प्रथम और द्वितीय बाल्कन युद्ध का इतिहास | History of the First and Second Balkan Wars

बाल्कन युद्ध का इतिहास

प्रथम और द्वितीय बाल्कन युद्ध (1st and 2nd Balkan War) (1912-1913 ई०) 

बाल्कन युद्ध वास्तव में ओटोमन साम्राज्य के बिखरने का अन्तिम कारण साबित हुआ। इस युद्ध के मूल कारण में मैसिडोनिया था। कमी मैसिडोनिया यूनान का एक राज्य था, बाद में यह ओटोमन साम्राज्य के अन्तर्गत आ गया था। 

कुछ वर्ष पूर्व से ओटोमन साम्राज्य के आधीन राज्य एक-एक करके स्वतन्त्र होकर अलग होते जा रहे थे। 

रूस ने क्रीमिया युद्ध में फ्रांस के हाथों शर्मनाक पराजय के बाद इस बात को मन में रख लिया था कि इस हार के मूल में ओटोमन साम्राज्य के शासक की भूमिका रही है। वह अब ओटोमन साम्राज्य पर सीधे आक्रमण न कर सकता था, जिसकी वजह से उसने ऐसी नीति अपनायी जिसमें वह स्लाविया और सलावों का हिमायती बनकर सामने आया। स्लाव एक जाति थी-स्लाव भाषा बोलने वालों का जो भी क्षेत्र था, वे एक स्लाव थे-यह मुद्दा उठाकर स्लावों में आवाज उठी और सभी स्लाव भाषा बोलने वालों को ‘बाल्कन राज्य के लोग’ कहकर पुकारा गया। रूस ने बाल्कन राज्यों को संगठित करने का निश्चय किया, जिससे स्लावों का उद्धार कराया जा सके। 

स्लाव भाषा प्रधान प्रदेशों में बुल्गर, सर्ब और यूनानी तीन जातियों के लोग निवास करते थे, अतः बुल्गेरिया, सर्बिया और यूनान, तीनों की आंखें इस क्षेत्र पर गड़ी हुई थीं-और तीनों ही इसके भूभागों को अपने राज्य में मिलाने के लिए प्रयत्नशील थे। 

इन तीनों राज्यों को उकसाने से मैसिडोनिया के निवासियों ने उपद्रव करना आरम्भ कर दिया। टर्की की सरकार को मैसिडोनिया में शान्ति व्यवस्था कायम रखना अत्यन्त कठिन कार्य हो गया। अन्ततः युवा तुर्कों ने बड़ी बेरहमी से मैसीडोनिया विद्रोहियों को कुचलना शुरू कर दिया। 

बाल्कन संघ के राज्यों ने टर्की की दमनात्मक कार्यवाही का कड़ा विरोध किया और जब टर्की ने बाल्कन संघ के राज्यों की बातें मानने से इनकार कर दिया, तब 1912 ई० इन लोगों ने टर्की पर चारों ओर से आक्रमण कर दिया। 

यह प्रथम बाल्कन युद्ध था। यूरोप की महाशक्तियों ने बाल्कन राज्यों को संगठित करने का प्रयास किया, लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा और युद्ध चलता रहा। 

प्रथम और द्वितीय बाल्कन युद्ध

इस युद्ध में टर्की की सेना बुरी तरह पराजित हुई। बुल्गारिया ने कर्क किल्से स्थान पर कब्जा कर लिया। सर्बिया ने कुमौनोमो पर यूनान ने सैलोनिका को कब्जे में ले लिया। सर्बिया ने सैनिकों ने आगे बढ़ते हुए नोमीबाजार तथा उत्तरी अल्वेनिया पर कब्जा कर लिया। 

बुल्जेरिया की सेना एड्रियानोपुल और कानसटेण्टिनोपुल की बाहरी सीमा पर पहुंच गयी। ऐसा लगने लगा कि दुनिया के नक्शे से टर्की साम्राज्य का नामोनिशान मिट जाएगा। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए यूरोप की महाशक्तियों ने पुनः हस्तक्षेप करने का निश्चय किया ताकि फैलते हुए युद्ध को रोका जा सके। 

30 मई, 1913 को महाशक्तियों के राजदूतों का एक सम्मेलन लंदन में हुआ। इसने युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त कराया। सम्मेलन ने बाल्कन प्रायद्वीप के राजनीतिक नक्शों को पुनः नए सिरे से तैयार किया गया। एक स्वतन्त्र अल्वेनिया राज्य की स्थापना की गयी तथा मैसिडोनिया को यूनान, बुल्गेरिया तथा सर्बिया के बीच बांट दिया गया। 

यूनान को सैलोनिका मिला, सर्बिया को उत्तरी और दक्षिणी मैसीडोनिया प्राप्त हुआ। बुल्गेरिया को फ्रांस तथा एजीयन सागर के तटीय प्रदेश, एड्रियानोपुल प्राप्त हुआ। इस प्रकार राजदूतों के लंदन सम्मेलन तथा इसके परिणामस्वरूप हुई संधि ने बाल्कन राष्ट्रवाद की विजय को आगे बढ़ाया। 

इस तरह यूरोप में टर्की का साम्राज्य करीब-करीब समाप्त हो गया। 

पर, लन्दन में बनायी गयी इस व्यवस्था ने बाल्कन युद्ध के लिए एक नया रास्ता खोल दिया। यह युद्ध का वातावरण इस बार टर्की के विरुद्ध नहीं बल्कि बाल्कन राज्यों के बीच था। मैसिडोनिया के विभाजन से बाल्कन संघ के सदस्यों के बीच मतभेद पैदा हो गया था जिसके कारण बाल्कन संघ में एक-दूसरे से आपसी सम्बन्ध तोड़ लिये, बाल्कन संघ विघटित हो गया। 

सर्बिया ने मैसिडोनिया को अपने कब्जे में रखा; इसी प्रकार यूनान ने सैलोनिया पर अधिकार रखते हुए एजीयन सागर के तटीय भू-भाग पर अपना दावा पेश किया। 

बुल्गेनिया चाहता था कि सर्बिया जीते हुए कुछ भाग उसे लौटा दे और यूनान सैलोनिया को भी बुल्गेरिया को दे दे। इस प्रकार पहले के मित्र राज्यों के बीच भू-भाग के बंटवारे को लेकर घोर मतभेद पैदा हो गया। 

जब वार्तालाप द्वारा मसलों का हल नहीं हुआ तो सभी पक्षों ने ताकत आजमाने का निश्चय किया। 

इस तरह बाल्कन द्वितीय युद्ध का वातावरण तैयार हो गया। जून 1913 को बुल्गेरिया ने सर्बिया और यूनान, दोनों पर एक साथ आक्रमण कर दिया। इस युद्ध के साथ बाल्कन का द्वितीय युद्ध शुरू हो गया। टर्की ने इस स्थिति से फायदा उठाते हुए, बुल्गेरिया के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। उसने एड्रियानोपुल पर पुनः कब्जा पा लिया। 

दोहरे आक्रमण से बुल्गेरिया को भारी नुकसान उठाना पड़ा-उसकी सेना ने हथियार डाल दिये। 10 अगस्त, 1913 को युद्ध स्थगन की उसने घोषणा कर दी। 

उसके बाद बुखारेस्ट की सन्धि हुई। इस संधि के अनुसार यूनान ने दक्षिणी मैसिडोनिया, सर्बिया ने उत्तरी मैसिडोनिया, रूमानिया तथा दक्षिणी दोबुजा को अपने पास रखा। टर्की का एड्रियानोपुल पर अधिकार बना रहा। 

दो बाल्कन युद्धों के फलस्वरूप बाल्कन प्रायःद्वीप का मानचित्र एकदम बदल गया। इन युद्धों के पश्चात् टर्की का साम्राज्य जो यूरोप से सिमट गया था, पूरी तरह से समाप्त हो गया। स्वतन्त्र राज्यों के क्षेत्रफल और आबादी में काफी वृद्धि हुई। 

बाल्कन राज्यों की राष्ट्रीय आकांक्षाएं बहुत हद तक पूरी हो गयीं। लेकिन, इससे यूरोपीय शान्ति के लिए कुछ खतरनाक लक्षण भी प्रकट हुए। बुल्गेरिया को इस व्यवस्था से काफी नुकसान हुआ। वह अपने अपमान का बदला लेने का अवसर की ताक में लगा रहा। बुखारेस्ट संधि के अवसर पर रूस ने सर्बिया का पक्ष लिया अतः बुल्गेरिया रूस से दूर हटने और आस्ट्रिया के नजदीक आने लगा। बुल्गेरिया और आस्ट्रिया के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध कायम हुए। 

इसका परिणाम प्रथम विश्व युद्ध में सामने आया। प्रथम विश्व युद्ध में बुल्गेरिया, आस्ट्रिया का पक्ष लेते हुए रूस के विरुद्ध युद्ध में शामिल हुआ। बाल्कन युद्धों से टर्की भी बहुत कमजोर हुआ था। पूरे यूरोप में जर्मनी ही उसका एकमात्र पक्षधर रह गया था, अतः टर्की जर्मनी पर पूरी तरह आश्रित हो गया। 

बाल्कन युद्धों से सबसे अधिक लाभ सर्बिया को हुआ। उसकी सारी आकांक्षाएं पूरी हो गयीं थीं। अब उसे केवल आस्ट्रिया से फैसला करना बाकी रह गया था।

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