होली पर निबंध | Holi Essay in Hindi

Holi Essay in Hindi

होली पर निबंध | Holi Essay in Hindi

होली से अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु और होलिका से संबंधित कथा सबसे प्रमुख, मान्य और लोकप्रिय है। हिरण्यकशिपु एक दुष्ट राजा था और नास्तिक था। वह ईश्वर के भक्तों से द्वेष रखता था। उसने अपने राज्य में मुनादी करवा दी थी कि सभी लोग नारायण के स्थान पर मेरी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद नारायण का महान भक्त निकला। प्रह्लाद नारायण का पूजन-अर्चन छोड़ दे, इसके लिए हिरण्यकशिपु ने अनेक उपाय किए। परंतु भक्त प्रह्लाद पर इसका असर नहीं हुआ। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मार डालने के लिए कई षड्यंत्र किए। हिरण्यकशिपु की एक बहन होलिका थी। उसके पास एक ऐसी चादर थी, जिस पर आग का प्रभाव नहीं पड़ता था। हिरण्यकशिपु के निर्देशानुसार होलिका वह चादर ओढ़कर प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई। लेकिन होलिका तो जलकर मर गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। इस प्रकार होलिका के जल मरने और प्रह्लाद के बच जाने की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। कुछ लोगों की यह मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का संहार किया था। 

 होली का त्योहार वसंतोत्सव या नये संवत् के प्रारंभ की खुशी में फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। पूर्णिमा से एक माह पूर्व ही लोग गांव के बाहर या अपने मुहल्ले के चौराहे पर एक निश्चित स्थान पर जलावन इकट्ठा करते हैं। जलावन के उस ढेर को पूतना या होलिका का प्रतीक मानकर फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में जलाया जाता है। दूसरे दिन सुबह यानी नये साल के प्रथम दिन होली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे के गालों पर रंग-गुलाल मलकर रंगों से सराबोर कर देते हैं। होली के दिन सभी घरों में अच्छे-अच्छे व्यंजन बनाए जाते हैं। इस त्योहार की रीति है कि लोग मित्रों एवं पड़ोसियों के घर जाते हैं, उनसे गले मिलते हैं तथा उनके साथ बैठकर खाते पीते हैं। इस प्रकार वे भाई-चारे का प्रदर्शन करते हैं। होली के अवसर पर गाए जाने वाले गीत विशेष तरह के होते हैं। इन गीतों को लोग डफली, ढोल आदि बजाकर गाते हैं। होली का गीत प्रायः समूह में ही गाया जाता है। 

भारतीय हिंदी साहित्य में होली का बहुत ही चित्ताकर्षक उल्लेख हुआ है। रीतिकालीन कवियों ने होली का मनोमुग्धकारी वर्णन किया है- 

नित मंगल होरी खेलो—कबीर 

खेलन हरि निकले ब्रज होरी-सूरदास

खेलत वसंत राजाधिराज-तुलसीदास 

गांवों की गलियों में ढोल-मंजीरे पर गंवई भाषा में गाया जाने वाला होली गीत भी कम मधुर नहीं होता। एक उदाहरण प्रस्तुत है- 

अवध में राम खेलें होरी,

राम के हाथ कनक पिचकारी, 

लछमन हाथ अबीर झोरी।

कुछ लोग इस सुखद पर्व को हंगामे और फूहड़पन में बदल देते हैं। रंग अबीर एक-दूसरे को प्रसन्न करने के लिए डालना चाहिए न कि परेशान करने के लिए। होली के दिन अत्यधिक नशे का सेवन करके अश्लील हरकतें नहीं करनी चाहिए। होली का सूक्ष्म भाव यह है कि हमें अपने क्रोध, ईर्ष्या एवं वैर को होलिका की अग्नि में जला देना चाहिए।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

2 + 12 =