कैसे करे आँखों की देखभाल-how to care your eye?

eye care tips

आँख हमारे शरीर के सबसे खास और नाजुक अंगों में से एक होती हैं अगर इनका खयाल न रखा जाए तो छोटी सी परेशानी जिंदगी भर की तकलीफ बन सकती है, बचने के लिए जरूरी है कि आँखों की नियमित रूप से जाँच व सही उपचार कराएँ, पोषक तत्त्वों से भरपूर भोजन करें और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएँ। 

                बचपन में आँखों की देखभाल  

• नवजात शिशु की आँखों में किसी तरह की समस्या जैसे पलकों में सूजन, आँखों से पानी आना, आँसुओं की नली का बंद होना आदि का सही समय पर इलाज करके दवाइयों से ठीक किया जा सकता है। 

• कम वजन वाले और समय से पहले पैदा हुए बच्चों की आँखों की नियमित रूप से जाँच कराएँ। नवजात बच्चों को विटामिन ए की खुराक जरूर पिलवाएँ। इसकी कमी से बच्चे को रतौंधी हो सकती है। बच्चों को नुकीली चीजों अथवा खिलौनों से दूर रखें। लंबे समय तक उन्हें कंप्यूटर या टीवी स्क्रीन पर न देखने दें। 

• धूल, मिट्टी और तेज धूप में न खेलने दें। 

• बच्चों को झुककर न पढ़ने दें, हमेशा टेबल-कुरसी का इस्तेमाल करें।  

• हमारी आँखों का फोकसिंग पॉवर सीमित होता है; अत: बच्चों को हर आधे घंटे के बाद पाँच मिनट का ब्रेक लेने दें। बच्चों में अगर सिर व आँखों में दर्द व अधिक पलक झपकाने के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जाँच कराएँ। 

• कंप्यूटर पर काम करते समय पलकों को लंबे समय तक स्क्रीन पर न ठहराएँ उन्हें झपकाते रहें। इससे आँखों के आँसू फैलते हैं, उनमें नमी बनी रहती है  और वो सूखेपन से बची रहती हैं  

युवावस्था में आँखों की देखभाल

• हर 20 मिनट में 20 सैकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर कहीं देखें। फिर दोबारा काम शुरू करें। पर्याप्त रोशनी में पढ़ें और चलती हुई गाड़ी में कतई न पढ़ें। 

• धूल-मिट्टी और सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचने के लिए चश्मा पहने|

आँखों का रखें विशेष खयाल :• आँखों में नमी बनाए रखने के लिए पानी और जूस का अधिक मात्रा में सेवन करें। आँखों में काजल, सुरमा आदि न लगाएँ। इनमें कार्बन के कण होते हैं, जो कार्निया और कंजक्टाइवा पर खरोंच डाल सकते हैं। 

• दिन में दो-तीन बार आँखों को साफ पानी से धोना चाहिए। आँखों को जोर-जोर से न रगड़ें। रोजाना आँखों और पलकों पर छोटे ब्रश से ब्रश करें। 

• देर रात तक कृत्रिम रोशनी में काम न करें।

• ग्रीन टी में केटेचिन्स नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो आँखों की रक्षा करते हैं। कंप्यूटर की स्क्रीन को अपनी आँखों से 20-30 इंच दूर रखें, जबकि टीवी को कम-से-कम 3.5 मीटर दूर से देखना चाहिए

नजरअंदाज न करें इन लक्षणों को

• आँखें लाल होना और उनसे पानी आना। 

• आँखों में खुजली होना 

• रंगों का साफ दिखाई न देना। 

कुछ घरेलू उपाय 

• लगातार सिरदर्द की शिकायत रहना और आँखों में थकावट होना।

• बादाम या जैतून के तेल से आँखों के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें, इससे रक्त-संचार ठीक रहता है और आँखों की थकान भी कम होती है। 

• रात को सोने से पहले विटामिन ई के कैप्सूल को फोड़कर उसे आँखों के आसपास लगा लें विशेष रूप से वहाँ जहाँ झुर्रियाँ दिखाई दे रही हों। 

• अगर आँखों में दर्द हो रहा हो तो पहले उन्हें हलके गुनगुने पानी से धो लें, फिर ठंडे पानी से इससे रक्त-संचरण तेज होगा और आँखों को आराम मिलेगा। 

• अपनी आँखों पर दिन में दो-तीन बार ठंडे पानी से धोएँ, इससे आँखों की ताजगी और चमक बरकरार रहेगा|

ड्राई-आई सिंड्रोम के लक्षण 

आँखों में जलन, चुभन महसूस होना, सूखा लगना, खुजली होना, भारीपन, आँख की कंजक्टाइवा का सूखना, आँखों में लाली तथा उन्हें कुछ देर खुली रखने में दिक्कत महसूस होना इस सिंड्रोम के मुख्य लक्षण हैं। 

बचाव एवं उपाय 

• कमरे के ताप को कम रखें; वातावरण में थोड़ा नमी बनाए रखें। 

• पानी व पेय-पदार्थ ज्यादा मात्रा में लें। 

• हरी सब्जियाँ और मौसमी फल खाएँ। 

• एयरकंडीशनर की हवा सीधे आँखों पर न पड़ने दें, एयरकंडीशनर वाले कमरे में हृयुमिडिफायर इस्तेमाल करें। 

डायट का रखें खयाल कंप्यूटर पर काम करनेवाले व्यक्ति को दूध, हरी सब्जी, मौसमी फल रोजाना खाने चाहिए। विटामिन-ए युक्त भोजन जैसे दूध, गाजर, हरी पत्तेदार सब्जी भी खानी चाहिए। ये चीजें ड्राई आई से बचाती हैं। इसलिए इनका सेवन लाभदायक होता हैं|

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