ज्ञानवर्धक कहानियां-धोखे की सजा 

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बुद्धिवर्धक कहानियां-समझ को तराशने वाला अनूठा कहानी

किसी गांव में गंगाधर नाम का मक्कार बनिया रहता था। उसे झूठा अभिमान करने वह, दूसरों को धोखा देने तथा उन्हें कष्ट में देखकर खुश होने की बुरी आदत थी। वह प्रायः ऐसी हरकतें करता रहता था जिससे लोगों दुःख होता था। गांव के लोग बहुत भोले थे, वे गंगाधार के झांसे में अकसर मुसीबत में फंस जाते थे। जब मुसीबत में होते तो वह उनके साथ झूठी सहानुभूति जताकर  उन्हें अपने पक्ष में करने की चेष्टा करता रहता था। 

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एक बार गंगाधर राजधानी में गया और काफी दिन बाद लौटकर गांव आया। ही में जमीन का एक सौदा करके उसने काफी धन कमाया था। उसने गांव को रुपयों की पोटली दिखाकर कहा कि इतना धन वह राज दरबार में हवेचकर लाया है। अगर तुम लोगों में से कोई राजा के दरबार में अच्छी नस्ल कत्ते ले जा सके तो राजा तुम्हें काफी धन और सोना दे सकता है। 

गंगाधर की इस बात को कुछ लोगों ने तो नहीं माना, लेकिन अधिकांश लोगों के मन में धन कमाने की लालसा जाग गई। दीनू नाम के एक गरीब किसान ने तो यह निश्चय कर लिया कि वह इधर-उधर से अच्छी नस्ल के कुत्ते ले जाकर दरबार में अवश्य बेचेगा और अपनी गरीबी दूर करने का प्रयास करेगा। किंतु समस्या यह थी कि दीन के पास इतना भी धन नहीं था कि वह बीस-पच्चीस कुत्ते खरीद सके।

 कत्तों के जरिए धन कमाने की बात जब दीनू ने अपनी घरवाली को बताई तो उसने सुझाया कि उन्हें अपने खेत के बैलों की जोड़ी को बेचकर कुत्ते खरीद लेने चाहिए। दीनू ने ऐसा ही किया। उसने अपने बैलों की जोड़ी, जिसकी परवरिश भी वह मुश्किल से कर पा रहा था, बेच दी और उससे जो पैसे मिले उससे पच्चीस कुत्ते खरीदकर उन्हें बेचने के लिए राजदरबार की ओर चल पड़ा। 

राजा के दरबानों ने दीनू को राजमहल के रास्ते में ही रोक लिया। उसे बताया कि यहां कुत्ते नहीं खरीदे जाएंगे। दीन को यह जानकर घोर निराशा हई। उसने राजा क लोगों से कहा कि मैंने अपने खेत के बैलों की जोड़ी बेचकर कुत्ते खरीदे थे। अगर मेरे कुत्ते नहीं बिके तो मैं बरबाद हो जाऊंगा। परंत उसकी मजबरी पर किसी शाम तक किसी ने उस पर पर घमने निकला तो उसने ने ध्यान नहीं दिया।

इस पर दीनू ने अपने कुत्तों को महल केस नीचे खड़ा कर दिया तथा स्वयं जोर-जोर से रोने लगा। शाम तक ध्यान नहीं दिया। संयोग से शाम के समय राजा छत पर घमने कि दीन को रोते देख लिया और उसे महल में बुला भेजा। दीन ने मोर “महाराज, रूपगढ़ गांव के बनिये गंगाधर ने मुझसे कहा था कि आप खरीदकर काफी धन तथा सोना देंगे। अत: मैंने अपने बैलों की जोडी बेन खरीद लिए और आपके दरबार तक ले आया।” 

राजा चतुर और दयालु था। उसे यह समझने में देर नहीं लगी कि गंगाधर कोई मक्कार आदमी है जिसने भोले-भाले दीनू के साथ धोखा करके उसे मसीबत में डाल दिया है। अतः दीनू को सांत्वना देते हुए राजा ने कहा, “घबराओ नहीं हम तुम्हारे कुत्ते अवश्य खरीदेंगे।” राजा ने दीनू के सभी कुत्ते खरीदकर उसे ढेर सारा धन और सोना दिला दिया। 

दीनू खुश होता हुआ गांव लौट आया और सबसे पहले उसने गंगाधर को ही इसकी सूचना दी। बोला, “भाई जी, आपने मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है कि मुझे कुत्ते बेचकर धन कमाने की युक्ति बताई। देखो, राजा ने मुझे कितना सारा धन और सोना दिया है।” 

दीनू के पास इतना धन और सोना देखकर गंगाधर के पांव तले से जमीन खिसक गई। उसने सोचा-मैंने तो इसे धोखा देने और बेवकूफ बनाने के लिए ऐसा कहा था। यह तो कुत्ते बेचकर सचमुच खुशहाल हो गया। इससे पहले कि लोगों को इसकी जानकारी हो, मुझे कुत्ते बेचने के लिए राजा के दरबार में पहुंच जाना चाहिए। गंगाधर ने मुंह देखी खुशी जाहिर करके दीनू को विदा किया। 

अपनी संपत्ति को कई गुना करने के चक्कर में गंगाधर ने दो ही दिनों में अपनी जमीन-जायदाद-सोना-चांदी और दूसरा सामान बेचकर नकदी प्राप्त की और उसने सैकड़ों कुत्ते खरीद लिए। कुत्तों की संभाल के लिए भाड़े के कुछ मजदूर साथ लिए और उन्हें बेचने के लिए राजमहल पहुंच गया। 

दरबानों ने उसे भी राजमहल के द्वार पर ही रोक दिया और बताया कि यहां कुत्ते नहीं खरीदे जाएंगे। गंगाधर विशेष रूप से उत्साहित तो था ही, कुत्ते न खरीदने की बात और अंदर जाने से रोकने के मसले को लेकर वह दरबानों पर चीखने चिल्लाने लगा। उसने कई राहगीरों को भी इकट्ठा कर लिया। भीड़ देखकर कुत्ते भी भौंकने लगे। राजमहल के सामने भारी शोर-गुल होने लगा। अतः राजा भी छत पर आ गया। 

राजा ने मामले की जानकारी करके गंगाधर को महल में बुला भेजा। गंगाधर ने प्रार्थना की , “महाराज मैं आपकी सेवा में खरीद हेतु विभिन्न प्रकार के सैकड़ों कुत्ते लाया हूं।” 

राजा ने कहा, “ठीक है, लेकिन अपनी जरूरत के कुत्ते तो हम पहले ही खरीद चुके हैं। इसलिए अब तुम इन्हें वापस ले जा सकते हो।” 

गंगाधर राजा के सामने बहुत गिड़गिड़ाया। परंतु उसकी मंशा पहचानकर ने एक न सुनी। मजबूरन उसे कुत्तों के साथ मुंह लटकाकर उल्टे पांव लौटना अपनी मजदूरी नहीं मिलने के कारण उसके साथी भी कुत्तों को छोड़कर भाग उसके कत्ते भी रास्ते में जंगलों में भाग छूटे। गंगाधर का धन कमाने का सपना टूट कर बिखर गया। 

रास्ते में अकेले चलते हुए उसने सोचा, अपने धन को कई गुना करने की फिराक में मेरा अपना धन भी गया। दूसरों के साथ धोखा करने के कारण मुझे यह सजा मिली है। मुझे लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना बंद करके अपने स्वभाव में परिवर्तन लाना चाहिए। उसने संकल्प लिया कि भविष्य में वह किसी को परेशान नहीं करेगा और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करेगा।

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