हृदय में दर्द का इलाज: जब सीने में हो दर्द तो अपनाएं ये घरेलू उपाय

हृदय में दर्द का इलाज

हृदय में दर्द का इलाज: जब सीने में हो दर्द तो अपनाएं ये घरेलू उपाय

हृदय में रोग की उत्पत्ति

इस रोग में हृदय के स्थान पर बहुत दर्द होता है तथा नाड़ी तेज चलती है। अधिक मात्रा में प्रतिदिन शराब का सेवन, अधिक दिनों तक दिमाग में चिन्ता, रक्तवाहिनियों की बीमारी, वृक्क रोग, गठिया तथा भारी शरीर आदि इस रोग के प्रमुख कारण हैं। अधिक शारीरिक श्रम, क्रोध एवं आवेश आदि से भी यह रोग हो जाता है।

हृदय में रोग के लक्षण

जब हृदय में तेज दर्द उठता है तो बेचैनी बढ़ जाती है। यह दर्द रात में सोते समय होता है। शुरू में टप-टप की आवाज के साथ दर्द होता है। फिर यह रोग धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि चीर-फाड़ करने का अनुभव होता है। कई बार जलन भी होती है। कभी-कभी उल्टी होने और नाड़ी की गति अनियमित चलने की शिकायत होती है। दिल की धडकन बढ़ जाती है। शरीर में कमजोरी आ जाती है। यह रोग स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों को अधिक होता है। कुछ मामलों में दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोगी की मृत्यु तक हो जाती है।

निर्देश
हृदय में दर्द होने पर रोगी को पूर्ण विश्राम कराएं। भूख लगने पर सादा तथा सुपाच्य भोजन दें।

शराब, भांग, सिगरेट आदि से रोगी को बचाएं।

रोगी को निर्देश दें कि वह चिन्ता तथा तनावपूर्ण जीवन न जिए। प्रत्येक कार्य बड़े धैर्य के साथ करे।

पेट में कब्ज न बनने दें। यदि शौच साफ न आए तो कोई हल्की दवा लेकर पेट साफ करें।

चाय, कॉफी, अधिक परिश्रम, अधिक टी.वी. देखने आदि से बचें।

नित्य सुबह-शाम टहलने का कार्यक्रम बनाएं।

प्रतिदिन 8 घंटे निश्चिन्त होकर गहरी नींद लें।

हृदय में दर्द का  घरेलू निदान

सबसे पहले रोगी को शान्त स्थान पर लिटाएं। उससे कहें कि शरीर में वायु बढ़ गई है। रोगी को ठंड से बचाएं। कपड़ों के बटन खोलकर शुद्ध वायु का संचरण होने दें।

गाय के ताजे दूध में थोड़ी-सी मिश्री, किशमिश तथा शहद मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें।

प्रतिदिन सुबह के समय तीन-चार पिस्ते चबाकर खाएं।

रोज सुबह-शाम दो-दो चम्मच प्याज का रस पिएं।

नित्य आधा गिलास अंगूर का रस पीने से दिल में दर्द, धड़कन आदि कम हो जाती है। दो माह तक सेवन करने से बिल्कुल चली जाती है। यदि अंगूर का मौसम न हो तो दो मुनक्के पानी में पीसकर सेवन करें।

गुलाब के दो फूल में जरा-सी मिश्री मिलाकर चटनी बनाकर कुछ दिनों तक खाएं। अनार के कोमल पत्तों को पीसकर सुबह-शाम चटनी की तरह चाटें।

सेब के मुरब्बे पर चांदी का वरक लगाकर खाएं। यह दिल को शक्ति प्रदान करता है। खून को पतला रखता है तथा थकान कम करता है।

जाड़े के मौसम में एक कप गाजर का रस गरम करके प्रतिदिन एक बार पिएं।

दिल के दर्द में पपीता का पका गूदा बहुत लाभदायक है। यह हृदय को शक्ति भी देता है।

यदि दिल में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो तो सूखे धनिये में मिश्री मिलाकर सेवन करें।

सेब का मुरब्बा दिल को ताकत देता है

सूखे आंवले को पीसकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण में जरा-सी मिश्री मिलाकर लें।

1 चुटकी सफेद इलायची का चूर्ण थोड़े-से शक्कर के साथ प्रयोग करें।

5 ग्राम पके हुए बेल के गूदे में 5 ग्राम दूध की मलाई मिलाकर नित्य सेवन करें।

यदि घबराहट या दिल में दर्द हो तो सादे पानी में एक नीबू निचोड़कर पी जाएं। रोज नियमित रूप से 15 दिनों तक नीबू-पानी पीने से काफी लाभ होता है।

250 ग्राम टमाटर का रस निकालकर उसमें 1 माशा अर्जुन की छाल मिलाकर पिएं।

 हृदय में दर्द का आयुर्वेदिक चिकित्सा

अभ्रक भस्म 1-2 रत्ती, शृंग भस्म 2 रत्ती, रस सिंदूर 2 रत्ती तथा वृहत् कस्तूरी रस 2 रत्ती-सबको शहद में मिलाकर प्रतिदिन चटाएं।

अर्जुन चूर्ण तथा अर्जुनारिष्ट का प्रयोग कराएं।

यदि हृदय में तेज दर्द हो तो मल्ल चन्द्रोदय 2 रत्ती, अभ्रक भस्म 2 रत्ती तथा पान का रस आधा चम्मच सबको शहद में मिलाकर चटाएं।
हृदयार्णव रस 1 रत्ती, मुक्ता पिष्ठी 1 रत्ती तथा अर्जुन क्षीर-तीनों को मक्खन में मिलाकर दें। । हृदय पर उष्ण विष्णु तेल की मालिश धीरे-धीरे करें।

सिद्ध मकरध्वज (स्वर्ण कस्तूरी युक्त) आधा रत्ती, शृंग भस्म 2 रत्ती, जवाहर मोहरा 1 रत्ती तथा संजीवनी वटी 2 रत्ती-सबको मिलाकर खरल में घोट लें। इस तरह की तीन मात्राएं बनाकर प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम को शहद के साथ चाटें।

 हृदय में दर्द का होमियोपैथिक चिकित्सा

यदि दिल में दर्द तथा तेज धड़कन हो तो कैल्केरिया आर्स का सेवन करें।

छाती की धड़कन या दर्द के लिए साइक्यूटा अच्छी दवा है। 9 यदि नाड़ी तेज चले, रक्तहीनता के कारण छाती में धड़कन तथा तेज दर्द हो तो फेरम मेट लें।

यदि साधारण उत्तेजना के कारण दिल की धड़कन बढ़ जाए और दर्द हो तो एमिल नाइट्रेट दें। 

छाती में तेज दर्द, कम्पन, एन्जाइना पेक्टोरिस, शरीर बुरी तरह हिले आदि लक्षणों में हिमटाक्साइलन लें।

हृदय में कम्पन, दर्द, सामान्य उत्तेजना से छाती में दर्द, बहुत कमजोरी आदि लक्षणों में हिमटाक्साइलन तथा आर्सेना-दोनों दवाएं मिलाकर प्रयोग करें।

घूमने-फिरने या सामान्य परिश्रम करने के बाद अथवा छत पर चढ़ने-उतरने के कारण हांफी आदि लक्षणों में लारोसिरेसस का सेवन करें।

यदि भोजन करने के बाद अचानक छाती में दर्द हो तो लाइकोपोडियम दें।

दर्द के कारण छाती को दबाकर बैठने की इच्छा में आयोडियम लें।

अगर छाती में रक्त-संचालन ठीक न होने के कारण दर्द हो तो फॉस्फोरस का सेवन करें।

यदि हृदय में सूई चुभने जैसा दर्द हो तो लोबेलिया पर्प का प्रयोग करें।

हृदय में दर्द का  बायोकैमिक चिकित्सा

यदि अधिक मेहनत, उत्तेजना, अप्रसन्नता, क्रोध, स्नायुमंडल की बीमारी, भय, परिश्रम, शोक, हस्तमैथुन आदि की वजह से दिल में दर्द हो तो फेरम फॉस 6x और कैल्केरिया फॉस 6x-दोनों दवाओं को मिलाकर दें।

पेट में अफरा, दिल में धड़कन, दर्द, दौरा पड़ने जैसी हालत, दिल में तेज ऐंठन आदि लक्षणों में मैगनेशिया फॉस 6x प्रयोग करें।

रक्त के अधिक बढ़ने से दिल की गति बढ़ जाए, दिल में दर्द, मूर्छा, दिल के स्थान पर ठंडक-सी मालूम पड़े आदि लक्षणों में फेरम फॉस 6x तथा कॉलि म्यूर 6x-दोनों मिलाकर दें।

कूल्हे में दर्द, बढ़ते-बढ़ते छाती में दर्द, कमजोरी, नाड़ी-गति में तीव्रता, रोगी को शोर अच्छा न लगे आदि लक्षणों में कॉलि सल्फ 6x का सेवन करें।

दिल के हर प्रकार के रोग के लिए कॉलि फॉस 3x, फेरम फॉस 3x, कॉलि म्यूर 3x, नैट्रम म्यूर 3x, नैट्रम फॉस 3x तथा साइलीशिया 12x का प्रयोग करें।

दिल में दर्द के लिए फेरम फॉस 12x, कॉलि म्यूर 3x तथा नैट्रम म्यूर 3x-तीनों मिलाकर दें।

हृदय में दर्द का चुम्बक चिकित्सा

चुम्बक चिकित्सा में दिल का दर्द समाप्त करने की प्राकृतिक शक्ति है। इसके लिए हृदय के बीच में मध्यम शक्ति वाले चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव रखें। चुम्बक 20-25 मिनट तक रखना चाहिए।

बाएं हाथ में अंगूठे के पास कम शक्ति वाले चुम्बक का उत्तरी ध्रुव लगाना चाहिए। चुम्बक को 20 मिनट तक बराबर चिपकाए रखें।

माथे पर चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव 15 से 30 मिनट तक रखना चाहिए।

चुम्बक द्वारा प्रभावित आधा-आधा कप पानी दिनभर में तीन-चार बार पिएं।

हृदय में दर्द का एक्यूप्रेशर चिकित्सा

हृदय के प्रत्येक रोग में बाएं पैर के तलवों में तीन-चार बार दबाव दें।

बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली के नीचे हथेली पर दबाव बनाएं।

बाएं पैर के अंगूठे के पास भी दबाव दें।

हृदय में दर्द का  एलोपैथिक चिकित्सा
एल्परैक्स (Alprax), एलजोलम (Alzolam) या ट्रिका (Trika) अपने डॉक्टर से पूछकर लें। ये सब दवाएं दिल की तेज धड़कन को सामान्य बनाती हैं तथा हृदय शूल में भी लाभदायक हैं।

प्रसिद्ध फार्मेसियों की पेटेन्ट दवाएं

हिमालय- नारडिल गोली, अबाना गोली।

मार्तण्ड –लशुनौल गोली।

बुन्देलखंड-अर्जुन सूचीवेध।

डाबर-मकरध्वज वटी, अश्वगंधा चूर्ण।

गुरुकुल कांगड़ी- जवाहर मोहरा, माणिक्य वटी, अकीक भस्म।

हमदर्द- दवाउल मिस्क मोतदिल जवाहर वाला, अर्क अम्बर, असरोफोन।

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