हिंदी स्टोरी फॉर किड्स पंचतंत्र-कहां गई अक्ल?

हिंदी स्टोरी फॉर किड्स पंचतंत्र

हिंदी स्टोरी फॉर किड्स पंचतंत्र-कहां गई अक्ल?

चार ब्राह्मणों के बेटों को पढ़ने के लिए गुरुकुल में भेजा गया। आश्रम में उन्हें सभी कार्य अपने-आप करने होते थे। वे सब मिल कर जंगल से लकड़ी काटने जाते, आश्रम की सफाई करते, सुबह जल्दी उठ कर गौओं का दूध दुहते, पौधों को पानी देते और पढ़ाया गया अपना पाठ याद करते। इसी तरह कुछ वर्ष बीत गए। वे वहां आपस में पक्के मित्र बन गए। उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और अपने-अपने शहरों में जाकर आजीविका कमाने लगे। उनमें से तीन को तो शास्त्रों की जानकारी थी, पर चौथा उन सबसे अलग था। उसने बहुत पढ़ाई नहीं की थी पर उसके पास सामान्य बुद्धि का भंडार था।

एक बार उन सबने तय किया कि वे अपने ज्ञान और विद्या के बल पर किसी राजा या धनी व्यक्ति को प्रभावित करेंगे। इस तरह वे भी धनी-मानी बन जाएंगे। वे एक साथ पूर्व दिशा की ओर चल दिए। जब वे एक साथ जा रहे थे तो पहले पंडित ने कहा, “दोस्तो! हम तीनों ने कितनी मेहनत से विद्या ग्रहण की है। हम अपने धन को आपस में बांट लेंगे। हमारे चौथे मित्र के पास सामान्य ज्ञान के सिवा कुछ नहीं है। भला उससे हमें क्या लाभ होगा। इसलिए हम इसे अपने धन में से हिस्सा नहीं देंगे। इसे अपने बल पर ही कुछ कमाना होगा।” 

दूसरे पंडित ने भी हामी भर दी, पर तीसरा बोला, “नहीं दोस्तो, यह हमारा मित्र है। मेरे हिसाब से तो इसे भी साथ ले चलना चाहिए और जो भी मिले उसे हमें आपस में चार हिस्सों में बांटना चाहिए।” थोड़ी सी बहस के बाद वे अपने चौथे मित्र को भी अपने साथ ले जाने के लिए मान गए। 

जब वे घने वन से निकले तो उन्हें किसी मरे हुए शेर की बिखरी हड्डियां दिखाई दीं। तीनों पंडितों को अपने ज्ञान की परीक्षा करने का मौका मिल गया था। वे तो जाने कब से ऐसे ही मौके की तलाश में थे। ज्यों ही उन्होंने शेर को देखा, वे जान गए कि आज अपने ज्ञान की परीक्षा ली जा सकती है। 

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पहले पंडित ने कहा, “देखो! ज्यों ही मैं मंत्र का जाप करूंगा। यह हड्डियां आपस में मिल कर अस्थि-पंजर तैयार कर देंगी, इसके बाद उसने मंत्र पढ़ कर हड्डियों का ढांचा तैयार कर दिया। पलक झपकते ही वहां शेर का ढांचा दिखाई देने लगा। 

दूसरे पंडित ने कहा, “यह तो बहुत अच्छा हुआ। अब तुम सब देखो, मैं इस ढांचे पर मांस चढ़ा सकता हूं। इतना, ही नहीं, इसकी नसों में खून का दौरा भी चालू हो जाएगा। ऐसा लगेगा मानो कोई शेर सो रहा है।” और उसने ऐसा ही किया। सच में वहां सोया हुआ शेर दिखाई देने लगा। 

तीसरा पंडित बहुत ही जोश में आ गया। वह बोला, “मित्रो! मैं इस मरे हुए शेर में जान डाल सकता हूं। तुम लोग देखना, एक ही पल में यह शेर उठ कर चलने-फिरने लगेगा। यह मुझे प्रणाम करेगा और धन्यवाद देगा कि मैंने इसे दोबारा जीवित कर दिया।” 

तभी चौथा मित्र बोला, “ठहरो! अगर यह शेर जीवित हो गया, तो यह हम पर अभी हमला कर देगा। तुम इसमें प्राण मत डालो।” 

“मूर्ख कहीं के! तुम्हें खुद तो कुछ आता नहीं। दूसरों को भी कुछ नहीं करने देते। चुपचाप खड़े रहो और आगे देखो।” उन तीनों ने चौथे मित्र को डपट दिया। चौथा मित्र जानता था कि उन लोगों से बहस करना बेकार है। वह चुपचाप एक पेड़ पर चढ़ गया।

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तीसरा पंडित मंत्रजाप करने लगा। उसके मंत्र सुनते ही शेर की लाश में जान आ गई। उसने अपने सामने तीन शिकार देखे और देखते ही देखते उन पर छलांग लगा दी। एक ही पल में वे तीनों ढेर हो गए। चौथा मित्र अपनी सामान्य बुद्धि के कारण बच गया। अतः शास्त्र बुद्धि के साथ व्यवहार बुद्धि भी जीवन के लिए उपयोगी होती है। हमें कोई भी काम करने से पहले उसके परिणाम पर अवश्य विचार कर लेना चाहिए।

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