Hindi motivational story-गुरुदक्षिणा 

Hindi motivational story

गुरुदक्षिणा 

Hindi motivational story एक शिष्य ने अपने गुरु से ज्ञान प्राप्ति के बाद सोचा कि मुझे अपने गुरु को इस मेहनत के लिए गुरुदक्षिणा देनी चाहिए। गुरुदक्षिणा में मुझे ऐसी वस्तु चाहिए जो बिल्कुल व्यर्थ हो।

शिष्य इस चीज की खोज में निकल पड़ा।उसने सबसे पहले मिट्टी को व्यर्थ समझकर उसके तरफ हाथ बढ़ाया तभी उसका अंतर्मन बोला अरे मूर्ख तुम मिट्टी को व्यर्थ समझ रहे हो धरती का संसार और वैभव इसी के गर्भ में प्रकट होता है।

तो फिर आगे बढ़ा फिर चलते चलते उसे एक जगह गंदगी का ढेर मिला। इस गंदगी को देखते ही जिसके मन में घृणा होने लगी। वह सोचने लगा इससे बेकार चीज और क्या हो सकता है। तभी अंतर्मन से फिर आवाज आया। हे मूर्ख तुम्हें धरती पर इससे बढ़िया खाद कहां मिलेगा जो फसलों के पोषण दिलाती है। यदि इस कचरे को मिट्टी में कुछ समय के लिए दबा दिया जाए तो यह प्राकृतिक खाद मिट्टी के पोषण फसलों के लिए बहुत उपयोगी होती है।

अब शिष्य बहुत गहरी सोच में डूब गया वह सोचने लगा इस धरती पर सबसे व्यर्थ चीज क्या हो सकता है। तभी शिष्य को रास्ते में एक बहुत ज्ञानी मुनि मिले उसने अपनी इस समस्या को बताया। उन्होंने कहा सृष्टि का हर पदार्थ उपयोगी होता है चाहे वह देखने में उपयोगी ना लगे या किसी काम का तुम को मालूम ना पड़े लेकिन भगवान नहीं से धरती पर किसी न किसी को उनके लिए ही भेजा है।

लेकिन इस धरती पर व्यर्थ और तुच्य पदार्थ  वह हैजो दूसरे को व्यर्थ और तुच्य समझता है। इस धरती पर अहंकार के सिवा व्यर्थ पदार्थ और क्या हो सकता है। शिष्य इस बात को समझ गया।

शिष्य अपने आश्रम में गुरुजी के पास लौटा। गिर गिराया हे गुरुदेव मैं इस धरती पर हर जगह घुमा तब बहुत कुछ खोजने के बाद मुझे इस धरती पर अहंकार के सिवा कुछ भी व्यर्थ पदार्थ नहीं मिला। इसलिए मैं गुरु दक्षिणा में आपको अहंकार देने आया हूं।

शिष्य की यह बात सुनकर गुरु बहुत प्रसन्न हुआ। बोले सही समझे वत्स! “अहंकार के विसर्जन से ही विद्या सार्थक और फलदायक होती है”।

More from my site

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *