दुनिया भर में भारत की कूटनीतिक सफलता | India’s diplomatic success around the world

दुनिया भर में भारत की कूटनीतिक सफलता

दुनिया भर में भारत की कूटनीतिक सफलता | India’s diplomatic success around the world

पिछले कुछ वर्षों के दौरान केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सफलता कटनीति के क्षेत्र में रही है और आस-पड़ोस से लेकर सुदूर देशों तक कटनीति ने बहुत अच्छा काम किया है। यद्यपि उभरती वैश्विक स्थितियों के कारण कुछ निराशा भी रही हैं, परन्तु भारत की बाह्य रूप रेखा और राष्ट्रों के समुदाय के मध्य इसका सम्मान कई गुना बढ़ा 

पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक एवं एयर स्ट्राइक एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि रही है जो कि एक निर्णायक दृष्टिकोण था। भारत ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया कि यदि पाकिस्तान ने आतंकवादी घटनाओं के जरिए उसे उकसाया तो वह हाथ पे हाथ धरकर बैठा नहीं रहेगा।

यहां कुछेक प्रमुख महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के बारे में विवरण दिया जा हा है जिनमें सरकार की नीतियों को भारी सफलता मिली हैं| 

पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक एवं एयर स्ट्राइक एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि रही है जो कि एक निर्णायक दृष्टिकोण था। भारत ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया कि यदि पाकिस्तान ने आतंकवादी घटनाओं के जरिए उसे उकसाया तो वह हाथ पे हाथ धरकर बैठा नहीं रहेगा। पाकिस्तानी सैन्य प्रशासन के लिये भी यह संदेश था कि भारत दखलंदाजी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और जवाबी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। इसके अलावा, सऊदी अरब एवं रूस का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्राप्त करने से लेकर संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर जैसे खाड़ी देशों तथा इस्राइल के साथ नजदीकी सामरिक साझेदारी तक नरेंद्र मोदी के अधीन भारत की कूटनीति को जबर्दस्त प्रोत्साहन मिला। सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग और भारतीय भगोड़ों के प्रत्यावर्तन से अपनी संप्रभु निधियों में निवेश तक भारत की कूटनीतिक एकजुटता के ठोस सामरिक परिणाम सामने आए हैं। नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में कूटनीति का एक सर्वोच्च स्थान रहा है जिसमें संयुक्त राष्ट्र में समर्थन, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में जीत और अमरीकी राष्ट्रपति का आतंकवाद के मुद्दे पर मजबूत समर्थन हासिल करना शामिल है। विश्व में भारत का ताकत का बहुत तेजी के साथ विस्तार हुआ है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जबर्दस्त तालमेल के कारण भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान अमेरिका की अलग नजरों में चढ़ गया है। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी तेजी आई है। दोनों देशों के लिये व्यापार और आव्रजन मुद्दों को हल करने और इन संबंधों को परिणामोन्मुख बनाये जाने की आवश्यकता है। चीन के साथ डोकलॉम गतिरोध के बाद सीमा मुद्दे को लेकर कुछ निराशाएँ रही हैं परन्तु भारत ने इनसे दृढ़ता के साथ निपटा, जिससे वैश्विक शक्ति के तौर पर भारत का दर्जा ऊपर उठा है। बदलते वैश्विक क्रम में, किसी देश की शक्ति की छवि, इस बात के अलावा कि उसके नेता की ऐसी नेतृत्व योग्यता है जिसके दनिया-भर में अनेक मित्र हों इसकी आर्थिक छवि के संयोजन से होकर भी निकलती है। सरकार की एक महत्त्वपूर्ण सफलता यह रही है कि इसके दुनिया भर में बहुत से निकट मित्र हैं जिसने भारत की विश्व में उच्चतर कूटनीतिक प्रोफाइल बनाने में सहायता की है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जबर्दस्त तालमेल के कारण भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हुए हैं। 

मोदी सरकार की एक अन्य महत्त्वपूर्ण उपलब्धि भारत की लुक ईस्ट नीति को एक मजबूत एक्ट ईस्ट नीति में सफलतापूर्वक तब्दील करने को लेकर रही है। इसने भारत की वैश्विक छवि के निर्माण में सहायता की है। प्रधानमंत्री की वर्ष 2018 की इंडोनेशिया यात्रा और शांगरीला वार्ता, सिंगापर के नेतत्व के साथ विचार-विमर्श में उनकी भागीदारी और बीच में मलेशिया में रुकने का उद्देश्य इन देशों के साथ संबंधों को लेकर भारत की सतत् प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान करना ही था। इससे पहले गणतंत्र दिवस परेड, 2018 में सभी आसियान नेताओं को मख्य अतिथियों के तौर पर आमंत्रित करना उस विशेष साझेदारी की ही अभिव्यक्ति थी। यह साझेदारी तीन अनिवार्य स्तंभों पर टिकी है, पहला है आर्थिक सहयोग, जहाँ भारत और ये देश गतिशील व्यापार संबंधों का लाभ उठा सकते हैं, दूसरा सामरिक सहयोग जहाँ ये रक्षा क्षेत्र में सहयोग करेंगे, जिससे समुद्री मार्ग का सम्प्रेषण निश्चित होगा। समुद्री डकैती और आतंकवाद का ये सामना करेंगे, तीसरा स्तंभ सांस्कृतिक संबंधों को लेकर है जहां भारत और ये देश भारतीय समुदाय के जरिए नए संपर्क को मजबूत बनाते हुए सांस्कृतिक और परंपरागत संपर्को में सहयोग करेंगे। यह इस बात को सुनिश्चित करने में भी एक अन्य बड़े सामरिक उद्देश्य को पूरा करता है कि एशिया में भारत की शांति और स्थिरता के पर्यवेक्षक के तौर पर प्रमुख भूमिका पुनः बहाल हो।

एशिया में एक मजबूत गठबंधन ने भारत-प्रशांत के एक नये गठजोड़ में भी सहायता की है जिससे भारत की क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण देश के तौर पर पुनः पुष्टि हुई। इसने एशियाई क्षेत्र में किसी भी प्रकार का आधिपत्य कायम करने को लेकर भी प्रभावी प्रतिरोध साबित किया है। 

सोशल मीडिया के युग और वैश्विक मुद्दों को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि विदेशों में रह रहे भारतीयों और जो भारत से जुड़े हैं, यहाँ की यात्रा करने वालों और वीजा चाहने वालों का मानवीय दृष्टिकोण के साथ स्वागत किया जाये। भारतीय मिशनों और भारतीय विदेशी कार्यालयों को अपने आस-पास इसके बारे में जागरूकता पैदा करनी चाहिये और भारतीय मिशनों तथा प्रतिनिधियों को स्वागत करने की प्रथम चौकी बन जाना चाहिये कि जब भी वे भारत आना चाहेंगे, इस देश में पर्यटकों का इंतजार रहेगा। मानवीय कूटनीति का दूसरा हिस्सा जरूरतमंद देशों तक भारत की पहुँच कायम करना है, अब तक हमने भारत के सामरिक पड़ोसियों के साथ किया है परन्तु हमें इससे आगे इसका विस्तार अवश्य करना चाहिये। अपनी वैश्विक आकांक्षाओं के लिये हम एक ऐसे देश के तौर पर देखे जाने चाहिये जो दुनिया के जरूरतमंद देशों के साथ खड़ा है। हमें अपने वैश्विक सद्भावना परिदृश्य को विस्तारित करना चाहिये और इसमें संलग्नता बढ़ानी चाहिये। 

नेपाल, श्रीलंका से लेकर अफगानिस्तान और बांग्लादेश तक भारत को सांस्कृतिक समानताओं पर नरम संलग्नता कार्य नीति तथा इन देशों के साथ सद्भाव का निर्माण करने की नीति पर काम करने की आवश्यकता है। इन देशों में भारत के लिये सद्भावना के निर्माण में युवाओं से निर्देशित कूटनीतिक पहल की आवश्यकता है। 

भारत के अन्य मित्रों की बात करें तो रूस भारत का एक पुराना मित्र है और हमें पुराने मित्रों को नहीं भूलना चाहिये, यह भारत के लिये अफगानिस्तान में तथा एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा और रक्षा साझेदार के तौर पर जरूरी है। सैन्य और कूटनीति सहित बहुत से विकल्पों के साथ एक सतत् प्रयास की आवश्यकता होगी जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने की भारी कीमत उठानी पड़े। 

किसी देश की सफल कूटनीति का आकलन इस बात को लेकर भी किया जाता है कि इसके नागरिक आश्वस्त हों कि उनकी सरकार उन्हें कठिन स्थितियों में विशेषकर जब वे विदेश में होंगे, अवश्य बचा लेगी। अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों को अपने नागरिकों को वापस सुरक्षित स्वदेश पहुँचाने के लिये दबाव कायम करने की रणनीति के लिए रोल मॉडल के तौर पर देखा जाता था। भारत में इस महे को लेकर जबर्दस्त बदलाव आया है क्योंकि सरकार अधिक ग्रहणशील हो गई है और विदेशों में भारतीय मिशनों ने कटनीतिक प्रयासों के जरिए सरकार की विस्तारित पहॅच से हजारों भारतीयों को स्वदेश पहुँचाना सुनिश्चित किया है। अब समय बदल गया है और यह सुनिश्चित करने के लिये सोशल मीडिया एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन गया है, जब भी देश के नागरिक संकट में होते हैं तो वे सरकार से संपर्क कायम कर सकते हैं तथा भारतीय मिशनों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं कि वे उनकी तुरंत सहायता करें। यद्यपि पूर्व में भी भारत के बचाव अभियान सफल रहे हैं परन्तु अब एक बड़ा बदलाव इसमें तीव्रता को लेकर आया है और दूसरा यह सुनिश्चित करने के लिये है कि एक आम नागरिक के पास भी अपनी आवाज़ उठाने का मौका होता है कि वह संकट के समय अपनी सरकार से सीधा संपर्क कायम कर सकता है। 

व्यक्तिगत समझ-बूझ कायम करना वर्तमान केंद्र सरकार की सफलता का एक महत्त्वपूर्ण कदम है और वैश्विक नेताओं के साथ अच्छे संपर्क कायम करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाना चाहिये। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापान के शिंजो आबे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों के साथ भारतीय प्रधानमंत्री के निजी कूटनीतिक संबंधों के सफल परिणाम निकले हैं। कुछेक मामलों में मिली-जुली सफलता रही है, विशेषकर उस वक्त जब हाल में रूस के साथ गहरे आर्थिक और रक्षा सहयोग के लिये व्यापार और आव्रजन से संबंधित मतभेद सामने आये। यूरोपीय संघ और भारत के विविध दृष्टिकोण रहे हैं और हमें अपनी यूरोप तथा ब्रिटेन के साथ प्रमुख साझेदारियों के साथ संबंधों को विस्तारित करने के लिये नवाचार, कौशल विकास और एरोस्पेस के क्षेत्र में काम जारी रखना चाहिये। 

भारत के वैश्विक दायरे में वृद्धि के साथ ही इसे अपनी कटनीति में सोशल मीडिया और इंटरनेट के युग में आधुनिक और नवीनतम औजारों को शामिल करना होगा। भारतीय कूटनीति के लिये अब अधिक विषयागत विशेषज्ञों को लगाये जाने, युवा लोगों को एकजुट करके डिजिटल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल की एक रणनीति का निर्माण करने की आवश्यकता है क्योंकि कूटनीति और विदेश नीति भी सार्वजनिक कूटनीति की अवधारणाओं के सजन के बारे में होती हैं। इस तरह से भारत वैश्विक मामलों में वो भूमिका अदा कर पाएगा जिसका वह हकदार है। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षों में भारत की बदलती वैश्विक छवि कुल 130 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती है। 

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