कम उम्र में अमीर कैसे बने-जीवन से प्रेरणा

कम उम्र में अमीर कैसे बने

कम उम्र में अमीर कैसे बने-जीवन से प्रेरणा

“आज के लिए और सदा के लिए सबसे बड़ा मित्र और मार्गदर्शक है अच्छी पुस्तकें, जो आपको सफलता की ऊंचाइयों पर ले जाती हैं।” -मार्क टापर

अमीर बनना है तो सफल व्यक्तियों के जीवन से प्रेरणा लें। आप उनके जीवन के बारे में अधिक जानकारी लेकर आगे बढ़ सकते हैं। अनेक लोग सफल लोगों के बारे में बुराइयां करते रहते हैं, उनका मानना होता है कि सफल लोग मेहनत करके नहीं बल्कि शॉर्टकट रास्ते से अमीर बनते हैं। लोगों की बातें सुनने की बजाय उनके बारे में प्रकाशित पुस्तकों को पढ़ें, सही क्या है आपके सामने आ जाएगा। 

नियमित कहानी पढ़ने वाला कहानीकार बन सकता है। उपन्यास पढ़ने वाला उपन्यास लिख सकता है। उसी तरह से अमीर व्यक्ति के जीवन परिचय को पढ़ने वाला व्यक्ति अमीर बन सकता है। हां, अमीर व्यक्ति का जीवन परिचय पढ़ने के बाद उसके जैसी मेहनत भी करनी पड़ेगी, तभी आप अमीर बन सकते हैं।

 महान व्यक्तियों का जीवन परिचय हर किसी को प्रेरणा देता है। उनका जीवन परिचय पढ़ने के बाद उससे प्रेरणा भी लेनी चाहिए। ऐसी पुस्तकों से आप सफलता और असफलता के रहस्य, धैर्य, लक्ष्य, अभिरुचि, मेहनत आदि के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बिना किसी के जीवन से प्रेरणा लिए आप ऊंचाइयों पर नहीं पहुंच सकते। किसी अमीर व्यक्ति को अपना रोल मॉडल बनाएं, फिर देखें आप कितनी जल्दी अमीर बनते हैं।

अमीरी की राह में आने वाली परेशानियों से मुकाबला करने की शक्ति पाने के लिए अमीर व्यक्तियों के जीवन की कहानियों को पढ़ना चाहिए। उनके बारे में जानना चाहिए। इससे बहुत बातें सीखने को मिलती हैं। 

जिस तरह से फिल्मी कलाकारों को अपना आदर्श बनाने वाले उनके जैसी चाल-ढाल, ड्रेस आदि सब कुछ अपना कर खुद को अमिताभ या आमीर खान समझने लगते हैं और बात-बात पर उनके डायलॉग मारने लगते हैं। उसी तरह से आपको भी अमीर व्यक्तियों की तरह उठना, बैठना, चलना-फिरना व सोचना होगा। उनकी तरह कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अमीर बनने के लिए उनके जैसा अपने आपको ढलना होगा तभी आप अमीर बन सकते हैं। 

इन पुस्तकों से ज्ञान बढ़ता है, बुद्धि बढ़ती है, विचारधारा बढ़ती है, आत्मविश्वास बढ़ता है। जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पुस्तकों को ज्ञान का खजाना माना गया है। मगर अफसोस है कि भारत में 5 प्रतिशत लोग ही पुस्तकें पढ़ते हैं। शायद इसीलिए भारत में अमीर व्यक्तियों की संख्या दुनिया के दूसरे देशों से काफी कम है। चीन में भारत से 300 प्रतिशत अधिक अमीर व्यक्ति रहते हैं। 

अजीम प्रेमजी कहते हैं कि आज दुनिया जिस तेजी से तरक्की कर रही है, यदि आप उस तेजी से जानकारी हासिल नहीं करते हैं तो आप पीछे रह जाएंगे। किसी भी क्षेत्र में जानकारी हासिल करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन बहुत जरूरी है। पुस्तकें जानकारी के साथ-साथ दिशा भी देती हैं। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूली पुस्तकों के अलावा दूसरी पुस्तकें पढ़ने से रोकते हैं। उनका मानना है कि स्कूल की पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकों को पढ़ने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटक जाता है। 

जबकि उनका ऐसा सोचना गलत है। क्योंकि स्कूली पुस्तकों के अलावा दूसरे प्रकार की पुस्तकें पढ़ने से सामान्य ज्ञान, बुद्धि, विवेक आदि बढ़ता है। किसी भी कंपीटीशन में फेल होने वाले अधिकतर युवा सामान्य ज्ञान में कम नंबर पाते हैं, क्योंकि उन्हें कोर्स की पुस्तकों के अलावा दूसरी पुस्तकें पढ़ने का शौक नहीं है। अधिकतर युवा यह कहते हैं कि पुस्तकें पढ़ना सिरदर्दी का काम है। 

मान लीजिए पुस्तकें न होतीं तो क्या आज दुनिया के पास ज्ञान का भंडार होता। पुरातन काल में बड़े-बड़े ग्रंथ लिखे गए। इन ग्रंथों में हर तरह की बातें दर्ज हैं। जिसका लाभ लगातार लिया जा रहा है। 

पुस्तकों में लंबे समय तक जानकारी को समा कर रखा जा सकता है। पास में पुस्तकें होने पर एक बार नहीं कई बार पढ़ कर उसे अच्छे ढंग से समझ सकते हैं। हर तरह की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। जो भी पुस्तकें मिलें उन्हें ध्यान से पढ़ें। उसमें से ज्ञान की बातें व जानकारी को अपने दिमाग में संभाल कर रखें। भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग कर सकते हैं।

अमीर बनना है तो अमीर लोगों की जीवनी, उनके सफल होने के रहस्य, उनके जीवन में आने वाली समस्याओं के विवरण, उनके जीवन की संघर्ष यात्रा, उनकी सफलता की कहानी, उनकी उपलब्धियों आदि के बारे में पढ़ें। सफल लोगों की जीवनी पढ़ने से सफलता प्राप्त करने में आसानी होती है। वह आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। समस्याओं से जूझते हुए किस तरह से वे आगे बढ़े। इससे हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। 

अब्राहम लिंकन, भगत सिंह, लक्ष्मी मित्तल, अजीम प्रेमजी आदि की जीवनी पढ़ें तो आपको पता चलेगा कि इनके अंदर कितनी पॉजीटिव एनर्जी थी। जिसकी बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। आप भी उनकी तरह अपने अंदर पॉजिटिव एनर्जी उत्पन्न करें और अमीरी के मुकाम को हासिल करें। 

ऐसे ही हम महान विचारकों, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र, तर्कशास्त्र, बौद्धिशास्त्र, जनरल नॉलेज आदि की बातें पुस्तकों में पढ़ सकते हैं। न जाने कब किसकी जीवनी आपके जीवन की दिशा बदल दे और आपको कुबेर के खजाने का मालिक बना दे। पूरी दुनिया में तेजी से जो बदलाव हुआ है। वह सिर्फ पुस्तकों के कारण हुआ है। 

अमीर लोगों के बारे में पढ़ कर हम जान सकते हैं कि वे कितनी कड़ी मेहनत, लगन से अमीरी के शिखर पर पहुंचे हैं। अमीर लोगों के जीवन से जुड़ी प्रत्येक बातें हर किसी को आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शक बन सकती हैं। यह आपको अपने लक्ष्य में सफलता दिलाने का मार्ग दिखाती हैं। डेविड जे. श्वार्ट्स के अनुसार, “पुस्तकों से अच्छा कोई मार्गदर्शन नहीं कर सकता। क्योंकि पुस्तकें महान लोगों की सफलता के राज बताती हैं। 

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अबुल कलाम ने बचपन में अखबार बेचने का भी काम किया। इनकी जीवनी पढ़ने पर हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए किसी भी काम से इसकी शुरुआत की जा सकती है। दुनिया में कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। छोटे काम से शुरुआत करके भी अमीर बनने के बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 

अमीर कैसे बने-धैर्य से काम लें

“वे कितने निर्धन हैं जिनके पास धैर्य नहीं है। क्या आज तक कोई जख्म बिना धैर्य के ठीक हुआ है।” -शेक्सपियर

अमीर बनने के लिए आपने बिजनेस शुरू किया है। बिजनेस में आने वाली समस्या से आप परेशान होकर अपने आपको कोस रहे हैं कि मुझे इस बिजनेस को शुरू नहीं करना था। इस बिजनेस में लाभ कम परेशानियां अधिक हैं। इस बिजनेस को करके मैं कभी अमीर व्यक्ति नहीं बन सकता।

अपने आपको कोसने की बजाय उन समस्याओं के समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करें। बिजनेस में समस्या आना या पैसों की तंगी होना अक्सर देखा जा सकता है। ऐसे में घबराना नहीं चाहिए। समझदारी से काम लेना चाहिए। समस्याओं का हल ढूंढकर अपने बिजनेस को सफल बनाने की कोशिश करते रहना चाहिए। 

विशेषज्ञों का कहना है कि बिजनेस में कभी भी उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। परेशानियों से भागने की बजाय उनसे मुकाबला करने की आवश्यकता होती है। अमीर बनने वाले कभी भी समस्याओं से डरते नहीं हैं। वे हर तरह की समस्याओं से जम कर मुकाबला करते हैं। तभी तो वे अमीर बनने में कामयाब होते हैं।

अमीर बनने के लिए आपको धैर्य से काम लेना होगा। क्योंकि कोई भी व्यक्ति रातोरात अमीर नहीं बन सकता। अमीर बनने के लिए कड़ी मेहनत, लगन और समय की आवश्यकता होती है। आज जितने भी व्यक्ति अमीर हुए हैं वे रातोरात अमीर नहीं बन गए हैं। वे अपनी लगन और समय का सदुपयोग करते हुए ही अमीर बने हैं।

अमीर बनने के लिए आप कोई बिजनेस करते हैं और काफी कोशिश करने के बाद भी आपको अपने बिजनेस में सफलता नहीं मिल रही है। 

इससे परेशान न होकर अपने काम में लगे रहें। अपने अमीर बनने के लक्ष्य से भटके नहीं। धैर्य के बाद जो सफलता हाथ लगती है, वह असली सफलता होती है। 

जब लंबे समय तक सफलता हाथ नहीं लगती है तो लोग अपना धैर्य खो देते हैं। ऐसे में वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। हड़बड़ी, तनाव, हताशा की स्थिति में अनेक तरह के गलत निर्णय ले लेते हैं। यह उनके लिए नुकसानदेय होता है। 

जगमोहन की कंपनी में हड़ताल हो गई। जगमोहन ने किसी भी स्थिति में कर्मचारियों से बात करने से इंकार कर दिया। बात बिगड़ गई। कर्मचारियों ने लगातार हड़ताल करने की घोषणा कर दी। कई दिनों तक कंपनी बंद रही। 

आखिर में जगमोहन कर्मचारियों की समस्या सुनने के लिए तैयार हुए। 

रफीक का होजरी का कारखाना था। एक दिन मजदूरों ने अपनी मांग को लेकर हड़ताल कर दी। रफीक ने धैर्य से काम लिया। उन्होंने यूनियन के लीडर को अपने पास बुला कर उनकी मांग के बारे में पूछा। उसने मजदूरों की मांग की बारे में बता दिया। रफीक ने उससे कहा, “उनकी मांग पर विचार किया जाएगा। पहले मजदूरों को काम पर भेज दें। फिर हम बैठकर बातें करते हैं।” लीडर ने बिना किसी परेशानी के मजदूरों को काम पर भेज दिया। कंपनी में हड़ताल नहीं हुई। रफीक ने धैर्य के साथ गंभीर मामले को बड़ी ही आसानी से सुलझा लिया।

यदि जगमोहन भी चाहते तो अपने मामले को सुलझा सकते थे। पर उन्होंने धैर्य से काम नहीं लिया। कई दिनों तक उनकी कंपनी बंद रही। जिसका परिणाम उन्हें लाखों रुपये की हानि के रूप में भुगतना पड़ा। 

धैर्य के परिणाम हमेशा अच्छे निकलते हैं। धैर्य से बड़ी से बड़ी परेशानी को टाला जा सकता है। जिनके पास धैर्य नहीं होता है, वे बात-बात पर कुढ़ते हैं, झल्लाते हैं, सामने वाले पर गुस्सा होते हैं, अपशब्द का प्रयोग करते हैं। फिर परेशान होते रहते हैं। धैर्य न होने पर लोग अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। जिसकी वजह से वे अनेक तरह की गलतियां कर बैठते हैं। 

कहा जाता है कि सफल या असफल में एक ही फर्क होता है-एक धीर होता है और दूसरा अधीर। सफलता के फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण तत्व यह है कि आप कितने धैर्यवान हैं। आप उतने ही सफल हैं। 

पिज्जा चेन डोमिनोज शुरू करने के बाद टॉम मोनाहन पर लाखों डॉलर का कर्ज हो गया था। टॉम बैंक का कर्ज लौटा नहीं पा रहे थे। बैंक ने उनसे कंपनी भी छिन ली थी। टॉम फुटपाथ पर आ गए। इस पर भी टॉम ने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्हें विश्वास था कि उनकी कंपनी उन्हें वापस जरूर मिलेगी। 

बैंक को पिज्जा कंपनी वाला कोई नहीं मिला। आखिर में बैंक ने टॉम की कंपनी टॉम को वापस करके उसे लोन चुकाने के लिए कहा। इस बार टॉम ने बड़े ही धैर्य से काम लिया और कंपनी को बचाने के लिए नए सिरे से जुट गए। आखिर में उन्हें सफलता मिली। कुछ ही सालों में कंपनी का सारा कर्जा मुक्त करवा लिया और उसे कमाने वाली कंपनी की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। 

यह सब टॉम के धैर्य का ही नतीजा था। टॉम का कहना था कि उन्होंने यदि उस वक्त धैर्य से काम न लिया होता तो आज कंपनी को दोबारा स्थापित करना मुश्किल होता। सफल होना है तो धैर्यवान बनना होगा। धैर्यशील व्यक्ति किसी भी काम को बड़े सोच-समझ कर करता है। वह किसी भी समस्या की गहराई तक जाकर उसका सही समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करता है। वह हर काम को सोच-समझकर करता है। कार्य करते समय अपना धैर्य नहीं खोता है। सफल होना है तो धैर्य रखें। 

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