How to rich fast in hindi-किस्मत का कोई रोल नहीं 

How to rich fast in hindi

How to rich fast in hindi-किस्मत का कोई रोल नहीं 

“ऐसा कोई भी व्यक्ति संसार में नहीं है जिसके पास एक बार भाग्योदय का अवसर न आता हो। परन्तु जब वह देखता है कि वह व्यक्ति उसका स्वागत करने के लिए तैयार नहीं है, तो वह उल्टे पैरों लौट जाता है।” -कार्डिनल

अमीर बनने में किस्मत का कोई रोल नहीं होता। हाथ की चंद लकीरों पर विश्वास करने की बजाय अपने पूरे हाथ पर विश्वास कीजिए। किसी ने यह खूब कहा है कि चंद लकीरों का क्या भरोसा, किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते। यदि आप अमीर बनने के लिए यह सोच कर काम शुरू कर रहे हैं कि अपनी किस्मत में जो होगा वह मिल जाएगा, तो यह सोचकर कोई काम शुरू न करें। अमीर बनने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि सफलता या असफलता के लिए किस्मत का कोई रोल नहीं होता। 

अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक हेनरी सल्यूस्टर का कहना है कि जिसे हम भाग्य की कृपा समझते हैं। वह वास्तव में हमारी सूझ-बूझ और कठिन परिश्रम का ही फल होता है। अलबर्ट आइन्स्टीन के अनुसार लोग अपना जीवन दो तरीकों से व्यतीत करते हैं-एक तो कुछ चमत्कार नहीं है। दूसरा सब कुछ चमत्कार है। 

अपनी किस्मत को सुधारने के लिए अनेक लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं। फुटपाथ और गंदे से पड़े घरों में बैठे उन लोगों को जब अपने भाग्य का ही पता नहीं, तो भला वे दूसरों के भाग्य को कैसे सुधार सकते हैं। इसके बावजूद नादान व नासमझ लोग उनके पास लाइन लगा कर अपना भाग्य सुधारने की प्रतीक्षा में खड़े रहते हैं। 

स्वेट मार्डन कहते हैं, “भाग्य कर्म से ही बनता है। प्रयास, लगन एवं परिश्रम के बल पर हम खुद ही भाग्य विधाता बन सकते हैं। अपने हाथों से अपना भाग्य संवार सकते हैं। हमें अपने जीवन में सपने को साकार करने के लिए खुद ही प्रयास करने की जरूरत होती है।” 

एक मनोविशेषज्ञ का कहना है, “मैंने स्कूल पास किया, हाई स्कूल पास किया, कॉलेज में पास हुआ। मैंने अपना बिजनेस शुरू किया और एक अमीर व्यक्ति बन गया। इन सबके बीच कहीं भी किस्मत का कोई रोल नहीं है। मैंने जो कुछ भी पाया, वह मेरी मेहनत का नतीजा है। मेहनत न करता तो मेरी किस्मत फूट गई होती। मैं किस्मत पर नहीं अपनी मेहनत पर भरोसा करता हूं और दूसरों को भी यही सलाह देता हूं कि आप अमीर बनना चाहते हैं तो अपनी मेहनत पर भरोसा कीजिए, न कि अपनी किस्मत पर। 

भाग्य ही जीवन की पतवार है। उसका सहारा छोड़ने पर मनुष्य भवसागर में बह जाता है। हकीम लुकमान के अनुसार, “सिर्फ पतवार से तट पर पहुंच नहीं सकते, इसके लिए हाथ-पैर भी चलाने की जरूरत पड़ती है। सीधे कभी भी शिखर पर नहीं पहुंचा जा सकता। शिखर पर पहुंचने के लिए हमेशा नीचे से ही शुरुआत करनी पड़ती है।” 

एक ज्योतिषी ने नेपोलियन के हाथ को देख कर कहा था, “आप विश्व-विजय की बात छोड़िए, आपके हाथ में तो राजा बनने की लकीर भी नहीं है। आप एक छोटे देश के राजा भी नहीं बन सकते।” 

इस बात पर नेपोलियन ने चाकू लेकर अपने हाथ पर कट का निशान लगाते हुए कहा, “अब बन गई न राजा बनने की लकीर।” 

आखिर एक दिन नेपोलियन ने राजा बन कर दिखा दिया। नेपोलियन ने भाग्य पर विश्वास नहीं किया। यदि वह भाग्य पर विश्वास करते तो वे कभी भी राजा नहीं बन सकते थे।

भाग्य के भरोसे कभी न रहे। भाग्य के भरोसे रहने की बजाय लगन, परिश्रम और बुद्धि का सहारा लें। हाथ की लकीर पर ध्यान देने की बजाय खुद उपलब्धि की लकीर खींचें। जिसे लोग देखते ही रह जाएं। उपलब्धि हमेशा अतीत के प्रयत्नों की सफल प्रतीक होती है। वही अगले पड़ाव की ओर बढ़ने के लिए आमंत्रित करती है। 

अमीर बनने के लिए भाग्य का दामन छोड़कर कर्मवादी बनना होगा। कर्म के पथ पर चल कर ही आप अमीर बन सकते हैं। जब आप अमीर बनने के लिए मेहनत करेंगे, प्रयास करेंगे, भाग्य के भरोसे नहीं रहेंगे, तभी आप अमीरी के शिखर पर पहुंच सकते हैं। 

How to rich-दिमाग को रखें सक्रिय 

“सूचना के युग में मस्तिष्क की शक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है।” -अजीम प्रेमजी*

अमीर बनना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि आप अपने दिमाग को हमेशा सक्रिय रखें। दिमाग को सक्रिय रखकर ही आप सफलता की सीढ़ियों पर आसानी से चढ़ सकते हैं।

मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को यदि आप सही तरीके से समझ जाते हैं तो आपको दिमाग को सक्रिय रखने में अवश्य ही मदद मिलेगी। मानव मस्तिष्क में दो भाग होते हैं-दायां मस्तिष्क और बायां मस्तिष्क। दोनों ही हिस्से अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। स्थाई व पारंपरिक तरीके से बायां मस्तिष्क सोचता है। यह रोजाना आने वाली कठिनाइयों, मुसीबतों से लड़ने और उनसे जूझने की ताकत देता है। 

मस्तिष्क का दायां हिस्सा शारीरिक व मानसिक शांति उत्पन्न करता है। यह काल्पनिक विचार पैदा करता है। चुनौतियों के साथ आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करता है। सपनों के रूप में तस्वीरों या प्रतीक के रूप में संकेत देता है। यह नए रचनात्मक विचारों के साथ नए आयाम पैदा करता है। जो तर्क व व्यावहारिकता के साथ भय मुक्त होता है। यह ऊर्जावान बनाता है। किसी भी समस्या, बीमारी से लड़ने की शक्ति देता है। यह रिश्तों को बेहतर बनाता है। 

मस्तिष्क में चेतन और अवचेतन क्रियाएं होती हैं। चेतन भाग को बाह्य इन्द्रियों-आंख, नाक, कान, जीभ, त्वचा आदि से सूचनाएं मिलती हैं। वह उन उपयोगी सूचनाओं को अवचेतन भाग को भेज देता है। बाकी सूचनाएं अपने आप मस्तिष्क से निकल जाती हैं। अवचेतन भाग में सारी जीवनोपयोगी सूचनाएं एकत्र होती रहती हैं। अवचेतन मस्तिष्क चौबीस घंटे व्यस्त रहने वाली एक कार्यशाला है जो सोते-जागते कार्यरत रहती है। 

मनोवैज्ञानिकों ने पाया है कि मस्तिष्क को बार-बार कह कर अपनी बात के लिए आश्वस्त कराया जाए, उसे अपना लक्ष्य बार-बार सुझाया जाए तो वह अपना नियम बना लेता है। इसी नियम पर आदतें बनती हैं। जैसे एक बार सुबह उठने की आदत पड़ जाए तो फिर आपकी नींद सुबह अपने आप ही खुला जाएगी।

मस्तिष्क उसे नियम बना लेता है और वह स्वचालित यंत्र की तरह काम करने लगता है। शारीरिक व मानसिक हाव-भाव मस्तिष्क की विचार तरंगों द्वारा ही प्रभावित होते हैं। जैसा भाव आप बनाते हैं मस्तिष्क उन्हें ग्रहण करता है और फाइल बनाकर रखता जाता है। 

उन फाइलों के अनुसार ही वह संचालित होता है और आपको फाइल के बारे में जानकारी देता रहता है। यदि आपके मस्तिष्क में अमीर बनने की फाइल नहीं है तो वह आपको अमीर बनने के लिए जानकारी नहीं देगा। मस्तिष्क में मौजूद अमीरी की फाइल आपको हमेशा अमीर बनने के लिए आदेश देती रहेगी। 

बीमार व्यक्ति के मस्तिष्क में हमेशा कमजोरी के भाव होते हैं। उसका मस्तिष्क हमेशा कमजोर व निराश रहता है। जिसकी वजह से वह जल्दी ठीक नहीं हो पाता। यदि वह अपने अंदर अच्छा होने का भाव पैदा करे तो वह जल्दी अच्छा हो सकता है। 

ठीक उसी तरह यदि मस्तिष्क में गरीबी, निराशा, कुंठा, असफलता के भाव भरे हैं तो वह कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसे मस्तिष्क वाले अपने मस्तिष्क को सक्रिय नहीं रख पाते। उनका मस्तिष्क कमजोर होता चला जाता है और वे निराशा और उदासी के समुद्र में डूब कर रह जाते हैं। जब तक वे खुद को इसमें से नहीं निकाल लेते तब तक वे कुछ नहीं कर पाते। 

दिमाग को जितना सक्रिय रखा जाता है, सफलता पाने का प्रतिशत उतना ही बढ़ जाता है। यह सक्रियता आपके अंदर अद्भुत क्षमता का निर्माण करती है। शारीरिक, रचनात्मक, व्यावहारिक, बौद्धिक, नेतृत्व जैसी क्षमता को बढ़ाती है। इसीलिए अमीर बनने के लिए अपने दिमाग को सक्रिय रखने की आवश्यकता होती है। 

बड़े-बड़े सपने देखें 

“एक व्यक्ति सुबह उठता है, रात में सोने चला जाता है और इसके बीच वह जो करना चाहता है, करता है तो वह व्यक्ति 

सफल है।” -बॉब ड्यलन

डिजनीलैंड के संस्थापक वाल्ट डिजनी ने एक बार कहा था, “अगर आप सपने नहीं देख सकते तो जीवन में कुछ नहीं कर सकते। जीवन में आगे बढ़ना है तो सपने देखें। जो आप पाना चाहते हैं उसे पाने का सपना देखें। जो आप बनना चाहते हैं, वह बनने का सपना देखें। अमीर व्यक्ति बनना चाहते हैं तो कुबेरपति बनने का सपना देखें। जब तक आप सपना नहीं देखेंगे तब तक आप उसे हासिल नहीं कर सकते। 

दुनिया में वह व्यक्ति गरीब नहीं होता, जिसके पास धन-सम्पत्ति नहीं है, बल्कि ऐसा व्यक्ति गरीब होता है जिसके पास कोई सपना नहीं है। जब आप अमीर नहीं हैं तो अमीर बनने का सपना तो देख ही सकते हैं। इंसान में सबसे अच्छा गुण है इच्छा। इस इच्छा की वजह से उसके अंदर विचार जन्म लेने लगते हैं। यही विचार सपने कहलाते हैं। सपने हर इंसान को देखने चाहिए। सपने देखना जरूरी भी है, क्योंकि जब आप सपने ही नहीं देखेंगे तो उन्हें पूरे कैसे कर पाएंगे। 

फिल्म कलाकार आशुतोष राणा सपने के बारे में बड़े ही अच्छे ढंग से कहते हैं। उनके अनुसार, “सपने देखना बुरी बात नहीं है। सपने देखेंगे नहीं तो पूरे कैसे होंगे?” लेकिन सपने देखने के लिए ‘सोना’ पड़ता है और उन्हें हकीकत में बदलने के लिए ‘जागना’ पड़ता है। सोना यानी ‘विचार’, जागना यानी ‘कर्म।’

पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अबुल कलाम कहते हैं, “नींद में सपने न देखें। सपने इस तरह से देखें कि उन्हें पूरे करने के लिए आंखों की नींद गायब हो जाए।” अजीम प्रेमजी कहते हैं, “सपने इसलिए जरूरी हैं कि हम चीजों को होने से पहले देख सकें। जब तक आप सपने नहीं देखते, हकीकत में कैसे देखेंगे। सपना भविष्य का आईना होता है। सपना देखिए। इसमें बहुत ताकत होती है। श्यामल डावर कहते हैं, “मुझे विश्वास था कि सपने पूरे होते हैं, पर हर चीज का एक समय होता है। कुछ चीजें जल्दी मिल जाती हैं और कुछ में समय लगता है।”

‘सपनों के इंसान’ के लेखक वैस वीविस का कहना है कि अधिकतर लोगों की यह प्रकृति होती है कि जब तक उनके पास साधन या पैसा न हो जाए वे कार्य को आरंभ नहीं करते हैं। यह तो एक बहाना मात्र है। किसी भी हकीकत को पूरा करने के लिए आप सबसे पहले सपना देखें। साधनों की अपेक्षा अपने सपने पर भरोसा करें। साधन और पैसा तो मिल ही जाएगा। 

आज तक जो भी व्यक्ति अमीर हुए हैं। उन्होंने अमीर बनने का सपना देखा था तभी वे अमीर बने हैं। यदि उन्होंने अमीर बनने का सपना न देखा होता तो आज वे अमीर नहीं हुए होते। सपना और सफलता का वास्तविक संबंध है। कोई भी सफलता सपने पर टिकी होती है। सपने का खंभा ही सफलता की चोटी तक पहुंचाता है।

क्या कभी सपना सच भी होता है? यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह से सपना देख रहे हैं। यदि आपको अपने सपने पर यकीन है तो आपका सपना जरूर पूरा होगा। आप द्वारा देखे गए सपने का अंदाज छोटा होगा तो आपको छोटी सफलता मिलेगी। आपका सपना अगर बड़ा है तो बड़ी सफलता मिलेगी। जितना ऊंचा सपना होगा आप उतनी ही ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं। ऊंचाइयों को छूना है तो ऊंचा सपना देखना होगा। अमीर बनना चाहते हैं तो अमीरी का सपना देखना होगा। 

यदि आप सपने को सचमुच सही करना चाहते हैं तो अपने दिमाग में अमीर बनने का मॉडल (सपना) तैयार करें। आपने सुना होगा कि आज तक जितने भी आविष्कार हुए हैं, वैज्ञानिक उनके आविष्कार के लिए पहले एक मॉडल तैयार करते हैं। उस मॉडल को तैयार करते-करते एक दिन उसका आविष्कार हो जाता है। 

इसी तरह से आप भी अमीरी का सपना देखें। उसे पूरा करने की कोशिश करें। ऐसा करने से एक दिन आप भी बिल गेट्स, मुकेश अंबानी, अजीम प्रेमजी जैसे अमीर व्यक्तियों की श्रेणी में आ सकते हैं। 

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