Hindi motivational story-स्वभाव में परिवर्तन

Hindi motivational story

स्वभाव में परिवर्तन

Hindi motivational story- हजरत मुहम्मद के एक चाचा थे हुसैन। वे आलीशान मकान में रहते थे। उनके पास धन की कमी न थी। उनके कमरों में बढ़िया कीमती कालोन विछे रहते थे। गुलामों ओर नौकरों पर उनका बड़ा ही दवदवा था और वे सब उनको देख थर-थर काँपते थे। . 

एक बार एक गुलाम उनका खाना मेज पर लगा रहा था। जब वह रकाबियाँ लगा रहा था तो अचानक चिकने कालीन पर से उसका पैर फिसल गया और रकाबियाँ हाथ से नीचे गिर पड़ी तथा आपस में टकरा-टकराकर चूर हो गयीं। गुलाम बड़ा ही भयभीत हुआ कि न मालूम उसे क्या दण्ड मिलेगा, किंतु इसके पूर्व कि उसका मालिक डांट-फटकार करे और दण्ड दे, वह घुटने टेककर हुसैन के सामने बैठ गया और सिर झुकाकर उनसे बोला “मालिक, जो दूसरों पर गुस्सा नहीं करते, वे बड़े होते हैं।” 

हुसैन कुछ देर तक उस गुलाम के चेहरे की ओर देखते रहे, फिर रुककर उससे बोले- “मैंने तो तुम पर गुस्सा नहीं किया।” 

इस पर गुलाम बोला- “जिन्हें गुस्सा आता ही नहीं, वे सबसे बड़े होते हैं।” हुसैन ने कहा- “तुम ठीक कहते हो।” गुलाम फिर बोला- “लेकिन जो दूसरों की गलतियाँ माफ कर देते हैं, वे सबसे बड़े होते हैं।” 

हुसैन ने कहा- “मैंने तुम्हें माफ कर दिया। लो, ये चार सौ दिरहम। मैंने तुम्हें माफ ही नहीं, आजाद भी कर दिया, जाओ।” 

हुसैन पर उस गुलाम के शब्दों का इतना अधिक असर हुआ कि उसने उनके स्वभाव में ही परिवर्तन कर दिया।

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