ब्रिटिश अमेरिका युद्ध का इतिहास | History of the British America war

 ब्रिटिश अमेरिका युद्ध

 ब्रिटिश अमेरिका युद्ध (British American War) (1812-1814 ई०) 

ब्रिटेन और अमेरिका के बीच विश्व प्रसिद्ध युद्ध जून, 1812 से आरम्भ होकर दिसम्बर, 1814 तक चलता रहा। इस युद्ध को अमेरिका द्वारा 18 जून, 1812 ई० को ब्रिटेन पर थोपा गया। इस युद्ध में अमेरिका ने स्पेन तथा पुर्तगाल को अपना मित्र घोषित किया था। यह युद्ध ब्रिटेन पर उस समय थोपा गया जबकि वह फ्रांस के तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट के आक्रमण से त्रस्त उसके साथ युद्धरत था। 

इस युद्ध की वजह कनाडा का सीमान्त क्षेत्र चीजापिआक (Chesapeske) नामक स्थान बना था। यह स्थान मेक्सिको (Maxico) तट पर स्थित था। 

सन् 1783 में अमेरिका में क्रान्ति के द्वारा गृहयुद्ध छिड़कर संयुक्त राज्य की स्थापना हुई थी। पेरिस सन्धि (Treaty of Paris) 1783 में ग्रेटे ब्रिटेन ने ओल्ड नार्थवेस्ट (Old Northwest) का सम्पूर्ण क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका को हस्तगत कर दिया था। परन्तु बाद के वर्षों 1812 ई० तक हस्तगत क्षेत्र से ब्रिटेन अपना सम्पर्क बना रखा था-नेपोलियन युद्ध के समय उक्त क्षेत्रों से, ब्रिटिश सेना को खाद्य-सैनिक आपूर्ति प्राप्त हो रही थी। अमेरिका की नाराजगी की यही वजह बनी थी। 

 History of the British America war

उस समय तक साफ जाहिर हो रहा था कि ब्रिटेन ने हस्तगत किए गए क्षेत्र को अपना अधिकृत क्षेत्र मान रखा है। अमेरिका ने उक्त क्षेत्रों से ब्रिटिश सप्लाई को रोककर ब्रिटेन के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। 

यह युद्ध पूर्ण रूप से समुन्द्री युद्ध था-इस समुन्द्री युद्ध में जवाबी कार्यवाही के लिए ब्रिटेन ने अपने जहाजी बेड़े, अमेरिकी जलपोतों के विरुद्ध उतार दिए। 

दोनों ओर से समुन्द्री युद्ध छिड़ते ही अमेरिका ने अपनी मांग का विस्तार कर दिया। उसने उत्तरी अमेरिका के महासागरीय तटों के उन क्षेत्रों पर भी अपना अधिकार होने का दावा कर दिया जिनकी सत्ता 1778 ई० में इंग्लैण्ड के राजा (King of England) के हाथ में चली आ रही थी। उत्तरी अमेरिका के वे लोग, जो उस समय तक ब्रिटेन के अधीन रहकर खुद को खुशहाल महसूस कर रहे थे, उनकी ओर से अमेरिका के दावा का प्रबल विरोध किया गया। विरोध ने 

इतना जोर पकड़ा कि लगा था, उत्तरी अमेरिका कहीं एक बार फिर गृहयुद्ध की स्थिति में न आ जाए। 

उस समय ब्रिटेन इस स्थिति में न था कि अमेरिका से सीधे युद्ध में लिप्त हो सकता। इस विषय पर ब्रिटेन के राजनीतिक विश्लेषणों में गहनता से विचार किया गया। जब तक कोई फैसला लिया जाता, स्थिति बहुत अधिक बिगड़ गयी थी। दोनों देशों के नौसैनिक युद्ध आरम्भ हो चुके थे। अमेरिका के मुकाबले ब्रिटेन के नौसैनिक छोटे और हल्के थे, जबकि अमेरिका के नौसैनिक युद्ध पोत भारी तथा युद्ध संहारक शस्त्रों से लैस थे। 

ब्रिटेन के नौसैनिक रायल नेवी (Royal Navy) के नाम से जाने जाते थे। चीजापिआक से हार्बर (Habifax Harbour) तथा रायल नेवी का उस समय आवागमन अबाध गति से संचालित हो रहा था। अमेरिकन नेवी का प्रयास था कि रायल नेवी के आवागमन को रोक दिया जाए। उसने चीजापिआक और हालीफैक्स हार्बर के मध्य के समुन्द्र के बीच अपने जलपोत अड़ा कर बाधा उत्पन्न कर दी। 

दोनों ओर से नौसैनिक युद्ध छिड़ने से दोनों ओर से व्यापारिक जलयानों के आवागमन पर भारी प्रभाव पड़ा। इस युद्ध में 8,600 ब्रिटिश सैनिक या तो मारे गए या लापता हो गए। अमेरिका के 11,300 सैनिकों के मृत्यु को प्राप्त करना पड़ा। इस युद्ध में सबसे अधिक क्षति उत्तरी अमेरिका के उन लोगों की हुई जो ब्रिटेन के पक्ष में क्रान्ति के पक्षधर होकर सामने आए थे। अमेरिका सेना ने उन्हें पूरी तरह कुचल दिया। 

अमेरिका ने उत्तरी अमेरिका के कनाडा के आस-पास के क्षेत्र पर जिस युक्ति से अपने नौसैनिक बेड़े लगाए थे, उसमें रॉयल आर्मी के लिए, पीछे से आपूर्ति को पूरी तरह काट दिया गया था। आपूर्ति मार्ग के कटने से ना तो रॉयल नेवी के सैनिकों को खाद्य आपूर्ति मिल सकी ना ही युद्धक आयुध । इसका परिणाम जिस रूप में सामने आना था, ठीक उसी रूप में सामने आया। अमेरिका ने अपने दावे के सारे क्षेत्र पर अधिकार करके, रॉयल नेवी को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया। उसने अपने दावे वाले क्षेत्रों में से एक एकड़ क्षेत्र पर भी किसी अन्य का दावा स्वीकार न किया। उसने कनाडा को, पूरी तरह से अमेरिकी संघ का हिस्सा बना लिया। 

उस समय से पूर्व कनाडा को एक प्रकार से स्वतन्त्रता प्राप्त थी। पर अमेरिका द्वारा कनाडा को अमेरिकी संघ का हिस्सा घोषित करने के बाद जो व्यवस्था सामने आयी, उसमें कनाडा में अमेरिकी सेना की मौजूदगी भी हमेशा के लिए निश्चित हो गयी।

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