बच्चों की ज्ञानवर्धक कहानी-लालच का फल 

बच्चों की ज्ञानवर्धक कहानी

बच्चों की ज्ञानवर्धक कहानी-लालच का फल 

किसी गांव में एक किसान रहता था। उसकी पत्नी बहुत लालची थी। वह हमेशा अधिक से अधिक धन और वस्तुएं पाने की कोशिश में लगी रहती थी। 

एक दिन उनके घर में एक चोर घुस आया। किसान की पत्नी की नींद खुल गई। उसे लगा कि चोर के पास तो और भी बहुत सी कीमती वस्तुएं होंगी। वह किसान से अधिक अमीर होगा इसलिए उसे उसके साथ ही रहना चाहिए। उसने अपने किसान पति के घर की कीमती वस्तुएं तथा गहने आदि लिए और चोर के साथ ही भाग गई। वह बहुत खुश थी कि अब उसे चोर का भी धन मिल जाएगा। 

वह चोर के साथ एक नदी के किनारे पहुंची। रात होने के कारण वहां नदी पार करने के लिए कोई नाव नहीं थी। 

चोर ने उससे कहा कि वह अपने कीमती कपड़े और गहने उसे पकड़ा दे ताकि वह आराम से तैर कर नदी पार कर सके। किसान की पत्नी ने चोर को सारा सामान दे दिया। चोर नदी पार कर गया। वह इसी किनारे इंतजार करती रही कि चोर वापस आएगा और उसे नदी पार करने में मदद करेगा। 

जब वह इंतजार कर रही थी, उसी समय एक गीदड़ अपने मुंह में मांस का टुकड़ा लिए वहां आ गया। वह उसे वहीं खाने बैठ गया। पर अचानक ही उसका ध्यान एक बड़ी-सी मछली पर चला गया, जो नदी के बहुत किनारे आ गई थी। अपने मांस के टुकड़े को किनारे पर रख कर गीदड़ उसे खाने के लिए लपका। उसने उसे पंजा मार कर पकड़ना चाहा पर मछली फिसल कर गहरे पानी में चली गई। गीदड़ निराश हो कर उसे देखता ही रह गया। 

तब उसे याद आया कि वह तो किनारे पर अपना मांस का टुकड़ा छोड़ आया है। जब वह वापस आया तो वहां वह टुकड़ा भी नहीं था। दरअसल जब वह अपना मांस का टुकड़ा खाने लगा तो पेड़ पर बैठे एक बाज ने उसे देख लिया था। ज्यों ही सियार वहां से नदी की ओर गया वह बाज उसका भोजन ले कर पेड़ पर वापस चला गया। 

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गीदड़ ने जब किसी के हंसने की आवाज सुनी तो उसने हैरानी से देखा। किसान की पत्नी यह सब देख रही थी कि किस तरह लालच में आ कर, गीदड़ में आ कर, गीदड़ मछली की ओर लपका और उसे अपने हाथ में आए मांस के टुकड़े से भी हाथ धोना पड़ा। गीदड़ भी किसान की पत्नी को पहले देख चुका था पर अपने भोजन के चक्कर में उसने उस ओर ध्यान नहीं दिया था। 

“तुम हंस क्यों रही हो?” गीदड़ ने पूछा 

“मुझे! तेरे लालच पर हंसी आ रही है। कैसा मूर्ख है तू, तेरे पास तो पहले से ही मांस का बड़ा-सा टुकड़ा था। उससे तेरा पेट अच्छी तरह भर जाता। लेकिन तू उसे छोड़ कर मछली के लिए लपका। अब न तो तेरे पास मांस का टुकड़ा है और न ही मछली। मछली पानी में चली गई और तेरा भोजन बाज ले गया। तुझे तो कुछ नहीं मिला।” । 

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गीदड़ बोला, “फिर तो हम दोनों एक जैसे ही मूर्ख हैं। मैं जानता हूं कि तुम्हारे साथ क्या हुआ है। तुम तो मुझसे ज्यादा अक्लमंद हो, पर एक चोर के चक्कर में पड़ कर अपने किसान पति का घर छोड़ आई। अब वह चोर तुम्हारा सारा सामान ले कर भाग गया और तुम यहां बैठी उसका इंतजार कर रही हो। तुम तो मुझसे भी बड़ी मूर्ख हो!” किसान की पत्नी के पास गीदड़ के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। 

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