जीएसटी पर निबंध | GST Essay in Hindi

जीएसटी पर निबंध

जीएसटी पर निबंध | GST Essay in Hindi | जीएसटी : एक राष्ट्र – एक बाजार – एक कर 

जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर की अवधारणा एक राष्ट्र, एक बाजार एवं एक कर से अभिप्रेत है। यह एक राष्ट्र, एक कर’ (On Nation, One Tax) की अवधारणा को इस प्रकार स्थापित करता है कि इसके लागू होने से पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो जाता है। फलस्वरूप एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर की कड़ियां परस्पर जुड़ जाती हैं, जिसका लाभ देश की जनता को मिलता है और उसे दोहरे कराधान से राहत मिलती है। जीएसटी को एक अप्रत्यक्ष (Indirect) और एकीकृत (Integrated) कर ढांचे के रूप में निरूपित किया जाता है और इसमें अधिकांश अप्रत्यक्ष कर समाहित रहते हैं। अर्थशास्त्रियों द्वारा इसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है-“जीएसटी एक व्यापक, बह-स्तरीय, गंतव्य आधारित कर है, जो प्रत्येक मूल्य के जोड़ पर लगाया जाता है।” यहां ‘बहुस्तरीय से अभिप्राय उन विभिन्न स्तरों से है, जो वस्तु के निर्माण से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने में चरणवार देखने को मिलते हैं, जबकि गंतव्य आधारित शब्द समूची निर्माण शृंखला को व्यक्त करता है। वस्तु के निर्माण के सभी स्तरों और पूरी निर्माण शृंखला के दौरान होने वाले सभी लेन-देन पर जो मूल्य संवर्धन होता है, उसी पर जीएसटी लगाया जाता है। 

भारत में भले ही 30 जून-1 जुलाई, 2017 की मध्य रात्रि से ‘एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर’ की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए जीएसटी को प्रभावी बनाया गया, किंतु इसकी पृष्ठभूमि कई वर्ष पहले ही तैयार होनी शुरू हो चुकी थी। सर्वप्रथम वर्ष 2002 में इसका सुझाव केलकर कार्यबल (Kelkar Task Force) द्वारा दिया गया, जो कि अप्रत्यक्ष कराधान पर गठित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2006-07 के बजट भाषण में तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम द्वारा न सिर्फ जीएसटी की पैरोकारी की गई, बल्कि इसे 1 अप्रैल, 2010 से लागू किए जाने की संभावना भी जताई गई। इसके बाद एक लंबी यात्रा तय करने के बाद (जिसमें संविधान का संशोधन भी शामिल है) भारत में जीएसटी की अवधारणा मूर्त रूप ले पाई। 

“यह ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (On Nation, One Tar) की अवधारणा को इस प्रकार स्थापित करता है कि इसके लागू होने से पूरा देश एकीकृत बाजार में तब्दील हो जाता है। फलस्वरूप एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर की कड़ियां परस्पर जुड़ जाती है, जिसका लाभ देश की जनता को मिलता है और उसे दोहरे कराधान से राहत मिलती है।” 

जीएसटी को लागू किए जाने से ‘एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कर’ की अवधारणा साकार हुई है, क्योंकि इसके तहत केंद्र और राज्यों के अप्रत्यक्ष करों को मिलाकर उन्हें एकल कर का स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे एक समान राष्ट्रीय बाजार का मार्ग प्रशस्त हआ है। यानी ‘एक राष्ट्र, एक कर’ से ‘एक बाजार’ भी जुड़ गया, जिसे देशवासियों के लिए लाभकारी स्थिति माना जा रहा है, क्योंकि इससे दोहरे कराधान से बचत होगी। यहां यह जान लेना उचित रहेगा कि जीएसटी ने जिन केंद्रीय करों का स्थान लिया है, वे हैं-केंद्रीय उत्पाद शुल्क, उत्पाद शुल्क (औषधीय एवं प्रसाधन उत्पाद), अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्त्व की वस्तुएं), अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (वस्त्र एवं वस्त्र उत्पाद), अतिरिक्त सीमा शुल्क, विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क (एसएडी), सेवा कर तथा वे उपकर और अधिभार, जो वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं। इसी क्रम में जीएसटी में जिन राज्य करों को सम्मिलित किया गया है, वे हैं-राज्य वैट, बिक्री कर, खरीद कर, विलासिता कर, सभी तरह के प्रवेश कर, मनोरंजन कर, विज्ञापनों पर कर, लॉटरियों, सट्टेबाजी व जुए पर लगने वाले कर तथा राज्यों के वे उपकर और अधिभार, जो वस्तओं अथवा सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं। इस तरह एक एकीकत कर ढांचा तैयार किया गया है, जो कि ‘एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर’ की संकल्पना को साकार कर रहा है। 

जीएसटी को मूर्त रूप देने के बाद इसे सुव्यवस्थित एवं सगम बनाने के प्रयास भी किए गए हैं। जहां अलग-अलग श्रेणियों के करदाताओं को अलग-अलग निर्दिष्ट तिथियों तक इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिटर्न भरने की व्यवस्था की गई है, वहीं कर अदायगी के लिए करदाताओं को अनेक विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं। यथा | इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड तथा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी)/रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) आदि। जीएसटी के लिए पंजीकरण, भुगतान और रिटर्न संबंधी | सेवाओं को सुगम बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत एक निजी कंपनी के रूप में ‘वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) का गठन किया गया है, जिसने (जीएसटीएन) 34 आईटी, आईटीईएस तथा वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को चुना है, जिन्हें जीएसटी सुविधा प्रदाता (जीएसपी) के रूप में अभिहित किया गया है। 

“देश में जीएसटी के प्रभावी होने से अब अप्रत्यक्ष करों के संदर्भ में एकल स्तरीय कर प्रणाली अस्तित्व में आ चुकी है, जिससे ‘एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कर’ की अवधारणा को तो बल मिला ही है, कर वसूली में पारदर्शिता आने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है।” 

देश में जीएसटी के प्रभावी होने से अब अप्रत्यक्ष करों के मन में एकल स्तरीय कर प्रणाली अस्तित्व में आ चुकी है, जिससे एक राष्ट्र-एक बाजार-एक कर’ की अवधारणा को तो बल मिला ही है कर वसूली में पारदर्शिता आने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। पर्व की तुलना में अब एक राज्य से दूसरे राज्य में वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन सुगम हुआ है। टैक्स पर टैक्स की व्यवस्था खत्म होने से जहां आम आदमी को राहत मिली है, वहीं वस्तुओं और सेवाओं की लागत में स्थिरता देखने को मिल रही है। इससे जहां वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में एकरूपता देखने को मिल रही है, वहीं कानूनों, प्रक्रियाओं और कर दरों में भी एकरूपता आई है। 

जीएसटी के प्रभावी होने से कारोबारी सुगमता भी बढ़ी है। | इसने देशभर में व्यापार प्रक्रिया को कर की दृष्टि से तटस्थ बनाया है। | इससे व्यापार संचालन की प्रच्छन्न लागत (Hidden Cost) में कमी आई है, फलतः व्यापार और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार हुआ है। जहां अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं और | सेवाओं की प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि हुई है, वहीं भारतीय निर्यात को प्रोत्साहन मिला है। जीएसटी के अंतर्गत विनिर्माता से उपभोक्ता तक केवल एक ही कर होने से अंतिम उपभोक्ता तक अदा किए गए करों में पारदर्शिता आई है। क्षमता में वृद्धि और रिसाव की रोकथाम हान से अधिकांश वस्तुओं पर कर का बोझ हल्का हुआ है, जो कि उपभोक्ता के लिए लाभकारी स्थिति है। 

“जीएसटी, अनौपचारिक क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और हम एक राष्ट्रीय बाजार को विकसित कर रहे हैं। आज के सुधारों का नतीजा हमें आने वाले समय में मिलेगा और हम उच्च विकास दर हासिल करेंगे।” 

जीएसटी के कारण ‘एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर’ की अवधारणा साकार होने से राष्ट्र उत्थान की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को बल मिला है। जब एकीकृत एक समान राष्ट्रीय बाजार का सृजन होता है, तब विदेशी निवेश भी बढ़ता है और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है। विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने से रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, जिससे बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं से उबरने का मौका मिलता है। इसमें कोई दो राय नहीं है भारत में जीएसटी को प्रभावी बनाया जाना अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार’ है। जब कोई बड़ा सुधार किया जाता है, तो शुरुआत में कुछ तात्कालिक व्यवधान और विचलन भी आते हैं। इन तात्कालिक व्यवधानों और विचलनों का दिखना स्वाभाविक भी होता है, क्योंकि बनी बनाई व व्यवस्थित संरचना बदलती है। इससे संरचनात्मक समस्याएं बेशक पैदा होती हैं, किंतु इनके आधार पर किए गए सुधार को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता, क्योंकि संरचनात्मक समस्याएं समय के साथ ठीक भी हो जाती हैं। संरचनात्मक समस्याओं को लेकर जीएसटी का जो विरोध सामने आया, वह जायज नहीं है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह हमारी आर्थिक सेहत को अच्छा बनाने के लिए उठाया गया एक सुचिंतित कदम है। 

जीएसटी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पतनोन्मुख नहीं हुई है, बल्कि यह छलांग लगाने को तैयार है। इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। शुरुआती रुझान सामने आने लगे हैं। यह अकारण नहीं है कि वैश्विक वित्त सेवा प्रदाता कंपनी ‘एचएसबीसी’ (The Hongkong and Shanghai Banking Corporation : HSBC) द्वारा हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आगामी 10 वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है, जिसमें मौजूदा सुधारों का बड़ा योगदान होगा। दूसरी तरफ 31 अक्टूबर, 2017 को विश्व बैंक द्वारा जारी की गई ‘कारोबार सुगमता रिपोर्ट-2018′ (Ease of Doing Busi ness Report-2018) में दी गई 190 देशों की सूची में भारत को 100वां स्थान प्राप्त हुआ है, जो कि वर्ष 2017 के 130वें स्थान के मुकाबले बहुत बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि ऐसा हालिया सुधारों के कारण हुआ है। स्पष्ट है कि हम एक मजबूत अर्थव्यवस्था की तरफ सधे हुए कदमों से बढ़ रहे हैं। जीएसटी, अनौपचारिक क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और हम एक राष्ट्रीय बाजार को विकसित कर रहे हैं। आज के सुधारों का नतीजा हमें आने वाले समय में मिलेगा और हम उच्च विकास दर हासिल करेंगे। 

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