बोअर युद्ध का इतिहास | History of the Boer War

दक्षिण अफ्रीका का बोअर युद्ध

दक्षिण अफ्रीका का बोअर युद्ध (The Boer War of South Africa) (1899-1902) 

दक्षिण अफ्रीका का बोअर युद्ध, 1899-1902 ई० में हुआ। यह युद्ध दक्षिणी अफ्रीका के दो प्रजातांत्रिक बोर राज्यों के बीच हुआ। इन बारों राज्यों ने ग्रेट ब्रिटेन के अफ्रीका के उत्तरी भू-भाग में स्थित दो कालोनीय-केप कालोनी (Cape Colony) और नाटाल (Natal) के विरुद्ध युद्ध किया। यह बोर युद्ध दो बार लड़े गए। पहला युद्ध 1880-81 में हुआ। 

इस युद्ध में बोर राज्यों को ग्रेट ब्रिटेन से युद्ध करने में पराजय का सामना करना पड़ा। दूसरी बार 1899 से 1902 तक उपरोक्त दोनों राज्यों ने केप कालोनी और नाटाल से ब्रिटिश सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध किया। 

बोअर युद्ध का इतिहास

बोर राज्यों के पास कोई बड़ी सेना न थी, जबकि ग्रेट ब्रिटेन में उपरोक्त दोनों कालोनियों को अपने अधिकार क्षेत्र में बचाए रखने के लिए लेडी स्मिथ (Ladysmith) मैफेकिंग (Mafeking) और किम्बरले (Kemberley) में भारी सेना की व्यवस्था कर रखी थी। 

भारी ब्रिटिश सेना से मुकाबला करने के लिए बोर के लोगों ने युद्ध की गोरिल्ला पद्धति अपनायी। वे पहाड़ियों में छुपे रहकर, अचानक प्रकट होते थे, ब्रिटिश सेना पर छापामार हमला करके उन्हें भारी क्षति पहुंचाते थे और भाग खड़े होते थे। 

अपनी गोरिल्ला युद्ध पद्धति के शुरूआती दौर में ही बोर राज्यों की स्वतन्त्रता के रक्षकों ने, ब्रिटिश सैनिकों का ऐसा संहार किया कि लाशें सड़ने लगीं। जिनसे फैलने वाली बीमारियों से 13,000 ब्रिटिश सैनिकों को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा। हमलों से लगभग 22,000 ब्रिटिश सैनिक मारे गए। 

ब्रिटिश सेना के इतने बड़े संहार के कारण बोर युद्ध में शामिल ब्रिटिश सेनापतियों के सामने इस बात की कठिन परिस्थितियां उत्पन्न हो गयीं थीं कि वे किस तरह आगे की लड़ाई की नीति निर्धारित कर सकें। 

सबसे अधिक समस्या यह आ गयी थी कि बोर गोरिल्लाओं के हाथों में जर्मन माउजर राइफलें (German Mauser Rifles) पड़ गयीं थीं-उन्होंने उसकी व्यवस्था कहां से की थी, इसका पता न चल पाया था। पर वे जर्मन राइफलें अति संहारक थीं। उनका इस्तेमाल धुंआविहीन (Smokeless) होता था। धुआं नजर न आता था, राइफल को चलाने के बाद एक विशाल क्षेत्र में विषैला वातावरण फैल जाता था, जिसमें ब्रिटिश सैनिकों की लाशों पर लाशें गिरती चली जाती थीं। 

सन् 1900-1902 को युद्ध के अतिम दौर के 14 महीनों में, जबकि ब्रिटिश सेना में 2,50,000 से 4,00,000 के बीच नई सेना उतारी थी, उसमें से 20,000 सेना का सफाया हो गया। ब्रिटिश सेना के इस भयंकर संहार के बाद ग्रेट ब्रिटेन ने केप कालोनी और नाटाल को अपनी अधीनता से मुक्त करने का निर्णय लेना पड़ा था।

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