सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां-राजकुमार की बुद्धिमानी 

सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां-राजकुमार की बुद्धिमानी 

सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां-राजकुमार की बुद्धिमानी 

बुद्धिवर्धक कहानियां-समझ को तराशने वाला अनूठा कहानी

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में तीन भाई रहते थे। वे तीनों झूठे किस्से गढ़ने के लिए कुख्यात थे। जो भी उनकी कहानी सुनता, असंभव कहे बिना न रहता। एक बार तीनों भाई यात्रा कर रहे थे। रास्ते में रात बिताने के लिए उन्होंने एक सराय में डेरा डाला। वहां एक राजकुमार भी ठहरा हुआ था। उसने न केवल कीमती लिबास पहना हुआ था, बल्कि हीरे-जवाहरातों से भी लदा हुआ था। उन भाइयों ने कभी किसी राजकुमार को नहीं देखा था, इसलिए उनको बड़ी ईर्ष्या हुई। उन्होंने सोचा क्यों न अपनी कहानियों से राजकुमार को बेवकूफ बनाया जाए। 

उन लोगों ने मिलकर राजकुमार को घेर लिया और कहा, “क्यों न हम लोग एक-एक कहानी सुनाकर शाम बिताएं।” 

राजकुमार को यह बात पसंद आई। तत्काल एक भाई ने कहा और जो भी की कहानी पर विश्वास न करेगा, वह सुनाने वाले का दास बन जाएगा। सराय के एक बुजुर्ग को उन लोगों ने अपना जज बनाया। उन्हें विश्वास था कि उसकी बेतुकी और झूठी कहानी को सुनकर राजकुमार अवश्य इनकार करेगा और इस प्रकार वह उसे दास बनने या फिर सभी कीमती वस्तुएं उनके हवाले करने को कहेंगे। 

सभी लोग उसके इर्द-गिर्द बैठ गए। सबसे पहले बड़ा भाई उठा और उसने कहानी सुनानी आरंभ की, “जब मैं छोटा था, एक दिन बाग में चोर सिपाही खेलते हए एक ऊंचे.पेड़ पर चढ़कर छुप गया। मेरे भाई मुझे ढूंढ़ते रहे। इस प्रकार सांझ हो गई। वे लोग थक कर चले गए। तब मैंने नीचे उतरने की सोची, पर अंधेरा फैल चुका था। और पेड़ काफी ऊंचा था। मुझे खतरे का आभास हुआ पर मुझे पता था कि रस्सी के सहारे नीचे उतरा जा सकता है। इसलिए मैं गया और निकटवर्ती झोंपड़े से एक रस्सी ली और उसके सहारे सुरक्षापूर्वक नीचे उतरा और घर का रास्ता लिया।” 

इस बेतुकी कहानी को सुनकर राजकुमार ने कुछ न कहा और मुस्कराकर दूसरे भाई की कहानी सनने के लिए तैयार हो गया। उन भाइयों को बड़ा विस्मय हुआ कि राजकुमार ने बड़े भाई की ऊल-जलूल कहानी का विश्वास कैसे कर लिया। 

अब दूसरे भाई ने कहानी आरंभ की, “पर उस दिन जब भाई साहब हम लोगों से छुपकर पेड़ पर बैठे थे और हम उन्हें दंढते फिर रहे थे तो मैंने झाड़ियों में कुछ सरसराहट सुनी। मैं समझा, भाई वहां छुपा है। मैं उस तरफ गया, पर झाड़ी खतरनाक भूखा शेर प्रकट हआ। उसने अपना जबडा खोला ही था कि मैं  एक छंलाग में उसके पेट के अंदर पहुंच गया। मैंने इतनी तेजी से वह सब किया शेर मुझ चबा न सका। इधर मैंने शेर के पेट में वह धमाचौकडी मचाई कि शेर पेट दर्द से तड़प उठा और उसने मझे इतनी ताकत से उगल फेंका कि मैं सौ गज दूर अपने गांव के बीच आकर गिरा। मैं धूल झाड़ते हुए खड़ा हो गया। इस प्रकार मैंने सारे गांव को मुक्ति दिलाई, क्योंकि मुझसे डरकर उस शेर ने दोबारा हमारे गांव की ओर मुख नहीं किया।” 

इस कहानी को सुनकर भी राजकुमार चुप रहा और उसने मुस्कराकर तीसरे भाई की ओर देखा। सबसे छोटे भाई ने घबराकर अपनी कहानी आरंभ कर दी, “एक दिन मैं दरिया के किनारे टहल रहा था। देखा, सभी मछेरे मुंह लटकाए चुपचाप दरिया की ओर देख रहे हैं। मैंने उदासी का कारण पूछा, तो पता चला कि उन्हें सप्ताह भर से कोई शिकार नहीं मिला है और उनका परिवार भूखा है। 

मैंने उनकी मदद करने की ठानी और कारण मालूम करने के लिए दरिया में कूद पडा। मै कुछ ही दूर गया था कि देखा एक दैत्याकार मछली ने सभी मछलियों को समाप्त करा दिया है और कुछ उसके भय से नीचे तह में छुपती फिर रही हैं। मैंने तत्काल एक मछली का रूप धारण किया और उस दैत्याकार मछली की ओर बढा। वह मेरा पीछा करती किनारे पर आ गई. जहां सभी मछेरे हथियार लिए उसकी प्रतीक्षा में थे

 सभी ने मिलकर हमला किया और दैत्याकार मछली को मार डाला। मन प्रसन्न होकर अपनी शक्ल बदली और इंसानी हुलिए में आ गया। सारे गांव वाले बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने मुझे बहुत बड़ी रकम पुरस्कार के रूप में देकर विदा किया।” 

अंतिम कहानी सुनकर भी जब राजकुमार ने कुछ न कहा, तो तीनों भाई बड़े सकपकाए पर उन्होंने इशारों में एक दूसरे समझा दिया कि वे भी राजकुमार का कहानी पर आपत्ति न करें और जो भी वह सुनाए विश्वास कर लें। 

राजकुमार ने अपनी कहानी आरंभ की, “मैं एक राजकुमार हूं। मेरी जायदाद की कोई सीमा नहीं है। मैं अपने तीन दासों को ढूंढ़ने निकला हूं, जो राजमहल से फरार हो गए हैं। मुझे वे दास बहुत प्रिय भी थे इसलिय मैं स्वयं उनकी खोज में भटक रहा । मैं एक प्रकार से निराश हो चका था कि आज अचानक तीनो से मुठभेड़ हो गई। अब मेरी खोज समाप्त हुई, क्योंकि मुझे मेरे खोए हुए दास मिल गए हैं और जानते हो कि वे दास कौन हैं-तुम तीनों।” 

राजकुमार की बात सुनकर तीनों भाई जड़वत रह गए। वे बुरी तरह फस गए। अगर राजकुमार की कहानी का विश्वास करें, तो मानो वे दास हैं और इनकार करते हैं तो भी वे बाजी हारकर दास माने जाएंगे। वे लोग राजकुमार की चालाकी से बहत घबराए। उनके जज ने निर्णय सुनाया कि तीनों भाई बाजी हार गए हैं और वे लोग राजकुमार के दास बन जाएं। 

उनकी हालत देखकर राजकुमार को हंसी आ गई और उसने उन धूर्त भाइयों को इस शर्त पर क्षमा कर दिया कि भविष्य में वह गांव के सीधे-साधे लोगों को अपनी झूठी कहानियों के जाल में नहीं फंसाएंगे। तीनों ने वचन दिया और कसम खाकर प्राण बचाए। उस दिन के बाद किसी ने उन भाइयों को झूठी कहानी सुनाते हुए नहीं सुना।

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