रेल दुर्घटनाओं पर लगाम लगाएगा ‘कवच’! | कवच: स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली

रेल दुर्घटनाओं पर लगाम लगाएगा 'कवच'!

प्रौद्योगिकी लेख-रेल दुर्घटनाओं पर लगाम लगाएगा ‘कवच’! | कवच: स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली| Indian Railways Kavach: ‘कवच’ लगाएगा रेल हादसों पर लगाम

देश में विभिन्न रेल दुर्घटनाओं में जान माल का बड़ा नुकसान होता रहा है और ऐसे हादसों में यह नुकसान प्राय: बहुत बड़ा होता है, जब पटरी पर सरपट दौड़ रही 2 ट्रेनें एक-दूसरे से टकरा जाती हैं. ऐसे ही रेल हादसों पर विराम लगाने के लिए इस बार बजट में जीरो एक्सीडेंट मिशन के तहत् 2,000 किमी के रेलवे नेटवर्क को ‘कवच तकनीक के अन्दर लाने की घोषणा की गई थी. रेल मंत्रालय के अनुसार कवच के लगने पर संचालन खर्च ₹ 40-50 लाख प्रति किमी आएगा, जबकि यूरोपियन तकनीक वाली ऐसी सुरक्षा प्रणाली का खर्च एक से डेढ़ करोड़ रुपए प्रति किमी आता है. ‘कवच’ को दुनिया का सबसे सस्ता स्वचालित ट्रेन दुर्घटना सुरक्षा तकनीक माना जा रहा है और रेलवे के मुताबिक आने वाले समय में आत्मनिर्भर भारत की इस मिसाल को दुनिया के विकसित देशों में भी निर्यात किया जाएगा. 

यात्री सुरक्षा के दृष्टिगत चलती ट्रेनों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्रांतिकारी मानी जा रही ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ तकनीक के इस्तेमाल से अब एक पटरी पर ही 2 ट्रेनें आमने-सामने आने पर भी भयंकर रेल दुर्घटना को टाला जा सकेगा. दरअसल इस ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली में यदि 2 ट्रेनें तेज गति से एक-दसरे की ही तरफ आ रही हैं. तो कवच प्रणाली के तहत् ट्रेन में टक्कर से पहले ही अपने आप ब्रेक लग जाते हैं. यही नहीं, ट्रेन जब रेल फाटकों के पास पहुँचती है, तो ड्राइवर के हस्तक्षेप के बिना कवच प्रणाली अपने आप सीटी बजाना शुरू कर देती है. इस प्रणाली के तहत् रेलवे क्रॉसिंग पर ऑटोमैटिक हॉर्न बजेगा और ट्रेन की गति कम होगी. यह प्रणाली जीपीएस तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी जैसी तकनीकों से चलाई जाएगी और रेलवे का मानना है कि इस प्रणाली से ट्रेनों की दुर्घटनाओं पर बहुत हद तक लगाम लगाई जा सकेगी, ‘कवच’ को 10,000 वर्षों में केवल एक त्रुटि की सम्भावना के साथ सबसे सस्ती और सम्पूर्ण सुरक्षा स्तर प्रमाणित प्रौद्योगिकियों में से एक बताया गया है |

पिछले माह इस सुरक्षा प्रणाली के परीक्षण के दौरान एक ही पटरी पर 160 किमी प्रति घण्टा की रफ्तार से एक ट्रेन तथा एक इंजन को आमने-सामने आते हुए चलाया गया था और परीक्षण पूरी तरह सफल रहा था. इस प्रणाली के माध्यम से ट्रेन के ब्रेक, हॉर्न तथा थोटल हैंडल की निगरानी अपने आप होगी. यदि ट्रेन रेड सिग्नल की तरफ बढ़ेगी, तो अपने आप धीमी होकर रुक जाएगी. ऐसे में ट्रेन के रेड सिग्नल के 500 मीटर पहले ही कवच के कारण अपने आप ब्रेक लग जाएंगे. कवच का बड़ा फायदा सर्दी के मौसम में भी रेलवे को मिल सकता है, क्योंकि घने कोहरे के दौरान एक-दूसरे के पीछे चलने वाली ट्रेनों की आपस में होने वाली टक्कर को इसके जरिए बचाया जा सकेगा और कोहरे के समय में भी रेलों को रफ्तार दी जा सकेगी. किसी दुर्घटना की स्थिति में यह प्रणाली एसओएस फीचर को सपोर्ट करती है अर्थात् आपात स्थिति में एसओएस संदेश भेजेगी रेलमंत्री का कहना है कि आने वाले समय में कवच तकनीक से लैस पटरियों पर 400 से भी ज्यादा वंदेभारत ट्रेनें देश में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदल देंगी. 

भारतीय रेलवे पर 96 प्रतिशत रेल यातायात संचालन उच्च घनत्व नेटवर्क तथा अत्यधिक प्रयुक्त नेटवर्क मार्गों पर होता है और इस यातायात के सुरक्षित संचालन के लिए रेलवे द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुसार कवच प्रणाली सम्बन्धित कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आरम्भ किया जा रहा है. ऐसे अति व्यस्त मार्गों पर मानवीय त्रुटियों के चलते दुर्घटनाएं होने की सम्भावना ज्यादा रहती है, क्योंकि ऐसे मार्गों पर रेलें प्रायः एक-दूसरे के काफी निकट चलती हैं. इसलिए माना जा रहा है कि कवच के जरिए ऐसे मार्गों पर चालकों की लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी. आगामी वर्षों में प्रतिवर्ष 4-5 हजार किमी रेल नेटवर्क को ‘कवच’ के तहत लाने का लक्ष्य रखा जाएगा और देशभर में करीब 34,000 किमी नेटवर्क को कवच के तहत् लाया जाएगा. 

आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा विकसित स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली ‘कवच’ सुरक्षा मानक स्तर चार (एसआईएल-4) के अनुरूप अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है, जो किसी सुरक्षा प्रणाली का उच्चतम स्तर है. इस प्रणाली को 160 किमी प्रति घण्टे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया है, यह एक ऐसी प्रणाली है, जो एक निर्धारित दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता का आकलन करने में और टकराव के जोखिम को कम करने में ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी, जिससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगी. इस डिजिटल प्रणाली के कारण रेड सिग्नल जैसी मानवीय त्रुटियों को नजरअंदाज करने अथवा किसी अन्य खराबी पर ट्रेन स्वतः रुक जाएगी.यदि रेल इंजन ब्रेक लगाने में असफल रहता है, तो कवच प्रणाली ऑटोमेटिक तरीके से खुद ही ब्रेक लगा देती है. यह टक्कर सुरक्षा प्रणाली तीन स्थितियों में (आमने-सामने की टक्कर, पीछे से टक्कर और खतरे का संकेत मिलने पर) बखूबी काम करती है. इस प्रणाली को किसी भी आपात स्थिति में स्टेशन एवं लोको ड्राइवर को तत्काल कार्रवाई के लिए सचेत करने, साइड-टक्कर, आमने-सामने की टक्कर और पीछे से होने वाली टक्करों की रोकथाम करने में पूर्ण रूप से सक्षम माना जाता है. 

‘कवच’ वास्तव में एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है, जिसमें उच्च आवृत्ति के रेडियो संचार का उपयोग किया जाता है. यह प्रणाली रेडियो संचार, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक जैसे माध्यमों से जुड़ी रहती है. जैसे ही यह तकनीक एक निश्चित दूरी के भीतर उसी ट्रैक पर दूसरी ट्रेन का पता लगाती है, यह ट्रेन के इंजन में लगे उपकरण के माध्यम से निरन्तर सचेत करते हुए स्वचालित ब्रेक लगा देती है. यह प्रणाली मौजूदा सिग्नलिंग सिस्टम के साथ सम्पर्क बनाए रखकर इसकी जानकारी परिचालन से जुड़े प्राधिकृत व्यक्तियों के साथ निरन्तर साझा करती रहती है और लोको पायलट को सिग्नल के साथ-साथ अन्य पहलुओं की स्थिति, स्थायी गति प्रतिबंध के बारे में संकेत देती है तथा ओवर स्पीड को लेकर भी चालक को सचेत करती रहती है. चालक से चूक होने पर ‘कवच’ प्रणाली ऑडियो-वीडियो के जरिए अलर्ट करेगी और फिर भी चालक द्वारा कोई जवाब नहीं दिए जाने पर कवच ट्रेन को स्वयं ही रोक देगा. रेलवे के मुताबिक इस प्रणाली से 5 किमी की सीमा के भीतर की सभी ट्रेन बगल की पटरियों पर खड़ी ट्रेन की सुरक्षा के मद्देनजर रुक जाएंगी. 

यदि कवच संरचना और इसकी कार्यप्रणाली पर नजर डालें, तो स्टेशनरी कवच उपस्कर इकाइयाँ, यूएचएफ आधारित संचार टॉवर, रेडियो, ऑनबोर्ड कवच इकाई, ब्रेकिंग इंटरफेस तथा ट्रैकसाइड आईएफआईडी टैग इस प्रणाली के मूल निर्माण खंड हैं, सभी ट्रेकसाइड सिग्नल को साविष्ट करने के लिए स्टेशनों, मध्यवर्ती ब्लॉक सिग्नल (आईबीएस) स्थल तथा मिड सेक्शन अंतशिन समपार फाटकों (जहाँ कहीं निकटवर्ती स्टेशनों का रेडियो कवरेज उपलब्ध नहीं है) पर संचार टॉवर, जीपीएस, रेडियो इंटरफेस आदि के साथ स्टेशनरी कवच यूनिट लगाई जाती है. इसे वास्तविक समय आधारित डाटा जैसे कि सिग्नल आस्पेक्ट स्थिति, बर्थिंग ट्रैक ऑक्यूपेशन आस्पेक्ट स्थिति, प्वाइंट स्थिति आदि प्राप्त करने के लिए सिग्नल अंतशिन प्रणाली के साथ इंटरफेस किया जाता है. यह सिग्नल इनपुट और लोको इनपुट एकत्रित करके लोको कवच यूनिट को सिग्नल इनपुट भेजता है.रिमोट इंटरफेस यूनिट रिमोट सिग्नल फंक्शन प्राप्त करने के लिए समीप के अंतपशन समपार फाटक या स्वचालित सिग्नल सेक्शन अथवा आखिरी केबिनों में लगाए जाते हैं तथा ऑप्टिक फाइबर केबल के माध्यम से पास के स्टेशनरी कवच से जोड़ दिए जाते हैं. स्टेशन मास्टर ऑपरेशन पैनल सह इंडिकेशन पैनल का उपयोग आपातकालीन स्थितियों में एसओएस संदेश उत्पन्न करने के लिए किया जाता है. इन संदेशों की प्राप्ति के बाद लोको कवच आपातकालीन ब्रेक लगाता है. आने वाले समय में अत्याधुनिक स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली कवच में इंटरलॉकिंग के साथ डायरेक्ट इंटरफेस, कवच के लिए बैलिस का विकास, एलटीई पर कवच का विकास, अस्थायी गति प्रतिबंधों के लिए फंक्शनलिटी जैसे कुछ और फीचर भी जुड़ेंगे. कुल मिलाकर इस स्वदेशी ट्रेन टक्कर सुरक्षा तकनीक की मदद से उम्मीद लगाई जा रही है कि रेलवे जीरो एक्सीडेंट के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा और इससे ट्रेनों की टक्कर से होने वाले भयानक रेल हादसों की रोकथाम कर यात्रियों की जान बचाने में बड़ी मदद मिलेगी. 

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