गोल्डन थॉट्स ऑफ़ लाइफ इन हिंदी-आज के काम को कल पर मत टालिए (Do Not Put Off Till Tomorrow, What Ever You Can Do Today) 

गोल्डन थॉट्स ऑफ़ लाइफ इन हिंदी

गोल्डन थॉट्स ऑफ़ लाइफ इन हिंदी-आज के काम को कल पर मत टालिए (Do Not Put Off Till Tomorrow, What Ever You Can Do Today) 

1.किसी भी कार्य को आवश्यक होने से पहले करें. आवश्यक कार्य को अत्यावश्यक होने से पहले करें. अत्यावश्यक कार्य को सबसे पहले करें, किन्तु आवश्यक कार्यों की कीमत पर न करें. जिसे अभी कर सकते हैं, उसे एक क्षण के लिए भी न टालें. जिसे अभी टाल दिया, वह हमेशा के लिए भी टल सकता है. याद रखें, आप सबको टाल सकते हैं, पर अपने आपको नहीं टाल सकते.

2. यदि किसी पत्र को यथा समय डाक में नहीं डाला गया तो कितना बड़ा अनर्थ हो जायेगा. यदि किसी रोग को आरम्भिक अवस्था में नहीं संभाला गया तो सारा उपचार ही व्यर्थ हो जायेगा. यदि बरसात से पहले छप्पर नहीं डाला गया अथवा बरसात से पहले पानी को रोकने का प्रबन्ध नहीं किया गया, तो बरसात आने के बाद कुछ भी नहीं कर पायेंगे. याद रखें, बरसात कभी भी आ सकती है और आपके टालने से कभी टलने वाली नहीं है.

3. अगला जो भी पल आयेगा, अपने उत्तरदायित्वों के साथ आयेगा. जो भी पल जायेगा, कुछ न कुछ उत्तरदायित्व छोड़ कर जायेगा. यदि आपने वर्तमान के किसी एक कार्य को भी टाल दिया तो समझो वह हमेशा के लिए टल जायेगा. दिन भर में यदि आपने दो काम भी बकाया छोड़ दिये तो जरा हिसाब लगाइए, बकाया कार्यों की सूची कितनी लम्बी होती चली जायेगी. इसलिए जिस कार्य को आप आज कर सकते हैं, उसे अभी आरम्भ कर दीजिए और पूरा होने तक आराम मत कीजिए. याद रखिए, कल जो आपके कार्य होंगे, आज से ज्यादा होंगे. जब आज के कार्यों को भी कल पर टाल दोगे तो कल आप कितनी दुविधा में होंगे.

4. आज की समस्याओं का समाधान आज ही करिए. आज ही नहीं, अभी करिए. समस्या के समाधान में जितना विलम्ब होगा, समस्या उतनी ही उलझती चली जायेगी. जटिलतायें जुड़ती चली जायेंगी और एक दिन समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी, इसलिए जैसे ही समस्या से सम्बन्धित पक्षकार अथवा परिस्थिति विद्यमान हो, समस्या का सर्वमान्य एवम् समुचित हल निकाल लीजिए. समस्या को कभी स्थगित मत कीजिए, क्योंकि कल की भी अपनी समस्यायें होंगी.

5. आज के काम को कल पर टालने से आदमी आलसी बन जाता है और धीरे-धीरे आलस्य उसकी आदत में बदल जाता है. आलसी आदमी का न भूत होता है न भविष्य होता है. भूत और भविष्य तो उसी का होता है जिसका वर्तमान होता है. और वर्तमान उसी का होता है जो आलसी नहीं होता. जरा सोचिए, यदि आप आज सुस्त हैं तो कल चुस्त कैसे हो जायेंगे. ‘कल’ भी तो ‘आज’ बन कर ही आयेगा और ‘आज’ को टालने के तो आपने खूबसूरत बहाने गढ़ रखे हैं.

6. आदमी की तमाम विफलताओं, दुविधाओं और जटिलताओं का एकमात्र कारण है ‘स्थगन’/ स्थगन यानी Postponement काम को कल पर टालने की आदत का एकमात्र उपचार है ‘जागरण’, कम से कम इस जागरण को तो कल पर मत टालिए. किसी कार्य को स्थगित कर देने पर व्यक्ति को एक काल्पनिक विश्राम मिलता है. किन्तु अफसोस कि वह विश्राम कर कहाँ पाता है. सदैव किसी न किसी फालतू के कार्यों में सलंग्न रहता है. और अचानक एक दिन मृत्यु आ धमकती है. क्या व्यक्ति मृत्यु को भी स्थगित कर सकता है ? तो आज के काम को आज ही निपटाते चलें, तब मृत्यु को स्थगित करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

7. प्रकृति अपने कार्यों को कभी कल पर नहीं टालती. कल तो दूर की बात है, प्रकृति तो अपने किसी कार्य को एक सैकण्ड भी स्थगित नहीं करती. सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी अपने-अपने कार्यों में एक सैकण्ड का भी विलम्ब नहीं करते. जिस फूल को आज खिलना है, वह आज ही खिलता है. हम भी तो प्रकृति के ही अंग है, किन्तु हमने बहुत ही चालाकी से अपने कार्यो को टालने के उपाय कर रखें है. हमारे कष्टों का मूल कारण भी यही है.

8. मनुष्य के अतिरिक्त प्रकृति का हर प्राणी केवल वर्तमान में ही जीता है. मनुष्य ही ऐसा मूढ़ है जो कल के लिए जीता है. कल के लिए जीने का अर्थ है, आज को टालना. जरा सोचिए, क्या आपका हृदय अपना कार्य एक सैकण्ड के लिए भी स्थगित कर सकता है ? आपके शरीर का कोई अंग क्या अपना कार्य कल के लिए टाल सकता है ? कदापि नहीं. तो इन सबसे कुछ तो सीखिए.

9. यदि किसी विचार पर तत्काल अमल नहीं किया जाय तो वह उभरने से पहले ही दम तोड़ देता है. यदि किसी ज्ञान का यथा समय उपयोग नहीं किया जाय तो वह अपने कदम ‘अज्ञान’ की ओर मोड़ देता है. इसलिए सकारात्मक सोच के साथ सार्थक कार्यों में सदा व्यस्त रहिए. याद रखिए व्यस्तता ही सफलता है.

जरा सोचिए –क्या आप अपनी श्वास को टाल सकते हो ? क्या आप भूख और प्यास को टाल सकते हो ? क्या आप नींद को टाल सकते हो ? क्या आप रात या दिन को टाल सकते हो ? क्या आप जन्म या मृत्यु को टाल सकते हो ? क्या आप बचपन, जवानी या बुढ़ापे को टाल सकते हो ? तो फिर आज के काम को कल पर कैसे टाला जा सकता है. क्या कल के अपने कार्य नहीं होंगे ? क्या कल आपकी कार्य क्षमता बढ़ जायेगी ? क्या कल आपको पर्याप्त समय मिल जायेगा ? क्या कल का आना निश्चित ही है ? शायद नहीं, तो फिर आज के काम को कल पर टालने का क्या औचित्य है. 

Good thoughts in hindi-जो फुरसत व सुविधा अभी आपके पास है, वो कल नहीं रहेगी (The Leisure & Facilities, Which Are Available Today, Shall Not Be With You in The Time To Be)

1.दुनिया की सबसे बड़ी आग सही समय पर केवल एक गिलास पानी से बुझाई जा सकती है. जीवन के हर क्षण का सदुपयोग करके दुनिया की बड़ी से बड़ी सम्पत्ति पायी जा सकती है. जो भी क्षण बीत रहा है, जीवन को रीत रहा है. जीवन कुछ नहीं, क्षणों का योग मात्र है. क्षण भी कितने ? एक संयोग मात्र है. समय की बूँद जो आज व्यर्थ बहेगी, कल वही विफलता की कहानी कहेगी.

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2. अच्छे दिन आपका इन्तजार कर रहे हैं, ऐसा कभी मत सोचिए. समय कभी किसी का इन्तजार नहीं करता. यदि सबसे अच्छा दिन कोई हो सकता है तो वह आज ही है. आज ही क्या, बस अभी ही है. इसलिए जो भी करना हो, आज ही करें, अभी ही करें. जो फुरसत और सुविधायें आप आज जुटा सकते हैं, कल नहीं जुटा पायेंगे. कल तो आपके सामने कल की समस्यायें भी होगी. इसलिए किसी कार्य को टालकर कल की समस्याओं में अभिवृद्धि मत कीजिए.

3. किनारे बैठे-बैठे सोचते रहने पर जीवन व्यर्थ ही बहता रहेगा. सोचते ही रहोगे तो एक दिन 

कूदने की हिम्मत ही चुक जायेगी. हमारा जीवन तो इस समय रूपी सागर में एक बूंद के बराबर है. यदि हम इस बूंद को सार्थक करना चाहते हैं, बूंद को बुलबुला होने से बचाना चाहते हैं, तो जीवन-धारा में कूदना ही पड़ेगा. जीवन तो नितान्त ही अल्प एवम् अनिश्चित है, इसलिए जो कुछ करना है, अभी और इसी वक्त आरंभ कर देना चाहिए. हो सकता है, कल हम आरम्भ ही न कर सकें.

4. जो भी निर्णय लेना हो, तत्काल लें. आवश्यक निर्णय को विलम्बित न करें. हो सकता है, कल आपमें निर्णय लेने की क्षमता ही न रहे. सही समय पर सही कदम उठायें. हो सकता है, कल आपके कदम उठने लायक ही न रहें. याद रखें, कार्य का नहीं, समय का महत्व होता है. सबका अपना-अपना समय होता है. समय कभी एक सा नहीं होता, किन्तु एक क्षण भी व्यर्थ नहीं होता है. इसलिए किसी भी निर्णय को स्थगित न करें. हो सकता है, अभी तो आपके सामने एक ही निर्णय विचाराधीन हो, किन्तु कल कितने निर्णय लम्बित होंगे, कह नहीं सकते.

5. वस्तुतः काम ही राम है. अपने काम में इस तरह उतर जाओ कि राम की सुधि ही न रहे. यदि स्वयम् ‘राम’ भी आकर खड़े हो जायें तो यही कहें-‘हे राम, मैं इस वक्त अपने काम में व्यस्त हूँ. आपके पास तो कल भी है, किन्तु मेरे पास तो केवल क्षणिक वर्तमान ही है. अपने वर्तमान के प्रति उत्सुक रहोगे तो हो सकता है, “राम’ के लिए उत्सुकता ही न रहे. 

6.सरकारी, अर्द्ध-सरकारी एवम् निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. इसलिए जब तक आप किसी नौकरी के लिए पात्रता रखते है, तब तक गंभीरतापूर्वक प्रयास करते रहें. जो भी करें, आयु एवम् अवसर निकलने से पहले ही करें. यदि आज आप किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए पात्र हुये हैं तो आज से ही प्रयास शुरू कर दें. यह न सोचें कि अभी तो दस साल है, तैयारी कर लेंगे. याद रखें, साल दर साल प्रतियोगियों की संख्या बढ़ती चली जाती है और प्रतियोगिता भी टफ से टफ होती चली जाती है.

7. यदि आप किसी नौकरी के योग्य नहीं हैं अथवा आप नौकरी करना नहीं चाहते हैं या अपने आपको सक्षम नहीं पाते हैं तो अभी से किसी व्यवसाय को चुनना होगा. व्यवसाय चुनने में जितना विलम्ब होगा, उतना ही व्यवसाय जटिल होता चला जायेगा. जो जितना जल्दी शुरूआत कर देता है, उतना ही जीत में रहता है. शुरूआत करने का समय सबका अलग-अलग होता है. जो पहले पैदा हो गया, वो शुरूआत भी पहले ही करेगा. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बाद वालों के लिए कुछ बचेगा ही नहीं. बचेगा, बहुत कुछ बचेगा, बशर्ते कि हर व्यक्ति अपनी शुरूआत सही वक्त पर करे. इसलिए शुरूआत अभी करिए, कहीं ऐसा न हो कि कल शुरूआत के लिए कुछ बचे ही नहीं.

8. जब भी कोई नया कार्य शुरू किया जाता है, तब व्यक्ति के पास तैयारी, पूर्व-जानकारी और वित्तीय व्यवस्था के नाम पर अधिक कुछ भी नहीं होता. फिर भी यदि हिम्मत करके कार्य आरम्भ कर दिया जाए तो अपेक्षित संसाधन अपने आप जुटते चले जाते हैं. इसलिए पूर्ण आत्मविश्वास, पूर्ण गंभीरता एवम् सम्पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य आरम्भ करें. किसी भी कार्य को उचित समय पर आरम्भ करने का अर्थ होगा, पचास प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करना.

9. उपलब्ध अवसर के सुनहरे पलों को उपयोगी बनाना और अपनी पहुँच के दायरे में विद्यमान अवसरों को पकड़ लेना ही जीवन की सार्थकता है. यदि आज आप स्वस्थ हैं तो आज का समय ही आपके लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. इसलिए स्वस्थ जीवन का पूरा-पूरा उपभोग करें और यह न सोचें कि कल भी आप स्वस्थ ही रहेंगे.

दृष्टान्त- एक मल्लाह अपनी नाव से यात्रियों को नदी पार करवाने का कार्य करता था. यात्रियों को नदी पार करवाने के बाद उनसे किराया मांगा करता था. इस पर हमेशा झगड़ा होता रहता था. कोई कम देता, कोई बिना दिये ही चल देता, लगेज का किराया तो लोग देना ही नहीं चाहते थे. मल्लाह काफी परेशान रहता था. एक दिन गाँव के सरपंच ने मल्लाह की समस्या का आसान हल बताया कि सभी यात्रियों से किराया एवम् भाड़ा नाव में बिठाने से पूर्व ही वसूल कर लिया जाए. बात मल्लाह की समझ में आ गई. दो चार दिन यात्रियों को थोड़ा अटपटा सा लगा, किन्तु जल्दी ही सब कुछ नियमित हो गया. अब कोई विवाद ही नहीं होता था. मल्लाह की आय बढ़ने लगी. अर्थात् जो सुविधा इस किनारे पर है, वो उस पार नहीं रहेगी.

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