Golden words in hindi quote-अच्छा श्रोता, सबका प्यार होता है | सलाह सबकी, पर राह अपनी

Golden words in hindi quote

Golden words in hindi quote- अच्छा श्रोता, सबका प्यार होता है (A Good Listener is Liked By Every One) 

1.एक अच्छा श्रोता लोकप्रिय ही नहीं होता, वरन् कुछ ही देर में सब कुछ जान लेता है. एक अच्छा श्रोता शान्ति प्रिय ही नहीं होता, दूसरों को भी धीर-गंभीर बना देता है. यदि आप अच्छे वक्ता नहीं हैं, तो कोई बात नहीं, किन्तु यदि अच्छे श्रोता नहीं हैं तो आप कुछ भी नहीं. यह भी याद रखिए, एक अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता बन सकता है. वक्ता बनने से पहले श्रोता बनना जरूरी है.

2. आदमी अक्सर अपनी बात दूसरों पर थोपना चाहता है, भले ही वह खुद भी अपनी बात से सहमत न हो. वह अक्सर अपनी ही बात सुनाना चाहता है, भले ही श्रोतागण एक मत न हों. ऐसा व्यक्ति अन्ततः अकेला रह जाता है. बड़बोले व्यक्ति से सभी दूर रहना चाहते है, इसलिए बेहतर तो यही है कि दूसरों की बात सुनने और अपनी गलती मान लेने के लिए सदा साहस रखें, तब आपके सामने कोई कठिनाई ही नहीं आयेगी. तर्क-वितर्क से बचें, समस्या अपने आप सुलझ जायेगी.

सलाह सबकी, पर राह अपनी

3. किसी की बात यदि शान्ति के साथ खुले मन से सुन ली जाय तो समस्या का आधा समाधान तो तत्काल ही हो जाता है. इससे सुनने वाले के धैर्य और गांभीर्य का भी पता चल जाता है. छोटी से छोटी बात भी यदि ध्यान से सुन ली जाय, तो बड़ा से बड़ा महाभारत भी टल सकता है. अब तक जो भी उपद्रव हुयें हैं, जो भी युद्ध हुये हैं, दूसरों की बातों को ठीक से न सुनने के कारण ही हुए हैं. इसलिए समय पर सुनें, ध्यान से सुनें और उस पर तत्काल कार्यवाही करें..

4. एक सफल अधिकारी सर्वप्रथम अपने कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान से सुनता है, फिर समाधान का ताना-बाना बुनता है. एक सफल अधिकारी अपने वरिष्ठों की बात भी ध्यान से सुनता है और उस पर तत्काल अमल करता है. सफल अधिकारी जनता की बात सबसे पहले सुनता है और कोरे आश्वासन देने की बजाय अपेक्षित कार्यवाही अविलम्ब आरम्भ कर देता है. ऐसा अधिकारी सबका चहेता बन जाता है.

5. जो अपने दिल और दिमाग का दसवाँ हिस्सा सदैव खाली रखता है, वही अच्छा श्रोता होने की योग्यता रखता है. जो समस्त पूर्वाग्रहों और दुराग्रहों से दूर रहता है, वही अच्छा श्रोता बन सकता है. सदा दूसरों की गलतियाँ ढूँढ़ने वाला कभी अच्छा श्रोता नहीं बन सकता. गलतियाँ ढूँढ़ने वाला तो स्वर्ग में भी गलतियाँ ढूँढ़ ही लेता है. इसलिए गलतियाँ ढूँढ़ने की बजाय सामने वाले की बात पूरी तरह सुन तो लीजिए. हो सकता है, तब आपको गलतियाँ ढूँढनी ही न पड़े.

6. बीच-बीच में बोलने और दूसरों की बात को अनसुनी कर देने वाले व्यक्ति से लोग धीरे-धीरे बात करना छोड़ देते हैं. अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, किन्तु सामने वाले की बात पूरी होने पर ही दें. अपनी बात आरम्भ करने से पूर्व सामने वाले से पूछ लें कि क्या उसकी बात पूरी हो गई है ? उसके हाँ करने पर अपनी बात संक्षेप में सटीक और तर्क सहित कहें. जब आप दूसरों से सहमत होना सीख लेंगे, तब ही आप अपनी बात पर दूसरों को सहमत कर सकेंगे.

7. प्रयास करके श्रवण क्षमता एवम् दक्षता बढ़ाई जा सकती है. ध्यान से सुनने पर वक्ता के शब्दों की प्रतिध्वनि सुनाई पड़ने लग जाती है. यह प्रतिध्वनि ही आपको सफलता की ओर अग्रसर करती है. ध्यान रहे, यह समाज अपने आप में बहुत बड़ी सम्पदा है, आप समाज के माध्यम से ही सम्पदा अर्जित कर सकते हैं, समाज से दूर रह कर नहीं. इसलिए समाज की सुनो. लोगों के अनुभवों को अपनी सफलता में रूपान्तरित करते चलो.

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8. सार्थक ढंग से सुनना वस्तुतः परिश्रम भरा होता है. आधी-अधूरी बात को भी पूरी तरह समझ लेना एक कला है, यदि आपको यह कला आती है तो आप सामने वाले की बात उसके आरम्भ करते ही समझ लेंगे. इससे दोनों का समय बचेगा और आपकी समझ की सर्वत्र प्रशंसा होगी. आप पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा और लोगों का विश्वास ही आपकी सफलता का आधार बनेगा.

9. पति-पत्नि, माँ-बाप, भाई-बहिन, बच्चों-बड़ों, मित्रों-शत्रुओं, पड़ोसियों-ग्राहकों, कर्मचारियों अधिकारियों को यदि आप ध्यानपूर्वक, बिना तर्क-वितर्क किये और बिना उत्तेजित हुए सुन लेते हैं, तो कभी कोई विवाद ही उत्पन्न नहीं होगा. तब आप सबके चहेते बन जायेंगे और सभी आपसे सलाह करना पसंद करेंगे. याद रखें, तर्क-वितर्क और कुतर्क से मिलता कुछ भी नहीं है, महज वक्त, मनोबल और मस्तिष्क जाया होता है. लोग आपको घमण्डी और नासमझ समझने लगेंगे. आप दूसरों से सहमत होकर तो देखिए, फिर आपसे कोई असहमत हो ही नहीं पायेगा.

निष्कर्ष –यह सही है कि व्यक्ति सुनकर ही सीखता है, फिर भी दुर्भाग्यवश वह सुनना कहाँ चाहता है. व्यक्ति बचपन में पहले सुनना सीखता है, और करीब सालभर बाद बोलना सीखता है. किन्तु आश्चर्य तो इसी बात का है कि हर व्यक्ति हर वक्त सबसे पहले बोलना चाहता हैं. इसलिए यदि आप अपने व्यक्तित्व में निखार लाना चाहते हैं, अपनी समझ का लोहा मनवाना चाहते हैं तो दूसरों की सुनें, कम से कम बोलें. बोलने से पहले हर बात को तोलें। क्या आपने किसी डॉक्टर को या बड़े अधिकारी को अधिक बोलते हुए देखा है ? क्या आपने किसी चिन्तक या विद्वान व्यक्ति को अधिक बोलते हुए देखा है ? याद रखें, कम से कम बोलना ही इनका सबसे बड़ा गुण होता है। इस गुण के कारण ही ऐसे लोग कम से कम समय में दूसरों की समस्या समझ लेते हैं और कम से कम शब्दों में समाधान भी कर देते हैं। ऐसे लोगों के प्रति सबकी श्रद्धा होती है. 

सलाह सबकी, पर राह अपनी (Take Advices As Much As Needed, But Make Your Own Way) 

१.आश्चर्य कि आदमी पर दूसरों को मुफ्त में सलाह देने का भूत सवार रहता है, जबकि वह खुद भी उस सलाह पर ठीक से अमल नहीं कर पाता है. कुछ लोग सोचते हैं कि वे बड़े दयावान हैं, क्योंकि मुफ्त में सलाह देते रहते हैं. कुछ लोग समझते है कि वे समझदार हैं, क्योंकि मुफ्त में सलाह लेते रहते हैं, जबकि दोनों ही नासमझ हैं. इसलिए न तो इतने दयावान बनिए और न इतने समझदार ही.

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2. याद रखें, दूसरा व्यक्ति आपको वही सलाह देगा, जो उसके काम की नहीं होगी. जरा सोचिए, अपनी सफलता के गूढ़ और गोपनीय रहस्य कौन मूढ़ आपको बतायेगा. फिर भी आप हर सलाह में से कुछ न कुछ उपयोगी तथ्य अवश्य चुन सकते हैं और उनका अपने तरीके से उपयोग कर सकते हैं. आप मांग कर तो देखें, हर व्यक्ति आपको सलाह देता हुआ नजर आयेगा, पर सोचिए, आप किस-किस की सलाह पर अमल कर पायेंगे ?

3. ‘पता नहीं, किस बात में दम हो, इसलिए जरूरी है सुनना, गर बात गले उतर जाय तो ठीक, वरना राह अपनी ही चुनना.’ अर्थात् जो सलाह आपके लिए उपयोगी हो, उस पर अपनी आवश्यकतानुसार अमल कर सकते हैं. किन्तु यह न भूलें, आप अपनी आत्मा को मार कर या उसकी अनसुनी करके कहीं भी नहीं पहुँच सकते.

4. ‘ज्ञान’ भीतर से आये तब ही ज्ञान है, बाहर से आने वाला ज्ञान तो ‘अज्ञान’ ही है. बाहर से आने वाला ज्ञान किसी अन्य द्वारा अनुभूत है. जब तक आप उसे अपनी अनुभूति में नहीं उतार लेंगे, तब तक वह ज्ञान आपके लिए उधार का ही रहेगा. यदि आप ‘ज्ञानी’ बनना चाहते हैं तो पहले आपको ‘अज्ञानी’ बनना होगा. यदि आप समझते हैं कि ‘ज्ञानी’ बनना जरा महंगा है तो आपको ‘अज्ञानी’ बने रहना होगा. अज्ञानी बनकर तो देखिए, सलाह देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ेगी. चारों ओर से ज्ञान की गंगा बहने लगेगी. किन्तु आपके लिए कौनसी सलाह, कौनसा ज्ञान उपयोगी है, इसका निर्णय आपको ही करना है.

5. दिमाग कोई कचरापात्र नहीं है कि आप हर व्यक्ति की बात सुनें और हर सलाह को दिमाग में रिकॉर्ड करते चलें. बेहतर तो यही है कि बिना मांगे न सलाह दें, न सलाह लें. आपके चाहने पर यदि कोई सलाह देता है तो केवल उपयोगी सलाह पर ही ध्यान दें. अर्थात् सार्थक ही सुनें, सुनकर गुनें और जो भी उपयोगी हो, उसे रिकॉर्ड कर लें. फिर उसके गुणावगुण पर विचार करते हुए उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप अपने तरीके से अमल करें, 

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6.हवा के झोंकों की तरह प्रतीतियाँ आती हैं और चली जाती हैं. सही समय पर सही प्रतीति को पकड़कर चलना ही सफलता की राह पर चलना है. कोई भी सलाह जब हमारे अवचेतन में स्थान बना लेती है, तब प्रतीति बन जाती है. जब कोई प्रतीति बार-बार झकझोरने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि हमारे लिए यही अभिष्ट है.

7. जिस प्रकार हम पौष्टिक एवम् सन्तुलित भोजन से ही स्वस्थ रह सकते हैं, उसी प्रकार उपयोगी, चयनित एवम् सन्तुलित सलाह पर चल कर ही लाभान्वित हो सकते हैं. जो सलाह किसी एक व्यक्ति के लिए उपयोगी है, वह किसी दूसरे के लिए भी उपयोगी ही हो, यह आवश्यक नहीं है. इसलिए जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ सलाह अवश्य लें. विचार करें कि कौनसी सलाह किस सीमा तक आपके लिए उपयोगी है.

8. जब तक खुद न जान लें, तब तक किसी को सलाह न दें. जब तक खुद पर लागू न हो, तब तक किसी को न बतायें. जिस रास्ते पर चलने पर आपको लाभ हुआ हो, वही रास्ता दूसरों को बतायें. प्राप्तकर्ता की पात्रता के अनुसार ही सलाह देंवे. सलाह सदैव स्पष्ट एवम् संक्षेप में ही दें. ऐसी सलाह किसी को न दें, जिस पर आपने कभी अमल न किया हो, अथवा जिस पर कभी विचार न किया हो. केवल सलाह देने के लिए सलाह न दें.

9. याद रखें, खुद से बढ़कर कोई दूसरा सलाहकार नहीं हो सकता. इसलिए सर्वप्रथम स्वयम् से सलाह करें, फिर परिजनों-सहकर्मियों से सलाह करें. जब सबकी सहमति बन जाय, तब ही अमल करें. लोगों की भिन्न-भिन्न सलाहों से भ्रमित न हों. यह सही है कि जहाँ पाँच व्यक्ति एकत्रित हों, वहाँ छ: अलग-अलग सलाहें सामने आती हैं, क्योंकि सलाह देने वाले कभी एक मत नहीं हो सकते. सलाह देने वाले कभी सुनिश्चित भी नहीं हो सकते.

दृष्टान्त- एक बार विदेशी पर्यटकों की एक टोली ने हमारे देश का भ्रमण किया. यात्रा के अन्त में पत्रकारों द्वारा पूछा गया कि ‘आप लोगों की नजर में हमारे देश की कोई तीन विशेषतायें कौनसी हो सकती हैं ? इस पर टीम लीडर ने बहुत ही सहज भाव से जवाब दिया 

1.Here every time is a tea time. यहाँ किसी भी समय चाय पी जा सकती है. 2. Here every place is a urinal. यहाँ कहीं भी पेशाब किया जा सकता है. 3. Here every person is an adviser. यहाँ हर आदमी सलाहकार है. हमारे यहाँ बिना मांगे वक्त बेवक्त सलाह देने वालों की कमी नहीं है, जो भी मिलता है, किसी न किसी सलाह के साथ ही मिलता है. इसलिए बेहतर तो यही है कि सुनें सबकी, पर अमल अपने विवेक से ही करें. बिना माँगे कोई जिस विषय में आपकी जानकारी न हो, उसमें सलाह न दें. ‘क्षमा करें, इस सम्बन्ध में मेरी कोई जानकारी नहीं है। कहने का साहस रखें. आपका यह साहस आपके लिए सर्वाधिक उपयोगी होगा. 

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