Hindi inspirationl story-विनम्रता की महत्ता

Hindi inspirationl story

विनम्रता की महत्ता

Hindi inspirationl story-  एक राजा बहुत अहंकारी था एक  दिन मंत्री ने राजा को बताया कि नगर में बुध पधारे हुए हैं, चलकर उनका स्वागत किया गया।

तभी राजा ने बोला मैं खुद का स्वागत करने क्यों जाऊं मैं इस जगह का राजा हूं सभी लोग मुझसे मिलने आते हैं ना कि मैं किसी के पास जाता हूं। यदि को मिलना ही होगा तो वह स्वयं मेरे माहौल में आना होगा तो आएंगे।

राजा किस बात से मंत्री को बहुत बुरा लगा। मंत्री ने राजा से बोला हे राजन आप राजा है इसलिए सभी आपसे मिलने आते हैं लेकिन हमारे प्राचीन काल से ही संत पुरुष और ऋषि-मुनियों को राजा के ऊपर से पद दिया गया है क्योंकि वह लोग भी पढ़ा जा के श्रद्धा के पात्र होते हैं। इसलिए उनका आदर करना आपके राजा के भी प्रिय पात्र बनेंगे।

राजा बहुत हठी था। उसने पलट कर तुरंत कहा, क्या मैं तुमको प्रजा का दास दिखता हूं जो वह कहे मैं वही करो जो चाहे वही मैं क्या करूं। मेरा मां मैं राजा हूं मैं जो चाहूंगा वही करूंगा।

मंत्री को राजा का इस व्यवहार को देखकर उन्हें उचित नहीं लगा। मंत्री ने तुरंत राजा को अपना त्यागपत्र दे दिया और कहा मैं आपकी सेवा में नहीं ला सकता हूं आपने तनिक भी बड़प्पन नहीं है।

राजा ने कहा मैं अपने बड़प्पन के कारण ही भगवान बुध के स्वागत के लिए नहीं जा सकता हूं। मंत्री ने कहा हे महाराज आप अपने घमंड को बड़प्पन का पद मत दीजिए। लगता है आपको भूत की महानता के बारे में आपको नहीं पता है। बुध भी कभी महान सम्राट के पुत्र थे उन्होंने अपने राज्य का त्याग कर समाज की सेवा के लिए भिक्षु बनना स्वीकार किया। इसका मतलब यह है कि राज्य के मुकाबले उनका त्याग कहीं अधिक बड़ा है।

कहानी का सार यह है कि विनम्रता ही व्यक्ति को बड़ा बनाती है इसके अभाव में व्यक्ति किसी लायक नहीं रह जाता।

राजा इस तर्क को समझ गया और ना उन्होंने बुध को स्वागत करने का बल्कि उनसे दीक्षा भी ग्रहण की।

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