हवाई जहाज(वायुयान) की ऊंचाई कैसे ज्ञात की जाती है? 

हवाई जहाज(वायुयान) की ऊंचाई कैसे ज्ञात की जाती है? 

वायुयान की ऊंचाई कैसे ज्ञात की जाती है? 

हवाई जहाज(वायुयान) की ऊंचाई कैसे ज्ञात की जाती है उड़ते हुए वायुयान का वेग मापने के लिए काम में आने वाले यंत्र को ‘ऊंचाई मापक’ कहते हैं। वायुयान में काम आने वाले ऊंचाई मापक यंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं। प्रथम प्रकार का वायुदाबमापी यंत्र होता है। यह बढ़ती ऊंचाई के साथ घटने वाले दाब को मापता है।

यह एक प्रकार का निद्रव बैरोमीटर होता है, जिसमें धातु से बनी एक छोटी डिबिया होती है, उसमें से वायु बाहर निकाल दी जाती है। उसमें फैलने वाली और सुकड़ने वाली धौंकनी लगी होती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ जैसे-जैसे वायुदाब में परिवर्तन होता है, इसी के अनुरूप धौकनियां फैलती और सिकुड़ती हैं। 

How is the height of an aircraft determined

धौकनी का फैलना और सिकुड़ना विभिन्न यांत्रिक प्रक्रमों द्वारा यंत्र के डायल पर लगे संकेतक को घुमाता है। संकेतक की डायल पर स्थिति से वायुयान की ऊंचाई ज्ञात करने के दूसरे तरीके के अंतर्गत रेडियो ऊंचाई मापक यंत्र से वायुयान द्वारा रेडियो तरंगों को धरती पर भेजा जाता है। ये तरंगें जमीन से टकराकर परावर्तित होती हैं।

वायुयान की ऊंचाई कैसे ज्ञात की जाती है? 

वायुयान में लगा रिसीवर इन परावर्तित तरंगों को प्राप्त कर लेता है। तरंगों द्वारा यान से धरती तक और धरती से वापस यान तक आने और जाने में लगे समय को ज्ञात कर लिया जाता है। इस समय को आधा करके रेडियो तरंग के वेग से गुणाकर हवाई जहाज की ऊंचाई ज्ञात हो जाती है। मापक यंत्र को हिप्सोमीटर कहते हैं। इसमें द्रव के क्वथनांक को मापा जाता है। ऊंचाई मापी यंत्र वायुयानों के नियंत्रण और पथप्रदर्शन के लिए बहुत ही उपयोगी यंत्र है।

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