सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां-लालच बुरी बला

सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां

सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां-लालच बुरी बला

बुद्धिवर्धक कहानियां-समझ को तराशने वाला अनूठा कहानी

काफी समय पहले की बात है। किसी नगर में एक सेठ हीरालाल रहता था। उसके पास दौलत की कोई कमी नहीं थी। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। 

एक बार व्यापार के सिलसिले में सेठ हीरालाल परदेश जा रहे थे। बीच में उनको एक नदी पार करनी थी। सेठ जी के पास सोने की अशर्फियों से भरी छोटी सी पेटी भी साथ थी। सेठ जी 20-25 सवारियों से भरी नाव में बैठकर नदी पार कर ही रहे थे कि नाव डगमगाने लगी और उनसे अशर्फियों से भरी पेटी छूटकर नदी में जा गिरी। 

सेठ जी ने सवारियों से उसे निकाल लाने को कहा, परंतु उस बहती नदी में कूदने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। लेकिन सेठ जी को तो वह पेटी चाहिए ही थी। सबसे पहले उन्होंने पेटी लाने वाले के लिए एक सौ एक रुपये के पुरस्कार की घोषणा की। धीरे-धीरे इनाम की राशि एक हजार तक पहुंच गई। आखिर एक आदमी तैयार हुआ। लेकिन उसने एक शर्त रख दी कि पेटी लाने के बाद मैं उसे खोलकर देखूगां , कि उसमें क्या है? फिर जो मुझे अच्छा लगेगा वह मैं आपको दूंगा। कहिए, मेरी शर्त मंजूर है?” 

सेठ जी ने सोचा कि थोड़ी देर और कर दी तो पेटी पानी के वेग में बह जाएगी। यदि उसमें से कुछ बचता है तो क्या हर्ज है? उन्होंने उस आदमी की शर्त मान ली। वह आदमी सचमुच साहसी था। वह तुरंत नदी में गोता लगा गया और नदी के तल में बैठी पेटी को उठा लाया। सेठ ने पेटी देख राहत की सांस ली। उस पेटी में क्या है? यह देखने के लिए नाव की सभी सवारियां उत्सुकता से उसे देखने लगीं। शर्त के मुताबिक जब उस आदमी ने पेटी खोली तो उसमें सोने की अशर्फियां भरी थीं। शुरू में तो उस आदमी को लगा कि पांच-सात अशर्फियां अपने पास रखकर शेष अशर्फियां वह सेठ को लौटा दे। लेकिन तभी उसे अपनी शर्त याद आ गई कि जो मुझे अच्छा लगेगा वह मैं आपको दंगा। उस आदमी को लगा कि ऐसे में क्यों  न वह सारी अशर्फियां रख ले और सिर्फ खाली पेटी ही सेठ को लौटा दे। 

और सचमुच उस आदमी ने खाली पेटी ही सेठ जी को लौटा दी। यह देख सेठ दंग रह गया। उसने कहा खाली पेटी रखकर मैं क्या करूंगा। कुछ अशर्फियां रखकर बाकी तो मुझे दे दो। उस आदमी ने सेठ को शर्त की याद दिलाई कि जो मुझे अच्छा लगेगा वहीं मैं आपको दूंगा और अब यह खाली पेटी मैं आपको दे रहा हूं। सेठ ने अंत में यह भी कहा कि आधी अशर्फियां तुम रख लो और आधी मुझे लौटा दो। लेकिन लोगों के समझाने पर भी वह आदमी माना नहीं। तब न्याय के लिए लोग राजा के पास जाने के लिए तैयार हो गए। 

राजा ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और उनके बीच हुई शर्त अक्षरश: लिखवा दी। फिर राजा ने उस आदमी से पूछा, “जब तुमने वह पेटी खोली तो उसमें क्या था?” 

“जी, सोने की अशर्फियां थीं।” “तुम्हें यह अशर्फियां अच्छी लगती हैं?” राजा ने पूछा। 

“जी, जी बहुत अच्छी लगती हैं। यही कारण है कि मैं इन अशर्फियों को अपने पास रखना चाहता हूं और चाहता हूं कि खाली पेटी सेठ रख लें। परंतु वे इस खाली पेटी को रखना ही नहीं चाहते।” 

“तुम अपनी शर्त एक बार फिर मुझे सुनाओ।” “यही कि जो मुझे अच्छा लगेगा, वही मैं सेठ हीरालाल को दूंगा।” 

“तो ये अशर्फियां तुम्हें अच्छी लग रही हैं, इसलिए उन्हें तुम सेठ हीरालाल को क्यों नहीं दे देते।” राजा की बात सुनकर उस आदमी को लगा कि वह अपने ही जाल में फंस गया है। अब वह आधी अशर्फियां लेने को तैयार हो गया। तब राजा ने कहा, “यह नहीं होगा। तुम्हें अपनी शर्त का पालन करना ही होगा। खाली पेटी अब तुम्हें ही मिलने वाली है। चाहो तो रख लो या फेंक दो।” 

आखिर राजा के न्याय के मुताबिक अशर्फियां सेठ हीरालाल को मिल गई और उस आदमी को खाली पेटी रखनी ही पड़ी। चूंकि वह अपनी शर्त खुद ही हार चुका था। यदि वह लालच न करता तो आधी अशर्फियों का तो मालिक बन ही गया होता। 


Social enlightening stories – greed and evil

Intelligent stories – unique story shaping understanding

It was a long time ago. There lived a Seth Hiralal in a city. He had no shortage of wealth. His business was spread far and wide.

Once in connection with trade, Seth Hiralal was going to Pardesh. In between they had to cross a river. Seth ji also had a small box full of gold ashfaris. Seth ji was crossing the river sitting in a boat full of 20-25 riders that the boat started to waver and after leaving the box full of Ashrafis fell into the river.

Seth ji asked the riders to take him out, but no one was ready to jump into that flowing river. But Seth ji wanted that box. First he announced a prize of one hundred and one rupees for the boxer. Gradually the amount of the reward reached one thousand. Finally a man was ready. But he put a condition that after bringing the box, I will open it and see what is in it? Then I will give you what I like. Say, my condition is acceptable? “

Seth ji thought that if we do something else, the box will flow in the velocity of water. If there is anything left then what is the harm? They accepted the man’s condition. The man was truly courageous. He immediately dived into the river and lifted the box sitting at the bottom of the river. Seth took a sigh of relief after seeing the thong. What’s in that box? To see this all the riders of the boat began to look at him eagerly. According to the condition, when the man opened the box, he was filled with gold ashes. Initially, the man felt that by keeping five-seven Ashurfis with him, he should return the remaining Ashfaris to Seth. But then he remembered his condition that I will riot you what I like. That man felt that in such a situation why should he not keep all the Ashurfis and only Sethi should return to Seth.

And indeed the man returned Sethji on an empty stomach. Seth was stunned to see this. He said what would I do with an empty box. Keep some Ashrafiya and give the rest to me. The man reminded Seth that I would give you whatever I liked and now I am giving you this empty box. In the end Seth also said that you keep half the Ashurfian and return half of me. But even after convincing people, that man is not considered. Then the people agreed to go to the king for justice.

The king listened to both sides and got the condition written between them literally. Then the king asked the man, “When you opened the box, what was in it?”

“Yes, there were gold Ashfaris.” “Do you like these Ashurfis?” The king asked.

“Gee, ji looks great. That’s why I want to keep these asharfis with me and want to keep Seth empty. But they don’t want to keep this empty thong.”

“You tell me your bet once again.” “That’s what I like, I will give to Seth Hiralal.”

“So these Asharfis are looking good on you, so why don’t you give them to Seth Hiralal.” Hearing the king’s words, the man felt that he was trapped in his own web. Now he agreed to take half the Ashurfian. Then the king said, “This will not happen. You will have to follow your condition. Now you are going to get an empty box. If you want, keep it or throw it away.”

After all, according to the justice of the king, Ashrafian got to Seth Hiralal and the man had to keep an empty box. Since he had lost his bet on his own. Had he not been tempted, he would have become the owner of half the Ashurfis.