Hindi motivational story-परिवारिक कलह

परिवारिक कलह

परिवारिक कलह

Hindi motivational story– किसी नदी के किनारे एक साधु की कुटिया थी। उसमें साधु अपने परिवार के साथ सुख से रहता था। एक दिन उधर से एक चरवाहा अपने जानवरों के साथ गुजर रहा था। उसके जानवरों में कई तरह के जानवर थे। शेर और बकरी भी उसमें थे और सभी बड़े प्रेम से एक-दूसरे के साथ चले जा रहे थे। यह देखकर साधु बड़ा हैरान था। उसने चरवाहे के पास जाकर पूछा- “ये सभी जानवर किस प्रकार से बड़े प्रेम से एक-दूसरे के साथ रहते हैं?” 

चरवाहा बोला- “महाराज, मैंने इनको हिंसा के बारे में कभी भी नहीं बताया और न ही इनको कभी करने का अवसर ही दिया।” चरवाहे ने आगे बताया- “किसी भी जीव के लिए जो आधारभूत आवश्यकताएँ जैसे भोजन, पानी और घर होते हैं, मैंने उनकी कमी नहीं होने दी। सभी की आवश्यकता पूरी करता गया। हिंसा की जरूरत ही नहीं रह गई।” 

बात साधु की समझ में आ गई। परिवार में भी कलह-क्लेश तभी होते हैं, जब अभाव होता है। अतः यदि हम अभावों को खत्म कर दें तो घर में सुख-शांति रहेगी और सभी एक साथ बड़े प्रेम से रह सकेंगे। 

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