हाउडी मोदी कार्यक्रम : भारतीय प्रवासी आंदोलन का दर्पण 

हाउडी मोदी कार्यक्रम : भारतीय प्रवासी आंदोलन का दर्पण 

हाउडी मोदी : भारतीय प्रवासी आंदोलन का दर्पण पर निबंध (Howdy Modi : Mirror of Indian Diaspora Movement) 

किसी भी राष्ट्र के कद का पता उस राष्ट्र के नेता को वैश्विक मंचों पर मिल रहे सम्मान से चलता है। 22 सितंबर, 2019 का दिन उस लिहाज से वैश्विक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी दिन अमेरिका के ह्यूस्टन (Houston) शहर में ‘हाउडी मोदी’ (Howdy Modi) कार्यक्रम में 50 हजार से अधिक भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। ध्यान देने योग्य बात ये है कि हालिया ऐतिहासिक संदर्भो में यह पहला मौका था जब विश्व के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों भारत एवं अमेरिका के सर्वोच्च नेताओं (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प) ने एक संयुक्त रैली को संबोधित किया। गौरतलब है कि ‘हाउडी’ शब्द पश्चिम अमेरिका में बोला जाने वाला शब्द है जिसका अर्थ है हाऊ डू यू डू (How Do you do) यानी आप कैसे हैं। अक्सर यह देखा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति किसी ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा लेने से बचते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐसे किसी कार्यक्रम में शिरकत करना दो बातों की ओर इशारा करता है पहला भारत का कद वैश्विक राजनीति (Global Politics) में तेजी से बढ़ा है एवं दूसरा प्रवासी भारतीयों (Indian Diaspora) के प्रभाव में उत्तरोत्तर वृद्धि। 

किसी भी राष्ट्र के कद का पता उस राष्ट्र के नेता को वैश्विक मंचों पर मिल रहे सम्मान से चलता है। 22 सितंबर, 2019 का दिन उस लिहाज से वैश्विक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। 

बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो अमेरिका का भारत तथा प्रवासी भारतीयों के प्रति झुकाव अकारण कत्तई नहीं है। एक दौर था जब शीत युद्ध काल में अमेरिका के राष्ट्रपति केनेडी, निक्सन, कार्टर तथा रोनाल्ड रीगन आदि ब्रिटेन, चीन, जापान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ गलबहियां करते थे एवं आज भारत उनको काफी प्रिय है। ये बदलते वैश्विक परिदृश्य की ओर स्पष्ट इशारा है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2019 में आई संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन प्रवासी भारतीय निवास करते हैं जो संख्या की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान पर है। इनमें से ज्यादातर एंग्लो-अमेरिकन दुनिया, खाड़ी देशों तथा ब्रिटेन के पूर्व उपनिवेशों में निवास करते हैं। इस तरह से भारतीय प्रवासी अब इन देशों के लोकतांत्रिक चुनावों को प्रभावित करने लगे है। संयुक्त राज्य अमेरिका के संदर्भ में बात करें तो टेक्सास, कैलिफोर्निया, न्यूयार्क तथा इलिनोइस प्रांतों में भारतीय प्रवासी चुनावों को प्रभावित करने लगे है। 

भारत की आजादी के बाद भारतीय प्रवासियों के प्रति भारत सरकार का रूख उदासीन बना रहा। भारतीय राजनयिकों द्वारा प्रवासियों हेतु कोई प्रयास यदा-कदा ही किये गये। यह 80 के बाद का दौर था जब भारत ने प्रवासी भारतीयों के प्रति अपने दृष्टिकोण में थोड़ा बदलाव किया एवं राजीव गांधी देश के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने भारतीय प्रवासियों के महत्त्व को स्वीकार किया। नरसिंहा राव सरकार ने भी प्रवासी भारतीयों के बारे में योजनाओं की बात की पर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार देश की पहली सरकार थी जिसने प्रवासी भारतीयों के लिये औपचारिक तरीके से सोचना शुरू किया। 9 जनवरी, 2003 को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। इस तिथि के साथ खास बात ये थी कि वर्ष 1915 में 9 जनवरी को ही महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। ध्यातव्य है कि महात्मा गांधी को सबसे बड़ा प्रवासी कहा जाता है। वर्तमान संदर्भो में बात करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर व्यापक दृष्टिकोण सामने रखा एवं उसको मूर्त रूप देने में प्रयासरत हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी 15 बार भारतीय प्रवासियों को अलग-अलग देशों में संबोधित कर चुके हैं। इनमें मेडिसन स्क्वायर (अमेरिका)-2014, ऑलफोंस एरिना (आस्ट्रेलिया) 2014, शंघाई (चीन)-2015, वेम्बले स्टेडियम (लंदन)-इंग्लैण्ड, | 2015 सिलिकॉन वैली (अमेरिका)-2015, पेरिस (फ्रांस)-2019 आदि एवं अब ह्यूस्टन शामिल हैं। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में प्रवासी भारतीयों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 70 अरब डॉलर का योगदान दिया। ध्यातव्य है कि 15वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन (वाराणसी में 21-23 जनवरी, 2019 के बीच आयोजित) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘प्रवासी – भारतीय तीर्थ दर्शन’ कार्यक्रम की शुरुआत भी की। इस कार्यक्रम के तहत भारत सरकार 45 से 65 वर्ष तक आयु वर्ग के प्रवासी भारतीयों को भारत के सभी तीर्थ स्थलों का भ्रमण कराएगी। विदित हो कि भारत सरकार ने वर्ष 2004 में प्रवासी भारतीयों की समस्याओं के समाधान के लिये प्रवासी भारतीय मामलों का पृथक मंत्रालय बनाया। प्रवासी भारतीयों के लिये भारत सरकार निम्नलिखित योजनाएं भी चला रही है- 

भारत को जानें कार्यक्रम। 

प्रवासी बच्चों के लिये छात्रवृत्ति कार्यक्रम। 

प्रवासी भारतीय पतियों द्वारा परित्यक्त/तलाकशुदा भारतीय महिलाओं हेतु कानूनी/वित्तीय सहयोग योजना। 

भारत का अध्ययन कार्यक्रम। 

महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना। 

प्रवासी भारतीय बीमा योजना आदि। 

अब यदि सूक्ष्मता से ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम को देखा जाय तो यह कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फायदा पहुंचाने वाला साबित होगा इसमें संदेह नहीं किया जा सकता। 

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारतीय प्रवासियों की भूमिका वैश्विक परिप्रेक्ष्य में तेजी से बढ़ी है। भारतीय प्रवासियों ने भारत अमेरिका परमाणु करार, अमेरिका द्वारा भारत को नाटो जैसा दर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 21वीं सदी में भारत ने अपनी विदेश नीति में व्यापक आमूलचूल परिवर्तन किये हैं। खासकर वर्ष 2014 में आई एनडीए सरकार के बाद भारतीय विदेश नीति में प्रवासी भारतीयों को खासी तरजीह दी जा रही है। भारत प्रवासी भारतीयों के चैनल से विभिन्न राष्ट्रों के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है। 

अब यदि सूक्ष्मता से ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम को देखा जाय तो यह कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फायदा पहुंचाने वाला साबित होगा इसमें संदेह नहीं किया जा सकता। वर्ष 2016 में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने डोनाल्ड ट्रम्प के विरुद्ध खड़ी उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को वोट दिया था। ट्रम्प अब इन वोटों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी ने इस वैश्विक मंच से आतंकवाद पर पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष तरीके से घेरा जबकि अनुच्छेद 370 पर भी अपने रूख को स्पष्ट किया। इस तरह यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि भारत की ‘प्रवासी रणनीति’ (Diaspora Diplomacy) भारत को 21वीं सदी में विश्व का सिरमौर बनाने तथा अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में गेम चेंजर बनाने में मदद करेगी। 

Noteवैश्विक राजनीति में भारत का तेजी से बदलता कद, – प्रवासी भारतीय भारत के विकास के लिये है उत्प्रेरक,आजादी के बाद भारत सरकार का प्रवासियों के प्रति रवैया,21वीं सदी में सरकार का बदलता दृष्टिकोण, वर्तमान सरकार का भगीरथ प्रयास, उपसंहार

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