भारत-पाकिस्तान प्रथम युद्ध का इतिहास | History of India-Pakistan First War

भारत-पाकिस्तान प्रथम युद्ध का इतिहास

भारत-पाकिस्तान प्रथम युद्ध का इतिहास (First Battle of India-Pak) (1949 ई०) 

15 अगस्त, 1947 ई० भारत को स्वतन्त्रता मिलने के साथ हिन्दोस्तान पाकिस्तान का बंटावारा हो गया था। पाकिस्तान का बंटवारा, भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के राजनीतिक नेता मुहम्मद अली जिन्ना की मांग और जिद पर आड़े रहने के कारण हुआ था। जिन्ना का कहना था कि भारत में, हिन्दू और मुसलमान अलग-अलग धर्म और संस्कृति के लोग हैं। स्वतन्त्रता के बाद धर्म निरपेक्ष भारत में मुसलमान अपने धर्म और संस्कृति की आजादी के साथ नहीं रह सकते, अतः उनका अलग देश होना चाहिए-अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति यहां भी काम आयी। उन्होंने पाकिस्तान नाम से भारत का कुछ हिस्सा अलग कर बंटवारा कर दिया था। 

नोट-आजाद भारत में दशक पर दशक बीत जाने के बाद जिन्ना का कथन को गलत सिद्ध कर गया। साबित हो गया कि उनका कथन पूर्णतया अवसरवादी था, सच्चाई से कोसो दूर था। बंटवारे के बाद भी भारत में बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान स्वेच्छा से रह गए थे। उन्हें भारत में धर्म और संस्कृति की जो स्वतन्त्रता प्राप्त है वह दुनिया के और किसी हिस्से में नहीं। जब कि जो मुसलमान बंटवारे के बाद पाकिस्तान में, पूर्व से उस क्षेत्र में रह रहे मुसलमानों के बीच गए, उन्हें उन्होंने दशाब्दियों बीत जाने के बाद भी ‘महाजिर’ कहकर सम्बोधित किया। पाकिस्तान के हिस्सों में पूर्व से रहने वाले मुसलमान उन्हें बहुत समय तक दोयम दर्जे का नागरिक मानकर चलते रहे। जबकि भारत के मुसलमानों को आजादी के पहले दिन से ही देश का नागरिक माना गया। उन्हें कभी-कभी तो बहुसंख्यक की अपेक्षा कहीं ज्यादह ऐसी सुविधाएं दी गयीं कि दक्षिण पंथी लोगों ने इसके विरुद्ध समय-समय पर आवाज भी उठायी।

भारत का प्रथम युद्ध कश्मीर को लेकर हुआ। वहां का शासक हिन्दू राजा था, किन्तु वहां की बहुसंख्यक जनता मुसलमान थी। देश के विभाजन के उपरान्त कुछ देशी राज्य भारत संघ में और कुछ पाकिस्तान में मिल गए। इसकी उन्हें आजाठी पहले से मिली थी। किन्तु कश्मीर के राजा ने अपना स्वतन्त्र अस्तित्व बनाए रखने का निश्चय किया; किन्तु पाकिस्तान को यह असाह्य था। वह कश्मीर को पाकिस्तान का एक अंग बनाना चाहता था। अतएव इसने 1949 ई० में कश्मीर पर सहसा आक्रमण कर दिया। कश्मीर का शासक घबरा गया। उसने इस संकट काल में भारत की सहायता मांगी। भारत सरकार सहायता देने को उद्यत हो गयी और भारतीय सेनाएं कश्मीर में प्रवेश कर गयीं। किन्तु पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बहुत बड़े भाग पर अपना अधिकार कर लिया था और उसे ‘आजाद कश्मीर’ की संज्ञा दी। 

भारत-पाकिस्तान प्रथम युद्ध का इतिहास

इस लड़ाई की शुरूआत पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को घुसपैठियों के रूप में भेजकर इस उम्मीद से की थी कि कश्मीर की जनता भारत के खिलाफ विद्रोह कर देंगी। इस अभियान का नाम पाकिस्तान ने युद्धभिमान जिब्राल्टर रखा था। पांच महीने तक चलने वाले इस युद्ध में दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गए। इस युद्ध का अन्त संयुक्त राष्ट्र के द्वारा युद्ध विराम की घोषणा के साथ हुआ और ताशकंद में दोनों पक्षों में समझौता हुआ। 

इस लड़ाई का अधिकांश हिस्सा दोनों पक्षों की थल सेना ने लड़ा। कश्मीर के विषय में कभी पहले इतना बड़ा सैनिक जमावड़ा नहीं हुआ था। युद्ध में पैदल और बख्तरबर टुकड़ियों ने वायुसेना की मदद से अनेक अभियानों में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों के बीच हुए अनेक युद्धों की तरह इस युद्ध की अनेक जानकारियां दोनों पक्षों ने सार्वजनिक नहीं थीं। 

बहुत दिनों तक युद्ध चलता रहा, कोई किसी को पीछे नहीं ढकेल पाया। अंत में मामला संयुक्त राष्ट्र संघ को सौंप दिया गया। जहां से दशक पर दशक बीतने के बाद भी कोई निर्णय नहीं हो पाया। 

परिणाम यह हुआ कि जितने भाग पर पाकिस्तान ने सैन्य बल से अपना अधिकार जमा लिया था, उतना पाकिस्तान के अधिकार में है और शेष भाग भारत संघ का अंग बन गया।

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