जुलू युद्ध का इतिहास | History of Zulu War

जुलू युद्ध का इतिहास

जुलू युद्ध (The Zulu War) (1879 ई०) 

सन् 1879 का जुलू युद्ध, ब्रिटिश सेनाओं की वीरता, अदम्य साहस और ब्रिटिश सेना के अधिकारियों के राष्ट्र पर अपने प्राण को बलिदान देने के युद्ध के रूप में याद किया जाता है। 

22 जनवरी, 1879 को ब्रिटिश सेना इसाण्डलवाना (Isandlwana) नामक स्थान पर कैम्प डाले पड़ी थी। रोरकीज (Rorke’s) घाटी में निवार करने वाली जुलू नामक जाति के 20,000 हथियार बन्द लोगों ने ब्रिटिश कैम्प पर एकदम धावा बोल दिया। इसाण्डलवाना नामक उस ब्रिटिश कैम्प पर उस समय केवल 1500 ब्रिटिश सैनिक मौजूद थे। जुलू आक्रमणकारियों के आक्रमण का ब्रिटिश सेना ने साहस के साथ मुकाबला किया। ब्रिटिश सेना की कमान उस समय चेम्सफोर्ड नामक अधिकारी सम्भाल रहा था। चेम्सफोर्ड ने जुलू आक्रमण के साथ ही उस समय उपलब्ध 1500 ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी को चार भागों में बांटकर, पूरव, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चारों दिशाओं से मोर्चा लेने का आदेश दिया। 

ब्रिटिश सेना ने पूरी वीरता के साथ युद्ध किया। पर जुलू आक्रमणकारियों की विशाल संख्या के सामने वीरता काम न आ सकी। अल्मा (Alma) और इंकारमेन (Inkamen) मोर्चे पर ब्रिटिश सेना को भयानक तबाही का सामना करना पड़ा। मृतक सैनिकों को एण्टोब नदी (Ntombe River) के तट पर 12 मार्च, 1879 को दफन कर दिया गया। कैप्टन मोरियार्टी (Captain Moriarty) उत्तरी किनारे पर केवल 71 सैनिकों के साथ, तथा लेफ्टीनेन्ट हार्वर्ड (Lt. Harward) और सार्जेन्ट बूथ (Sgt. Booth) केवल 34 सैनिकों के साथ दक्षिणी मोर्चे पर आक्रमणकारियों से आखिरी सांस तक लोहा लेते रहने के लिए कटिबद्ध थे। उत्तरी मोर्चे पर 1,000 जुलू हमलावरों ने जबरदस्त हमला कर कैप्टन मोरियार्टी की टुकड़ी के अधिकांश सैनिकों को मार डाला। मोरियार्टी अंगुलियों पर गिने-चुने सैनिकों के साथ बचे हुए अपने शौर्य का परिचय दे रहे थे। दक्षिणी मोर्च पर लेफ्टीनेन्ट हार्वर्ड और सार्जेन्ट बूथ की ओर भी यही हालात थे। 34 सैनिकों में से उनके अलावा केवल दो और सैनिक बचे थे। वे भी अन्तिम सांस तक लड़ने का संकल्प लिए हुए थे। 

जुलू युद्ध

यह लड़ाई 29 मई, 1879, चार माह तक ब्रिटिश जांबाज खींच ले गए थे। 29 मई 1879 को कर्नल वुड के नेतृत्व में कम्बूला रिज (Kambula Ridge) पर ब्रिटिश की 2,000 सेना आ पहुंची। ताजादम आने वाली 2,000 की ब्रिटिश टुकड़ी को अच्छा नेतृत्व प्राप्त था। कर्नल वुड ने पूरी सैन्य टुकड़ी को 5 हिस्सों में बांटकर 10 मील तक घेराव डालकर दुश्मनों से लोहा लेने का निर्देश दिया। 

इस नई सेना ने होलबेन (Holbane) पर जबरदस्त हमला करके वहां पहुंचने वाले दिन ही 1:45pm को जुलू आक्रमणकारियों का संहार करना आरम्भ कर दिया। उनके पास अत्याधुनिक युद्धक हथियार थे। एक-एक ब्रिटिश सैनिक दस-दस आक्रमणकारियों पर भारी पड़ने लगा था। अपने साथियों का संहार होते देखकर शाम साढ़े पांच बजे तक जुलू आक्रमणकारी चारों ओर से उसी क्षेत्र में सिमट आए थे-उस समय तक 2,000 जुलू आक्रमणकारियों को अपने प्राण गंवा देने पड़े थे। ब्रिटिश सेना की नुमाइन्दगी करने वाले कर्नल वुड (Coronal Wood) को अपने 3 आफीसर और 25 सैनिकों को युद्ध की भेंट चढ़ाना पड़ा था। 

काबूला (Kambula) क्षेत्र से जुलू आक्रमणकारियों का या तो पूरी तरह से सफाया हो गया था, अथवा उन्हें खदेड़ दिया गया था। ब्रिटिश सेना चारों ओर से सिमट कर मोफोलोजी नदी (Mfolozi River) तट पर 3 जुलाई, 1879 को पहुंच गयी थी। कमाण्डेन्ट बेकर (Commandant Baker) और लेफ्टीनेन्ट कर्नल बुलर (Lt. ColonelBuller) ने मोफोलोजी नदी पार कर ली थी। उनके साथ 2 सेक्सन ब्रिटिश सेना थी। वे पहाड़ियों की ओर बढ़ना आरम्भ हुए थे तभी मोर्चे पर, जहां से ब्रिटिश सैनिक ऊपर की ओर चढ़ाई कर रहे थे-एकदम हमला कर दिया गया। बुलर की टुकड़ी को एकदम से अपने कदम पीछे सरकाने पर-पीछे हटने पर उनकी घुड़सवार सेना के कुछ सैनिक घोड़ों सहित घाटी में लुढ़कने को मजबूर हो गए-पर जुलू हमलावरों को ब्रिटिश सेना ने अपने ऊपर हावी होने का मौका न दिया। आधुनिक हथियारों से वे उन पर फायर पर फायर झोंककर उनकी बढ़त को रोके रखा, साथ ही उनकी संख्या घटाना जारी रखा-यह रुकावट उस समय तक जारी रखी, जबकि कमाण्डेण्ट बेकर अपनी टुकड़ी के साथ पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर न पहुंच गया। कमाण्डेण्ट बेकर की टुकड़ी के ऊपर पहुंचते ही, जुलू हमलावरों पर सीधे कयामत आ टूटी-वे मध्य मोर्चे पर थे-ऊपर से कमाण्डेण्ट बेकर की सैन्य टुकड़ी द्वारा अंधाधुंध फायर झोका जा रहा था, नीचे से बुलर की टुकड़ी उनका काम तमाम कर रही थी। इस दोहरे हमले में जुलू हमलावर की 4,000 पूरी की पूरी संख्या का खात्मा कर दिया गया। इस युद्ध मोर्चे पर ब्रिटिश सेना के सिर्फ तीन सैनिकों को अपनी प्राणोत्सर्ग करना पड़ा था तथा तीन जख्मी हुए थे। 

जनवरी से जुलाई तक छः माह के युद्ध में जुलू आक्रमणकारियों का पूरी तरह सफाया कर दिया गया था।

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