वियतनाम युद्ध का इतिहास | History of Vietnam War

वियतनाम युद्ध का इतिहास का इतिहास

वियतनाम युद्ध का इतिहास का इतिहास (Vietnam War) – (1 नवम्बर, 1955-30 अप्रैल 1975) 

विश्व युद्धों के इतिहास में 20वीं शताब्दी में वियतनाम युद्ध सबसे लम्बे समय 20 वर्षों तक लड़ा जाने वाला युद्ध है। इसे शीत युद्ध काल भी नाम दिया गया है। यह युद्ध वास्तव में कम्युनिस्ट मुल्क सोवियत रूप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच के वर्चस्व का युद्ध था। इन दोनों महाशक्तियों ने वियतनाम को अपना ठिकाना बनाकर युद्ध करते हुए अपनी शक्तियों का प्रदर्शन किया। जान-माल और हथियारों की बर्बादी ने पूरे विश्व के सामने यह प्रश्न लड़ा कर दिया कि इस युद्ध में किसे क्या मिला? यदि किसी ने खोया तो वियतनाम ने, जिसके असंख्य सैनिक युद्ध की भेंट चढ़ गए। 

वियतनाम युद्ध के बारे में जानकारी पाने से पहले इस बात को जानना आवश्यक है कि वियतनाम का इतिहास क्या है, और वियतनाम युद्ध क्यों लड़ा गया?

वियतनाम का इतिहास 

वियतनाम का इतिहास 

वियतनाम का इतिहास 2,700 वर्षों से भी अधिक कालखण्ड में फैला हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध के मामले में इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीन रहा है। वियतनाम के प्रागैतिहासिक काल में वान लंग (2787-2858 BC) राजवंश की कथा आती है। जिसके राज्य के अधीन वर्तमान चीन का ग्वांग्सी स्वायत क्षेत्र (GuangxziAutonomous Region) तथा ग्वांगडॉघ राज्य (Guangdong Province) भी आते थे। इसके अलावा इसमें उत्तरी वियतनाम के क्षेत्र शामिल थे। इसके बाद 207 ईसा पूर्व से लेकर 938 ई० तक चीनी मूल के कई राजवंशों ने वियतनाम पर शासन किया। फिर वियतनाम स्वतन्त्र हुआ। वियतनाम ने 1255 और 1258 के बीच चीनियों और मंगोलों के तीन आक्रमणों का करारा जवाब दिया। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में फ्रांसीसियों ने वियतनाम पर अधिकार करके उसे अपना उपनिवेश बना लिया। 

द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापान ने फ्रांसीसियों को वियतनाम से हटाकर उस पर अपना अधिकार कर लिया। युद्ध की समाप्ति पर फ्रांस ने अपनी खोयी सत्ता को पुनः स्थापित करने की चेष्टा की जिसके फलस्वरूप प्रथम हिन्दचीन युद्ध हुआ। जिसमें वियतनाम की जीत हुई। जिनेवा समझौता हुआ, जिसके अनुसार वियतनाम को दो भागों में विभक्त कर दिया गया और वादा किया गया कि लोकतांत्रिक चुनाव कराने के बाद देश को पुनः एक कर दिया जाएगा। किन्तु विभाजन होने के बाद शान्तिपूर्वक एकीकरण होने के बजाय वियतनाम युद्ध का जन्म हुआ।

युद्ध आरम्भ होने के कारण 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वियतनाम दो हिस्सों में बंटा तो एक हिस्से को उत्तरी वियतनाम तथा दूसरे हिस्से को दक्षिणी वियतनाम नाम दिया गया। उत्तरी वियतनाम की राजधानी लाओस थी और दक्षिणी वियतनाम की कम्बोडिया। 

उत्तरी वियतनाम की सरकार पूरी तरह से कम्युनिस्ट देशों, कम्युनिस्ट मित्र देशों द्वारा समर्थित थी दक्षिणी वियतनाम की सरकार यू०एस०ए० तथा साम्यवादी विरोधी देशों द्वारा समर्पित थी। 

शीत युद्ध महज इस बात पर आरम्भ हुआ कि उत्तरी वियतनाम चीन और अन्य साम्यवादी देशों से समर्थन क्यों प्राप्त कर रहा है, तथा वहां साम्यवादी देशों की सेना क्यों है? 

दरअसल, लाओस सरकार (उत्तरी वियतनाम) का आर्थिक ढांचा काफी कमजोर था। वह अपनी अर्थ व्यवस्था सुधारने के लिए कम्युनिस्ट देशों से मदद ले रहा था। अमेरिका को यह बात मंजूर न हुई। उसने दक्षिण वियतनाम (कम्बोडिया सरकार) की पीठ पर हाथ रखा और इस बात का विश्वास दिलाया कि वह उसकी अर्थव्यवस्था को सुधारने का कार्य करेगा। 

इस तरह कम्बोडिया में अमेरिकी तथा अन्य कम्युनिस्ट विरोधी देशों की सेनाएं आ गयीं। एक ही देश वियतनाम के दो हिस्सों के बार्डर पर दो विरोधी विचारों के देशों की सेनाएं आकर आमने-सामने हुईं तो युद्ध होना लाजिमी हो गया। 1 नवम्बर, 1955 ई० से बाकायदा युद्ध आरम्भ हो गया। 

द्वितीय विश्व युद्ध में वियतनाम अमेरिका और मित्र देशों की सेना की भीषण मारक क्षमता को भली-भाति जानते हुए भी ‘लाओस’ में अपनी धरती उत्तरी वियतनाम को साम्यवादी देशों की सेना के लिए मुहैया करा दी थी। इस एक निर्णय ने लाओस के भविष्य को बारूद के ढेर के नीचे हमेशा-हमेशा के लिए दबा दिया। 

अमेरिका की फौज को एक पिद्दी से देश लाओस के इस निर्णय पर गुस्सा आ गया था। लाओस में बैठी उत्तरी वियतनाम की सेना लाओस अपने सप्लाई रूट और दक्षिण वियतनाम पर भीषण हमला करने के लिए इस्तेमाल करने लगी थी और यह महाशक्ति अमेरिका को मंजूर नहीं हुआ। 

उत्तरी वियतनाम की सेना और छोटे से देश लाओस को सबक सिखाने के लिए अमेरिकी सेना ने यहां अब तक की सबसे भीषण हवाई हमले की योजना बनाई। मौके की ताक में बैठी अमेरिका की वायुसेना ने दक्षिण पूर्व एशिया के इस छोटे से देश लाओस पर इतने बम गिराये जितने आज तक अफगानिस्तान और इराक पर भी नहीं गिराए गए हैं। 

लाओस में वर्ष 1964 से लेकर 1973 तक पूरे नौ साल अमेरिकी वायुसेना ने हर आठ मिनट में बम गिराए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नौ सालों में अमेरिका ने लगभग 260 मिलयन क्लस्टर बम वितयनाम पर दागे हैं। जो कि इराक के ऊपर दागे गए कुल बमों से 210 मिलियन अधिक हैं। लाओस में अमेरिका ने इतने क्लस्टर बम दागे थे कि दुनिया भर में इन बमों से शिकार हुए कुल लोगों में से आधे लाओस के ही हैं। 

अमेरिका द्वारा लाओस पर की गई बमबारी को लेकर हुए खुलासों के अनुसार अमेरिका ने नौ सालों तक प्रतिदिन 2 मिलियन डॉलर सिर्फ लाओस पर बमबारी करने में ही खर्च किए थे।

1959 से 1975 तक चलने वाले युद्ध में 18 लाख 70 हजार लोग मारे गए। इसमें आधी संख्या उत्तरी वियतनाम के उन लोगों की है जो युद्धरत न होकर लाओस के शहरी थे, और अमेरिका की बमबारी में मारे गए। 

संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप से 30 अप्रैल, 1975 को युद्ध बन्द हुआ और लाओस तथा कम्बोजिया से कम्युनिस्ट देशों और पूंजीवादी देशों की सेनाओं को वहां से जाना पड़ा। कम्बोडिया सरकार को अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में हमलावर माना गया।

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