे हर बार नौकर के कान में कुछ बोलते और वह उस शब्द को कागज पर लिख देता। 

यह खबर बादशाह तक भी पहुंची। वे भी वहीं आ गए और बोले, सा, “बीरबल! मुझे तो समझ नहीं आ रहा कि तुम कर क्या रहे हो।” इस बार बीरबल ने अपने नौकर पर एक नजर डाली और उसने संकेत पाकर कुछ लिख लिया। 

अब वह कागज बीरबल के हाथ में था। उन्होंने वह कागज अकबर के हाथ में देते हुए कहा, “महाराज! यह आपके राज्य के अंधे लोगों की सूची है।” अकबर अंत में अपना नाम देख कर चौंक गए। 

अकबर बीरबल की प्रेरणादायक कहानी-

“बीरबल! तुम्हारा दिमाग घास खाने गया है? तुमने मेरा नाम इस सूची में क्यों लिखा?” बीरबल ने सफाई देते हुए कहा, “आप भी तो इसी सूची में आते हैं। आपने भी दूसरों की तरह मुझे चारपाई बुनते हुए देखा पर फिर भी आते ही पूछा कि मैं क्या कर रहा हूं? क्या आपको दिखाई नहीं दिया? इस तरह आपका नाम भी दूसरे आंख वाले अंधों की तरह इस सूची में शामिल कर लिया गया।” अकबर के पास बीरबल की इस बात का कोई जवाब नहीं था। 

बीरबल अक्सर उन्हें यूं ही चौंका दिया करते थे। 

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