Hindi story-कामयाबी का राज 

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कामयाबी का राज 

एक बार प्रसिद्ध वैज्ञानिक नील्स बोर सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी के भौतिक संस्थान पहुंचे। वहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बोर उन दिनों फिजिक्स में अपने रिसर्च के लिए जाने जाते थे। उनका इंस्टीट्यूट उस समय के चर्चित युवा वैज्ञानिकों से भरा हुआ था।

उसमें काम करने के लिए वैज्ञानिक लालायित रहते थे। वहां काम करने वालों में फूट डालने की कोशिश भी की गई पर किसी को सफलता नहीं मिली। 

विज्ञान अकादमी के भौतिक संस्थान के अधिकारी बड़ी देर . तक अनेक विषयों पर बातचीत करते रहे। थोड़ी देर बाद वे बोले, ‘सर, यदि आपको बुरा न लगे तो मैं एक निजी बात आपसे पूछना चाहता हूं।’

नील्स बोर ने कहा, ‘जरूर पूछिए। मैं जवाब देने के लिए हाजिर हूं।’ इस पर अधिकारी बोले, ‘सर, आपके साथ काम करने वाले लोग हमेशा खुश रहते हैं। आपका संस्थान दिन प्रतिदिन प्रगति की ओर अग्रसर है। आखिर इसका क्या राज है?’ 

प्रश्न सुनने के बाद नील्स बोर मुस्कराते हुए बोले, ‘इसका बहुत छोटा सा राज है और वह यह कि मैं अपने संस्थान में काम करने वाले छोटे से छोटे व्यक्ति के काम की भी भरपूर तारीफ करता हूं और इसके अलावा मुझे उनके सामने कभी भी अपनी गलती स्वीकार करने में संकोच या झिझक नहीं होती।

मुझे लगता है शायद इसीलिए सभी खूब मन लगाकर काम करते हैं और अपनी भरपूर क्षमता दिखाने में लगे रहते हैं। उनमें आपस में एक सकारात्मक होड़ लगी रहती है। इसका फायदा पूरी संस्था को होता है।’ अधिकारी नील्स बोर के संस्थान की प्रगति का रहस्य जानकर दंग रह गए।

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