hindi story- सुगंध और दुर्गंध

सुगंध और दुर्गंध

सुगंध और दुर्गंध

hindi story- महादेव और पार्वती एक बार जंगल घूमने के उद्देश्य से निकल पडे पृथ्वी लोक की ओर। दोनों का जंगल की सैर में आंनद आ रहा . था। तरह-तरह की वनलताएं। तरह-तरह के वृक्ष। अलग-अलग पखेरूओं की अलग-अलग धुन। हर फल का स्वाद अपने में खास और मजेदार । रंग बिरंगी तितलियां। मन को भरमाने वाले हिरण, सांभर, चीतल, खरहा, शाही, वनमुर्गी, नेवले, न जाने कितने जीव-जन्तु। शीतल मंद और महकती हवा। गीत गाते नदी-नाले, झरने। लुभावनी पर्वत श्रृंखला। हरी-भरी घाटियां। भांति-भांति के चिरई-चिरगुन । 

घूमते-घूमते दोनों मणि जैसे फूल से लदे एक पेड़ के पास पहुंचे। पीले-पीले फूलों की सुगंध से आसपास का वातावरण गमक रहा था। इस मादक सुगंध में इन दोनों को जैसे खींचे चले आए पेड़ के नीचे।  फिर से महादेव शिव-   पार्वती पार्वती जी के सिर पर महुआ के पेड़ पर से कुछ फूल झड़ने लगे।मानो के ऐसा लग रहा था कि जैसे पेड़ उनका स्वागत कर रहा है ।  

पार्वती की इच्छा पर महादेव भी पेड़ के नीचे सुस्ताने लगे। कुछ क्षण पश्चात पार्वती ने महसूस किया कि इस सुगन्धित पेड़ के गन्ध और दुर्ग नीचे कोई दुर्गन्ध भी है। 

भोलेनाथ! मणि और सुगन्धित फूल वाले इस पेड़ के नीचे यह दुर्गन्ध क्यों? यह क्या लीला है प्रभु!’ पार्वती की जिज्ञासु आंखें महादेव को पूछने लगीं। 

‘पार्वती ! यह महुए का पेड़ है। यह सुगन्ध इसके फूलों के कारण है और इन फूलों के पड़े-पड़े सड़ जाने के कारण ही यह दुर्गन्ध पैदा हो रही है।’ 

क्यों महाराज! इन फूलों का कोई उपयोग नहीं है, जो ये पड़े-पड़े सड़ रहे हैं?’ 

नहीं पार्वती। इनकी प्रकृति के कारण इनका उपयोग कोई नहीं करता।’ 

‘भोले बाबा। दुर्गन्ध है तो क्या हुआ। इन पर कृपा कर दीजिए न !  यह पर कितना अच्छा है और इनके फुल भी कितने अच्छे हैं जो खाने में भी स्वादिष्ट लग रहे हैं ।

भोलेनाथ को हमेशा की भांति पार्वती का मान रखना पड़ा। उन्होंने वरदान दे दिया, ‘महुए! आज से तेरे फूल को जंगल, निवासी, गाय, बैल सभी खायेंगे। डोरी (महुए के फल) से तेल भी निकलेगा, जो वनदेवता की पूजा में काम आयेगा। जो इसे सड़ाकर कोसना (मदिरा) बनाकर पीयेगा, उसे भी कुछ देर के लिए आनन्द आएगा, किन्तु उसके मुंह एवं जीवन से भी दुर्गन्ध आयेगी।’ ___ 

पार्वती जी आज गद्गद् थीं। महुए का पेड़ भी। ऐसा माना जाता है कि तब से जंगल के आदिवासी, अमीर-गरीब, गाय, बैल सभी महुए को खाते चले आ रहे हैं और डोरी तेल आज भी गांव में लोगों के लिए बहुत उपयोगी तेल है। तब से ही महुए की शराब पीने वाले को अच्छा नहीं समझा जाता है।

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