Important topics for SSC CHSL,CGL,MTS descriptive paper 2022

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निम्नलिखित विषयों में एक किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों  का निबंध लिखिए :

(a) वायु प्रदूषण

(b) शिक्षा का महत्व

(c) स्वच्छ भारत अभियान

(d) विद्यार्थियों पर बढ़ते तनाव 

(e) परिवार के प्रति दायित्व

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2. पत्र लेखन (150 शब्द) 

(a) अपने विद्यालय के प्राचार्य को एक आवेदन लिखें, जिसमें उनसे विद्यालय शुल्क जमा करने सम्बन्धी समय में विस्तार की प्रार्थना हो।

(b) अपने मित्र की शादी में न पहुँच पाने की असमर्थता बताते हुए खेद सम्बन्धी पत्र लिखिए।

(c) अपने मित्र को अपने हॉस्टल अनुभव का वर्णन करते हुए पत्र लिखें।

(d) क्षेत्र की आम जनता द्वारा मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण सामना की जा रही चुनौतियों के मद्देनजर दिल्ली नगर निगम को एक पत्र लिखिए।

(e) लाइब्रेरियन से पुस्तकालय में सामान्य अध्ययन की अद्यतन पुस्तक मँगाने हेतु प्रार्थना पत्र। 

। उत्तर । 

(a) वायु प्रदूषण 

हमारी पृथ्वी का वातावरण बहुत सारे प्रदूषणों से पीड़ित है। जिसको फैलाने वाले हम इंसान ही हैं। अब उस बढ़ते प्रदूषण को रोकना भी हमारा दायित्व है। 

प्रदूषण के कई प्रकार होते हैं-वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं भूमि प्रदूषण आदि। वायु प्रदूषण वर्तमान समय में पूरे विश्व में विशेष रूप से औद्योगिकीकरण के कारण एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। वायु प्रदूषण पूरी वायुमंडलीय हवा में बाह्य तत्वों का 

मिश्रण है। वायु प्रदूषण के कारकों में कुछ प्राकृतिक और कुछ मानवीय कारक हैं। हालाँकि अधिकांश वायु प्रदूषण मानवीय गतिविधियों के कारण होता है, जैसे-जीवाश्म, कोयला और तेल का जलना, हानिकारक गैसों को छोड़ना और कारखानों एवं मोटर वाहनों के अपशिष्ट पदार्थ आदि।

इस प्रकार के हानिकारक रासायनिक तत्व जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, ठोस पदार्थ आदि ताजी हवा में मिश्रित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण आज गम्भीर स्तर पर पहुँच चुका है। 

वायु प्रदूषण के अन्य स्रोतों में भूमि का भराव (लैंडफिल) में कचरे का अपघटन और ठोस पदार्थों के निराकरण की प्रक्रिया से मीथेन गैस का निकलना है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, औद्योगिकीकरण, स्वचालित वाहनों के प्रयोग में वृद्धि, हवाई जहाज आदि ने इसे गम्भीर पर्यावरणीय मुद्दा बना दिया है। 

वायु प्रदूषण के प्राकृतिक कारकों में ज्वालामुखी विस्फोट एवं वन की आग आदि शामिल हैं, जिनसे निकलने वाला धुआँ एवं राख वायु को प्रदूषित करते हैं। 

निरन्तर बढ़ते वायु प्रदूषण ने सजीवों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इसने वैश्विक तापन को भी तीव्रतर किया है। इसके कारण कई घातक रोग यथा कैंसर, दिल का दौरा पड़ना, अस्थमा, कण्ठ की सूजन, गुर्दे की बीमारियाँ बढ़ी हैं। इसने जैव-विविधता को भी गहरे स्तर पर नुकसान पहुँचाया है, इससे पेड़-पौधे की कई प्रजातियाँ पूरी मिलकर पूरी तरह से विलुप्त हो गई हैं। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हेमें दुनिया में जागरूकता फैलानी होगी। इससे होने वाले दुष्परिणाम लोगों को समझाने होंगे। 

(b) शिक्षा का महत्त्व 

शिक्षा हम सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक उपकरण है। शिक्षा से व्यक्ति की क्षमता का विस्तार होता है, फलतः उसमें अदम्य आत्मविश्वास का भाव उत्पन्न होता है। शिक्षा का उच्च स्तर लोगों को सामाजिक और पारिवारिक आदर और एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। शिक्षा मनुष्य के जीवन में एक अलग स्तर और अच्छाई की भावना विकसित करती है। शिक्षा किसी भी बड़ी पारिवारिक, सामाजिक और यहाँ तक कि राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करने की क्षमता प्रदान करती है। कोई भी व्यक्ति जीवन में शिक्षा के महत्व को अनदेखा नहीं कर सकता। 

शिक्षा लोगों की सोच को सकारात्मक विचार लाकर बदलती है और नकारात्मक विचारों को हटाती है। बचपन में ही हमारे माता-पिता हमारे मस्तिष्क को शिक्षा की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थाओं में हमारा दाखिला कराकर हमें अच्छी शिक्षा प्रदान करने का हर सम्भव प्रयास करते हैं। यह हमें तकनीकी और उच्च कौशल वाले ज्ञान के साथ ही पूरे संसार में हमारे विचारों को विकसित करने की क्षमता प्रदान करती है। अपने कौशल और ज्ञान को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका अखबारों को पढ़ना, टीवी पर ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों को देखना, अच्छे लेखकों की किताबें पढ़ना आदि है। शिक्षा हमें अधिक सभ्य एवं शिक्षित बनाती है। यह समाज में बेहतर पद और नौकरी में कल्पना की गयी पद को प्राप्त करने में हमारी मदद करती है। 

आज के समाज में शिक्षा का महत्व काफी बढ़ चुका है। शिक्षा के उपयोग तो अनेक हैं परन्तु उसे नई दिशा देने की आवश्यकता है। शिक्षा इस प्रकार की होनी चाहिए कि एक व्यक्ति अपने परिवेश से परिचित हो सके। शिक्षा हम सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बहुत ही आवश्यक साधन है। हम अपने जीवन में शिक्षा के इस साधन का उपयोग करके कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं। 

आज के आधुनिक तकनीकी संसार में शिक्षा काफी अहम है। आजकल के समय में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए बहुत तरीके अपनाए जाते हैं। वर्तमान समय में शिक्षा का पूरा तंत्र अब बदल चुका है। अब हम 12वीं कक्षा के बाद दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से भी नौकरी के साथ ही पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षा बहुत महँगी नहीं है, कोई भी कम धन होने के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हम आसानी से किसी भी बड़े और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में बहुत कम शुल्क में प्रवेश ले सकते हैं। अन्य छोटे संस्थान भी किसी विशेष क्षेत्र में कौशल को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। 

(c) स्वच्छ भारत अभियान 

स्वच्छता का सीधा सम्बन्ध हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि एक स्वच्छ शरीर में ही एक स्वस्थ मन का निवास होता है। आज से लगभग 100 वर्ष पहले महात्मा गाँधी ने एक स्वच्छ भारत का सपना देखा था, जो आज साकार हो रहा है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत भारत को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने के उद्देश्य के साथ-साथ 2 अक्टूबर, 2019 तक यानी बापू के 150वीं जयन्ती तक सम्पूर्ण भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा गया। हमें यह तो पता है कि स्वच्छता का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है, परन्तु हमने इसका अर्थ सिर्फ स्वयं के शरीर की सफाई से लगा लिया है,ये गलत है। स्वच्छता को सिर्फ शरीर की सफाई तक सीमित करके हमने उसके अर्थ को संकीर्ण बना दिया है। स्वच्छता एक व्यापक अवधारणा है जो कि अपने समस्त वातावरण को लक्षित करता 

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो निम्न उद्देश्यों से अभिप्रेरित है-खुले में शौच से मुक्ति, शौचालय | निर्माण,लोगों की स्वच्छता के सन्दर्भ में मानसिकता को बदलना, शौचालय उपयोग को बढ़ावा देना, गाँवों को साफ रखना आदि। इसके अतिरिक्त 2019 तक सभी गाँवों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना, ग्राम पंचायतों के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट का प्रबन्धन, सड़क फुटपाथ एवं बस्तियाँ साफ रखना आदि। 

स्वच्छ भारत अभियान ने भारत की जनता में वैचारिक क्रान्ति उत्पन्न कर दी है। अब लोग न सिर्फ स्वयं को स्वच्छ रखने की अपितु अपने गाँव, जिला, शहर को भी स्वच्छ रखने की बात करते हैं और इस दिशा में भरसक योगदान दे रहे हैं। भारत में बहुत-सी ऐसी सामाजिक संस्थाएँ हैं जो स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत अपना योगदान दे रही हैं, इन संस्थाओं के लोग गाँव, कस्बों एवं शहरों में जा करके लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं और उन्हें स्वच्छता से होने वाले फायदे से अवगत कराते हैं। 

हालांकि इस अभियान की कार्यावधि अब समाप्त हो गयी है फिर भी इस अभियान ने लोगों के दिलों में स्वच्छता की वो मशाल जला दी है जो अब बुझने वाली नहीं है, यदि हम स्वच्छ भारत अभियान को अपने जीवन का हिस्सा बना लें तो वह दिन दूर नहीं जब ‘स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत’ का सपना सच हो जाएगा। 

(d) विद्यार्थियों पर बढ़ते तनाव 

आज के प्रतियोगी परीक्षाओं के दौर में विद्यार्थियों द्वारा गाहे-बगाहे गम्भीर तनाव का सामना करना पड़ता है, जो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के सन्दर्भ में एक गम्भीर चुनौती के रूप में है। एक विद्यार्थी के रूप में इन चुनौतियों एवं कारणों को चिह्नित करना एवं उससे बाहर निकलना अत्यन्त आवश्यक है, तभी एक आदर्श नागरिक के रूप में देश के विकास में अंशदान सम्भव होगा। 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में प्रतिस्पर्धा का भाव प्रारम्भिक कक्षाओं से ही प्रारम्भ हो जाता है। बच्चों पर गृह कार्य, परीक्षाओं, एसाइनमेंट, बेहतर करने का दबाव व अभिभावकों की महत्वाकांक्षा का दबाव होता है। बहुत से छात्र बेहतर समय प्रबन्धन नहीं कर पाने के कारण बुरी तरह से तनावग्रस्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त कई बार छात्रों को वित्तीय समस्याओं से भी गुजरना पड़ता है, जो कि उनके आत्मबल को तोड़ने वाला होता है और वे कहीं-न-कहीं तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं। 

इन गहरे तनाव के प्रभाव में छात्र कई बार अपने मित्रों से कट जाते हैं, जिस कारण उनमें अकेलापन आ जाता है। अपने परिवारजनों की आकांक्षा एवं भविष्य में सफल होने के दबाव में वे परीक्षाओं के वक्त रात-रात भर जगकर पढ़ाई करते हैं जो उनके स्वास्थ्य को प्रभावित तो करता ही है, उन्हें गम्भीर अवसाद में धकेल देता है। कई बार छात्र असफल होने की आशंका से आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। 

छात्रों को इस प्रकार के तनावपूर्ण स्थितियों से बचाने के लिए कुछ कारगर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि मुक्त भाव से बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। सबसे पहले विद्यार्थियों को समय प्रबन्धन की कला विकसित करनी चाहिए, जिससे कि वे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों को भी समय दे सकें, जिससे तनाव मुक्त रहने में सहायता मिलेगी। तैयारी को नियोजित ढंग से समय पूर्व करने का प्रयास करें। साथ ही व्यायाम, संगीत सुनना व पर्याप्त सोने की आदत डालें। मित्रों से बातचीत करें और बेहतर प्रदर्शन करने हेतु समूह अध्ययन की पद्धति को अपनाएँ, इससे रोचकता बढ़ेगी और तनाव कम होगा। 

अभिभावक भी बच्चे पर बेहतर प्रदर्शन हेतु अनावश्यक दबाव न डालें और बच्चों के बेहतर पोषण एवं मानसिक विकास हेतु सन्तुलित आहार उन्हें दें। अभिभावकों को यह भली-भाँति समझना चाहिए कि हर बच्चे की अपनी अलग विशेषता होती है, अत: उसकी मजबूती को निखारने में सहयोग करें। परीक्षा के वक्त बच्चों को सकारात्मक बनाए रखें। 

एक विद्यार्थी को बेहतर वातावरण प्रदान करके ही हम उन्हें निखरने का अवसर दे सकते हैं, हमें याद रखना होगा कि आपका विद्यार्थी कल हमारे देश का भविष्य है, हम उसको निर्द्वन्द्व वातावरण प्रदान करें, यह हमारा दायित्व है। 

(e) परिवार के प्रति दायित्व 

परिवार एक ऐसा सामाजिक संगठन है जहाँ हम रक्त सम्बन्ध के आधार पर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। जब हम छोटे होते हैं तब हमारे माता-पिता हमारा देखभाल करते हैं, हमारे भाई-बहन हमारा सहयोग करते हैं, अत: यह हमारा दायित्व है कि जब हम बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हों तो अपने परिवार के प्रति गहरा दायित्वबोध अनुभूत करें। 

हमारे माता-पिता बूढ़े होने पर न केवल आर्थिक बल्कि शारीरिक रूप से भी हम पर आश्रित हो जाते हैं अत: हमें उनके स्वास्थ्य एवं आर्थिक आवश्यकताओं को सही ढंग से सम्बोधित करना चाहिए। साथ ही अपने भाई-बहनों के प्रति भी आर्थिक सन्दर्भो में सहानुभूतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करना चाहिए। विवाह के उपरान्त पत्नी का दायित्व भारतीय समाज में सामान्य तौर पर पति के उपर होता है अत: हमें उनके साथ विभिन्न सन्दर्भो में बेहतर व्यवहार दिखाना चाहिए। अपने बच्चों के लिए समय निकालना चाहिए। 

आजकल के भागदौड़ वाले जीवन में जहाँ समय की कमी से लगभग हर मध्यवर्गीय व्यक्ति जूझता है, निःसन्देह यह सब कठिन है, विशेषकर जब संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार की संकल्पना हावी हो रही हो, परन्तु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बुढ़ापा जीवन का सच है और 

यह एक दिन हमारे समक्ष भी खड़ा होगा। स्त्रियाँ अन्य घर से आती हैं इसलिए अगर वे अच्छी तरह से सबका ख्याल रखती हैं, सबके पोषण एवं स्वास्थ्य का ध्यान रखती है तो वह परिवार को बाँध सकती है अन्यथा परिवार बिखर जाएगा। उनका भी परिवार के प्रति एक दायित्व है कि कैसे उसे सहेजकर रखा जाए। घर के अन्य सदस्यों को भी परिवार के बेहतरी हेतु अपने-अपने दायित्वों का उचित निर्वहन करना चाहिए। 

घर के कार्यकारी सदस्य को अपने कार्य एवं परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनाने हेतु समय का उचित प्रबन्धन करना चाहिए। कार्यालय के तनाव को घर के अन्दर नहीं लाना चाहिए। बच्चों के ऊपर अपने व्यक्तिगत तनाव को नहीं प्रकट करना चाहिए। 

इस प्रकार उचित तालमेल अपनाकर ही हम जीवन में तनाव मुक्त रहकर परिवार के प्रति अपने दायित्वों को पूरा कर सकते हैं। आपके दौर में पारिवारिक दायित्व एवं कामकाजी जीवन के बीच सन्तुलन अपरिहार्य 

(a) अपने विद्यालय के प्राचार्य को एक आवेदन पत्र लिखें, जिसमें उनसे विद्यालय शुल्क जमा करने सम्बन्धी समय में विस्तार की प्रार्थना हो। 

ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल

हरिनगर

दिल्ली -110044 

18 अक्टूबर, 2020 

सेवा में, 

प्राचार्य ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल 

जैतपुर रोड, हरिनगर एक्सटेंशन,

बदरपुर, नई दिल्ली-110044 

विषय-विद्यालय शुल्क जमा करने के समय में विस्तार प्रदान करने के सन्दर्भ में। 

महाशय. 

मैं क. ख. ग. आपके विद्यालय के वर्ग-IX का छात्र हूँ। मैंने अपना विद्यालय शुल्क अब तक नहीं जमा किया है क्योंकि परिवार में कुछ अप्रिय घटना घटित होने के कारण शुल्क का पैसा अन्यत्र व्यय हो गया। मैं इस अपरिहार्य स्थिति में शुल्क जमा करने में असमर्थ हूँ, अतः श्रीमान से निवेदन है कि मुझे शुल्क अदायगी हेतु 1 माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए। 

पुनः श्रीमान से निवेदन है कि मुझे अतिरिक्त समय प्रदान किया जाए, ताकि मैं अपना ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रित कर सकूँ। महोदय मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं अगले माह तक बकाया शुल्क भुगतान कर दूंगा। 

आपका विश्वासभाजन 

क.ख. ग. 

कक्षा-XI 

(b) अपने मित्र की शादी में न पहुँच पाने की असमर्थता बताते हुए खेद सम्बन्धी पत्र लिखिए। 

15/2, अलीपुर दिल्ली

दिनांक : 18 अक्टूबर, 2020

प्रिय मित्र रंजन,

सप्रेम नमस्कार 

मित्र सबसे पहले मैं तुम्हें तुम्हारी शादी की ढेरों शुभकामनाएँ देना चाहूँगा। मुझे खेद है कि मैं तुम्हारी शादी में पहुँच नहीं सका। हालाँकि मुझे तुम्हारी शादी का निमंत्रण पत्र समय पर मिल गया था, किन्तु काम की व्यस्तताओं में मैं इतना उलझा हुआ था कि चाहकर भी समय नहीं निकाल सका। 

जिस दिन तुम्हारी शादी थी, उसी दिन मुझे कम्पनी के काम से दिल्ली के बाहर जाना पड़ा था। यदि मैं नहीं जाता, तो कम्पनी का बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था। मित्र, मैं समझता हूँ तुम मेरी विवशताओं को समझोगे। एक बार पुन: मैं तुम्हें शादी की शुभकामनाएँ देता हूँ। भाभी को मेरा नमस्कार कहना। समय मिलते ही मैं तुम्हें सन्देह शुभकामनाएँ देने आऊँगा।

शुभकामनाओं सहित।

तुम्हारा अभिन्न मित्र, 

आशीष 

(c) अपने मित्र को अपने हॉस्टल अनुभव का वर्णन करते हुए पत्र लिखें। 

म. स.-94/2

गली नम्बर-8/2 वजीराबाद,

नई दिल्ली-110084 प्रिय मित्र क, ख. ग..

स्नेह नमस्कार। 

मैंने आज ही तुम्हारा प्रिय पत्र प्राप्त किया। दिल फूल की भाँति खिल उठा। छात्रावास में रहकर पत्रों द्वारा ही मिला जा सकता है। सबके पत्र समय-समय पर मिलते रहते हैं। तुमने छात्रावास में रहने के आनन्द के विषय में पूछा है। मैं स्वयं ही तुम्हें यह सब लिखने वाला था। जब मैं घर से चला था, तो मन में एक अजीब-सा भय लग रहा था, क्योंकि छात्रावास में रहने का मेरा यह पहला अवसर था। मैं आने से पहले घबड़ा रहा था, 

लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं था। सब लोग बहुत ही अच्छे हैं। प्रवेश द्वार के अन्दर जाने पर सड़क के एक ओर छात्रावास है, तो दूसरी ओर कॉलेज, संगीत विद्यालय, पुस्तकालय आदि है। यहाँ के भव्य भवन दूर-दूर तक फैले हैं। यहाँ के अध्यापक अनुभवी एवं परिश्रमी हैं। अनुशासन यहाँ का पहला नियम है। प्रत्येक छात्र को खेल-कूद, संगीत एवं एन. सी. सी. में भाग लेना पड़ता है। प्रात: 5 बजे से यहाँ की दिनचर्या आरम्भ हो जाती है। वेद मंत्रों की ध्वनि कानों को सुनाई देती है। जलपान करने के बाद छात्र कॉलेजों में जाते हैं। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अभ्यास होता है। हमारा प्रत्येक काम समय पर होता है। छात्रावास हमें हर प्रकार से स्वावलम्बी जीवन बिताने की शिक्षा देता है। आलस्य कोसो दूर रहता है। हमें पढ़ाई एवं काम की चिन्ता स्वयं रहती है। मुझे छात्रावास में रहकर बड़ा ही आनन्द आ रहा है। मैं इसका वर्णन नहीं कर सकता। 

तुम्हारा अभिन्न मित्र

अ. ब. स. 18 अक्टूबर, 2020 

(d) क्षेत्र की आम जनता द्वारा मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण सामना की जा रही चुनौतियों के मद्देनजर दिल्ली नगर निगम को एक पत्र लिखिए। 

सेवा में, स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,

नगर निगम, दिल्ली

18 अक्टूबर, 2020 महोदय, 

मैंने अपने इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान अपने इलाके की तरफ आकृष्ट करना चाहता हूँ जहाँ मच्छरों के प्रकोप से साधारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है। शाम को फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले गरीब दुकानदार इनके प्रकोप से न तो अपना सामान बेच पाते है और न ही कोई खरीददार दुकानों पर खड़ा होकर सामान खरीदने की हिम्मत जुटा पाता है। ठेला मजदूर, मोटिया मजदूर इनके भय से काम करने से कतराते हैं। 

साइकिल चालकों एवं गाड़ी चालकों की आँखों में पड़कर ये दुर्घटनाओं को निमंत्रित करते हैं, रात को गली या फुटपाथ पर सोने वालों की तो दशा सबसे दयनीय है। दिन भर कठोर परिश्रम करने वाले ये लोग रातजग्गा के लिए बाध्य हैं। इन मच्छरों के प्रकोप से तरह-तरह के रोग फैल रहे हैं। मलेरिया एवं डेंगू रोगियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। सबसे दुख की बात यह है कि न तो नगर निगम के कर्मचारियों का ध्यान इस तरफ है और न सफाई कर्मचारियों का ही उचित सहयोग क्षेत्र की जनता को मिल रहा है। जगह-जगह कूड़े के अम्बार पड़े हुए हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। नालियों में छिड़की जाने वाली दवाओं का छिड़काव तो सम्भवतः महीनों से नहीं हुआ है। नगर निगम के इस मोहल्ले के लोगों के स्वास्थ्य सुरक्षा का भार भी आपके ऊपर है। ध्यान देने की तुरन्त कृपा करें और इस पत्र के पाते ही आप स्वयं आकर इस क्षेत्र की दुर्दशा का अवलोकन करें। यहाँ की जनता के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अविलम्ब कदम उठाने की महती कृपा करें। 

आपका विश्वासभाजन 

अ.ब. स. 

वजीराबाद, दिल्ली 

(E) लाइब्रेरियन से पुस्तकालय में सामान्य अध्ययन की अद्यतन पुस्तक मँगाने हेतु प्रार्थना पत्र। 

सेवा में, लाइब्रेरियन

दिल्ली विश्वविद्यालय

सामाजिक विज्ञान अकादमी ब्लॉक नई दिल्ली 

19 अक्टूबर, 2020

विषय- सामान्य अध्ययन की अद्यतन पुस्तकें मँगाने के सन्दर्भ में। 

महाशय, 

दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान अकादमी ब्लॉक का पुस्तकालय अपने विविध पुस्तक संकलन के कारण प्रसिद्ध है। यह पुस्तकालय देश के किसी भी पुस्तकालय को पुस्तकों के वैविध्य के सन्दर्भ में चुनौती दे सकता है। यहाँ हर विषय, हर मुद्दे से सम्बन्धित पुस्तकें उपलब्ध हैं। हालांकि अभी भी इस पुस्तकालय में सामान्य अध्ययन से सम्बन्धित | पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, जो है, वे भी काफी पुरानी हैं। 

महोदय जैसा कि आपको विदित है विश्वविद्यालय के कई छात्र | विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इसलिए सामान्य अध्ययन | की पुस्तकें उनके लिए अनिवार्य हैं। मैं श्रीमान् से निवेदन करता हूँ कि | सामान्य अध्ययन की अद्यतन पुस्तकें यथाशीघ्र मँगवाने की कृपा प्रदान करें।

मैं आशा करता हूँ कि श्रीमान् मेरे इस सुझाव पर काफी सकारात्मक | तरीके से विचार करते हुए इस दिशा में पहल करेंगे। 

आपका विश्वासभाजन 

क. ख. ग. 

स्नातक तृतीय वर्ष (इतिहास प्रतिष्ठा) 

दिल्ली विश्वविद्यालय 

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