श्रीमती इंदिरा गांधी पर निबंध

इंदिरा गांधी पर निबंध

श्रीमती इंदिरा गांधी पर निबंध |Essay on Indira Gandhi in Hindi

स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपना जीवन मातृभूमि के गौरव की रक्षा में समर्पित कर दिया। आदर्श पिता की आदर्श पुत्री इंदिरा जी के विषय में एक विदेशी लेखक माइक किंग्सले ने काफी नपे तुले शब्दों में कहा है, “अप्रतिम सौंदर्य और शील के साथ जब बौद्धिक चेतना का संयोग होता है, तब उसका नाम हो जाता है-इंदिरा गांधी।” । 

इंदिरा गांधी का जन्म इलाहाबाद के आनंद भवन में 19 नवंबर, 1917 को हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा माता का नाम कमला नेहरू था। बचपन में ही इनकी मां चल बसी थीं। अतएव उनका लालन-पालन दादा मोतीलाल नेहरू और पिता जवाहरलाल नेहरू की देख-रेख में हुआ। वे बचपन से ही देखने में सुंदर एवं आकर्षक थीं। लोग उन्हें प्यार से ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी’ कहते थे। ये प्रखर बुद्धि की महिला थीं। उन्होंने अपने कार्यों से अपने आपको योग्य पिता की योग्य पुत्री साबित किया। 

श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद में हुई। हाई स्कूल की परीक्षा इन्होंने पुणे में पास की। विदेशों में भी इन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी। भारतीय कला और संस्कृति की शिक्षा इन्होंने शांति-निकेतन में पाई। शांति-निकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की देख-रेख में इनका चतुर्दिक विकास हुआ। इसके अलावा अपने पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ देश-विदेश में भ्रमण से भी इन्हें काफी व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ था। 

सन 1942 में इंदिरा जी की शादी फिरोज गांधी के साथ हुई। इनके दो पुत्र हुए–राजीव गांधी और संजय गांधी। सन 1950 में ये अखिल भारतीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। सन 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद लालबहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री बने। इंदिरा जी शास्त्री जी के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं। सन 1966 में ताशकंद में शास्त्री जी का अचानक निधन हो जाने पर मोरारजी देसाई के साथ प्रधानमंत्री पद के लिए जोरदार टक्कर हुई, जिसमें इंदिरा गांधी विजयी रहीं। इस प्रकार स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनने का इन्हें महान गौरव प्राप्त हुआ।

इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में भारत से गरीबी मिटाने का अथक प्रयास किया। इन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। फलत: बैंकों के रुपये भारत की गरीबी मिटाने में लगाए गए। इन्होंने प्रिवीपर्स अर्थात राजाओं को मुफ्त में सरकार से मिलने वाली सहायता राशि को समाप्त किया। इस प्रकार इंदिरा जी द्वारा दो महत्वपूर्ण कार्य आर्थिक दृष्टि से किए गए। इसके अलावा इन्होंने बीस सूत्री कार्यक्रम की शुरुआत की, जो आज भी चल रहे हैं। परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष कार्यक्रम में इंदिरा जी ने विशेष रुचि लेकर भारत को सम्मानजनक स्थिति में खड़ा किया। इनके कुशल नेतृत्व में बंगलादेश को आजादी मिली। इन घटनाओं से विश्व राजनीति में इनकी तूती बोलने लगी। 

इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हमारा देश भारत विश्व की एक शक्ति बनता जा ङ्केरहा था। ऐसे में विदेशी ताकतों को यह बात अच्छी नहीं लगी। फलतः आतंकवादी शक्तियों ने इनकी सुरक्षा में लगे दो प्रहरियों द्वारा 31 अक्टूबर, 1984 को इनकी हत्या करवा दी। इंदिरा जी महान देशभक्त थीं। मरने से पहले उड़ीसा की आखिरी जनसभा में उनके ये शब्द गूंजे थे, जो अत्यंत मार्मिक हैं, “मैं अपने देश की एकता और अखंडता की रक्षा अपने खून की एक-एक बूंद से करूंगी।” इंदिरा गांधी के बलिदान ने इसे सत्य सिद्ध किया। 

पाकिस्तान के साथ युद्ध में इंदिरा जी ने जिस प्रकार धैर्य और साहस का परिचय दिया, पश्चिमी देश के अखबारों ने इन्हें ‘जोन ऑफ आर्क’ कहा। इन्हें शक्ति का प्रतिरूप माना गया। शांति और युद्ध-दोनों कालों में अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से ये किसी दूसरे राजनीतिज्ञ से कहीं आगे निकल गईं। जब शांति का समय आया, तो पंडित नेहरू के आदर्शों पर चलीं और युद्ध काल में चर्चिल के आदर्शों को अपनाया। वे जहां मोम के समान अत्यंत कोमल थीं, वहीं इस्पात की तरह काफी कठोर भी थीं। उनके जन्म पर सरोजनी नायडू ने बधाई देते हुए लिखा था, “इंदिरा भारत की नई आत्मा हैं। इनकी कर्तव्य निष्ठा और सफलता भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखी जाएगी।” 

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