Ghost Story-शैतान हावी था उस लड़की पर,सन्नाटा चीरती चीख,अपने आप चलने वाला जहाज 

Ghost Story-शैतान हावी था उस लड़की पर 

Ghost Story-शैतान हावी था उस लड़की पर 

रोमानिया के तालपा गांव के एक किसान की लड़की ईलिएनोर जुगुन अपनी दादी के घर, जो बुहाई में था, जाने के लिए रवाना हुई। रास्ते में उसे सड़क के किनारे कुछ सिक्के पड़े मिले। ग्यारह साल की उस लड़की ने वे सिक्के उठा लिए और उनसे बुहाई में मिठाई खरीदी और खा गई। जब वह अपनी 105 वर्षीय दादी के पास पहुंची और उसे यह सब बताया तो वह नाराज हो गई। दादी ने, जिसको आसपास के लोग डायन भी कहते थे, उसे आगाह किया कि रास्ते में शैतान ने (रोमानिया में उसे ड्रेकू कहते हैं) तुम्हें ललचाने के लिए सिक्के फेंक दिए थे और तुम शैतान के चंगुल में आ गईं। अब वह तुम्हें भी आजाद नहीं करेगा। दूसरे दिन से ही जुगुन के साथ अनहोनी घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया। जुगुन के घर अचानक पत्थर आ गिरते जिनसे खिड़कियों के कांच टूट जाते और जगन के पास जो भी चीज होती वह अचानक उछल जाती और उड़ कर दूर जा गिरती। 

उसकी दादी समझ गई कि उस पर शैतान हावी हो गया है, उसने उसको तुरंत उसके घर तालपा भेज दिया। लेकिन वहां भी अनहोनी घटनाओं का सिलसिला बंद नहीं हुआ। उसके पास रखा पानी से भरा जग अचानक हवा में उड़ जाता और कई फीट दूर बिना पानी छलकाए पहुंच जाता। उसके पास रखा एक बॉक्स अचानक हवा में उठ गया और कमरे में बैठे उसके एक रिश्तेदार के सिर के पीछे चोट लगाकर गिर गया। जुगुन के घर के लोग घबरा गए और उसे पागलखाने में भर्ती करा दिया। 

इस दौरान लड़की के किस्से अखबारों में प्रकाशित हो गए और जर्मनी में रह रहे आस्ट्रियाई मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता फ्रिज ग्रुनवेल्ड एक पत्रकार कूबी कलेन को लेकर उसके गांव पहुंचे और उसे पागलखाने से छुड़ा कर अपने साथ ले आए। 

उन्होंने 9 से 18 मई, 1925 के बीच जुगुन के साथ होने वाली हरकतों का अध्ययन किया। इस दौरान उसके आसपास की वस्तुओं का सरक जाना, बड़े बर्तनों का भट्ठी पर से घूम जाना और कभी-कभी वस्तुओं का अचानक लोगों पर फिंक जाना जैसी घटनाएं हुईं। अब तो अचानक कोई थप्पड़ मार दे, ऐसा अहसास भी जुगुन को होने लगा। 

जुलाई, 1925 में ग्रेनवेल्ड की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जुगुन फिर अपने परिवार में आ गई। उसके साथ उसके परिवार वाले चिन्ता में पड़ गए। लेकिन कुछ ही साल बाद वियना की एक औरत जिसने वर्षों तक मनोवैज्ञानिक अनुसंधान किए थे, की दिलचस्पी जुगुन में जागी और सितम्बर, 1925 को वह उससे मिलने आई। उसने खुद उसके पास रहकर उन अनहोनी घटनाओं को देखा और जनवरी, 1926 में वह उसे वियना में अपने फ्लैट पर ले गई। वियना की वह औरत जो विसिलिको काउन्टेस थी, उसने जुगुन के मामले पर 1926 में पुस्तक लिखी थी। उसने लिखा था कि एक बार जब मैं अपने कमरे में आई तो जुगुन मेरे पीछे थी। मैंने अचानक देखा कि खिड़की में से कोई छाया धीरे-धीरे सरक कर अंदर आ रही है। फिर मैंने किसी के गिरने की आवाज सुनी 

मैंने देखा कि कमरे में एक छोटा-सा बॉक्स पड़ा है जिसमें पादरियों के पहनने के टोप भरे हैं। उन्हीं में से कुछ टोप बाहर भी बिखरे पड़े थे, लेकिन मुझे नहीं पता कि वह आए कहां से थे। ऐसे ही एक समय जब जुगुन अपने हाथ में बिल्ली लिए किताबों की अलमारी के पास खड़ी थी तो मैंने देखा कि उसको पीछे से घेरे हरे रंग की छाया निकल कर हमारी टेबल पर गिर रही है। वहां मुझे टीन बॉक्स दिखाई दिया। 

मुझे ध्यान आया कि वह तो कमरे में दूसरी तरफ पड़ा था। मियुनिक के डॉक्टर हंस रोजेनबुश ने जुगुन की जांच पड़ताल की। उसने बाद में दावा किया कि लड़की झूठी है, और वह जो कुछ करती है वह काउन्टेस की मदद से करती है। इससे वियना में हंगामा हो गया। एक अन्य डॉक्टर हेरी प्राइस ने भी जांच पड़ताल की और उसने कहा कि इन अनहोनी घटनाओं का सिलसिला तब भी जारी रहा जब काउन्टेस मौजूद नहीं थी और जुगुन को बंद कमरे में रखा गया था। इस पर वियना के कई प्रमुख वैज्ञानिक और डॉक्टर उसकी जांच पड़ताल में जुटे और उन्होंने माना कि जुगुन की उपस्थिति में ही अनहोनी घटनाएं होती हैं। 

काउन्टेस ने रोजेनबुश पर मानहानि का मुकदमा किया। हालांकि वह तकनीकी कारणों से खारिज हो गया। यह विवाद शायद आगे भी चलता लेकिन 1927 के 14वें जन्मदिन के बाद जब उसे पहली माहवारी हुई तो इन अनहोनी घटनाओं का सिलसिला बंद हो गया। इसके बाद वह रूमानिया में हेयर ड्रेसर का काम करने लगी और उसके साथ कई अनहोनी घटनाओं के किस्से वर्षों तक लोगों में चर्चा का विषय बने रहे। 

Real horror story-सन्नाटा चीरती चीख 

अमेरिका में प्रेतों से अभिशप्त कई मकान हैं जहां लोग प्रेतों के भय से रहना ही नहीं चाहते। ऐसे प्रेतों से अभिशप्त न जाने कितने मकान आज भी खाली पड़े हैं। ऐसा ही एक मकान है, जिसे 18 वीं सदी में वर्जीनिया के एक व्यक्ति ने बनाया था। कई वर्षों तक उस भव्य मकान में लोग चैन से जीवन बिता रहे थे। लेकिन एक रात उनके जीवन में एक भयानक चीख ने अशांति पैदा कर दी। उस भयानक चीख से आतंकित होकर लोगों ने उस मकान को खाली कर दिया। फिर धीरे-धीरे वह भव्य मकान खंडहर में तबदील होने लगा। 

Real horror story-सन्नाटा चीरती चीख 

40 वर्ष पूर्व इस भव्य मकान की मरम्मत कराई गई और फिर उसमें लोगों ने रहने का साहस किया। लेकिन जैसे ही उन्होंने उस मकान के भीतर कदम रखा, 

एक महिला की भयानक चीख ने उनके दिल को दहला दिया। इसके बाद तो हृदय विदारक चीखें, भारी-भारी कदमों की आहटें और तरह-तरह की आवाजें आने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। इतना ही नहीं, उस विशाल भवन में स्थित पुस्तकालय में टंगी एक बड़ी तस्वीर ने अपने आप रंग बदल लिए। 

उसी मकान में एक बार एक व्यक्ति ने दो कृशकाय व्यक्तियों को सहायता के लिए पुकारते देखा। उसका कहना था कि दोनों व्यक्ति प्रेत थे। जो उसी विशाल भवन में निवास करते हैं। 

अकसर कहा जाता है कि असमय मृत्यु को प्राप्त होने वाले व्यक्ति को कुछ समय प्रेत योनि में रहना पड़ता है। शराब बनाने वाली एक कंपनी के मालिक विलियम लेंप नामक व्यक्ति के उजाड़ मकान में घटने वाली घटना इस बात को प्रमाणित करती है कि विलियम लेंप ने किसी कारणवश अपने दो बेटों के साथ आत्महत्या कर ली थी। बाद में किसी व्यक्ति ने उसके निवास स्थान को खरीद लिया। 

जब उसने उस मकान की मरम्मत करवानी शुरू की तो मकान के सारे दरवाजे अपने आप बंद हो जाया करते थे। उन बंद दरवाजों में अपने आप ताले भी लग जाते थे और ऐसा प्रतीत होता था मानो कोई छिप कर उन्हें देख रहा हो। 

अमेरिका के ही एक अन्य मकान में सीढ़ियों पर निवास करने वाला प्रेत किसी को सताता नहीं है। वह किसी दयालु व्यक्ति का प्रेत लगता है। वह लोगों को कभी-कभी ही दिखता है, पर जब भी लोगों को दिखाई देता है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह मधुर मुस्कान के साथ लोगों के स्वागत में खड़ा हो। 

सिर कटा भूत का रहस्य

भुतहा घर का रहस्य

 true ghost stories-अपने आप चलने वाला जहाज 

जब कभी कोई जड़ (निर्जीव) वस्तु अपनी इच्छा शक्ति से प्रेरित होकर कोई कार्य करने लगती है तो उसके पीछे कोई न कोई रहस्य अवश्य ही छिपा होता है। विज्ञान ऐसे तथ्यों को बेबुनियाद बताता है किंतु इतिहास में घटित घटनाओं को नकारा कैसे जा सकता है? इतिहास साक्षी है कि इस प्रकार की घटनाएं एक नहीं अनेक बार घट चुकी हैं। 

 true ghost stories-अपने आप चलने वाला जहाज 

लकड़ी तथा लोहे से बना एक यात्री समुद्री जहाज का नाम ‘एस.एस. हमबोल्ड’ था जो मालवाहक भी था। इस जहाज से समुद्री यात्रा का प्रारंभ सन् 1898 से किया गया था। अपने प्रारंभिक दौर में इस जहाज से सीटल से अलास्का के बीच यात्रा हुआ करती थी। 

इस जहाज के कैप्टन का नाम इलियाज जी. बोफमन था। यह जहाज प्रारंभ होने के दिन से ही उसे सौंप दिया गया था। कैप्टन बोफमन ने अपना समुद्री जीवन भी हमबोल्ट से ही आरंभ किया था। यह भी आरंभ से लेकर अंत तक एक विचित्रता ही रही कि न तो किसी अन्य कैप्टन ने इस जहाज का कभी संचालन किया और न ही कैप्टन बोफमन ने ही किसी दूसरे जहाज का संचालन किया। 

कुछ दिनों तक यह जहाज सीटल और अलास्का बंदरगाह के बीच चलने के बाद प्रशांत महासागर के उत्तर-पश्चिमी बंदरगाहों के बीच भी चलने लगा। कालांतर में कई बार जीर्ण-क्षीर्ण अवस्था में पहुंच जाने के कारण इस जहाज को विघटित कर देने पर भी विचार किया गया परंतु कैप्टन बोफमन के शालीन विरोध के कारण इस जहाज को विघटित नहीं किया जा सका। अपना जल जीवन उसी जहाज से शुरू करने के कारण कैप्टन बोफमन का इस जहाज से खास लगाव था। 

सन् 1934 में कैप्टन बोफमन ने जब नौकरी से अवकाश ग्रहण किया तब हमबोल्ट को विघटित करने के लिए भेज दिया गया, क्योंकि किसी भी अन्य कैप्टन ने इस जर्जर हो चुके जहाज का कार्यभार स्वीकार कर खतरा मोल लेना उचित नहीं समझा। 

अवकाश प्राप्त करने के बाद 8 अगस्त, 1935 के दिन कैप्टन बोफमन का कैलीफोर्निया में जिस समय निधन हुआ ठीक उसी समय वहां से लगभग साढ़े छः सौ किलोमीटर दूर पेड़ों बंदरगाह पर खड़े हमबोल्ट जहाज के लंगर अपने आप खल गए और यह उत्तर दिशा की ओर कैलीफोर्निया के लिए अपने आप रवाना हो गया। इस जहाज को पेड़ों बंदरगाह पर विघटित करने के लिए लाया गया था और वहीं लंगर डाल कर इसे खड़ा कर दिया गया था। 

अपने आप चलने वाले इस जहाज को देखकर पेड़ों बंदरगाह पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए थे, क्योंकि बिना चालक के ही यह जहाज अपनी दिशा में बढ़ने लगा था। लोग जब तक इस जहाज को रोकने का प्रयास करते यह समद्र में काफी अंदर पहुंच गया था। उस समय जहाज में कोई भी व्यक्ति नहीं था। बिना ईंधन ही यह जहाज समुद्र में यात्रा करता रहा। एक अन्य कैप्टन की सहायता से इस जहाज को लगभग छ: माह बाद वापस पेड़ों बंदरगाह में लाया जा सका था। 

जहाज के अपने आप चलने की घटना की जांच करने के लिए जांच कमीशन नियुक्त किया गया। परंतु नतीजा शून्य ही रहा। अंत में यही मानकर संतोष कर लिया गया कि कैप्टन बोफमन की आत्मा से इसका गहरा संबंध था, इसलिए उसे अंतिम विदाई देने के लिए जहाज सारे लंगरों को तोड़कर बिना तेल-कोयले के अपने आप चल दिया था। इसी सीटल बंदरगाह की एक और घटना है-कैप्टन मार्लिन ओलसेन नामक एक मछुआरा विगत अनेक वर्षों से लीलायन नामक अपनी नौका की सहायता से साल्मन मछलियों का शिकार किया करता था। उसने जीवन भर अपनी उसी नौका से मछलियों का शिकार किया था। 

मार्लिन ओलसेन जब बूढ़ा हो गया और शिकार के लिए उसका जाना संभव नहीं रह गया तो उसने अपने पेशे से अवकाश ले लिया। मोहवश उसने अपनी प्रिय नौका को समुद्र तट से कुछ दूर अपने निवास स्थान के निकट बालू में रख छोड़ा। 10 वर्षों तक वह नाव खुले आकाश के नीचे रहने के कारण जीर्ण-क्षीर्ण होकर बाल में धंस गई थी। 

जिस दिन ओलसेन का देहांत हुआ उस दिन समुद्र अपेक्षाकृत शांत था। किसी तरह का तूफान या ज्वार भी नहीं आया था। परंतु अप्रत्याशित रूप से वह नाव बालू से अपने आप निकलकर समुद्र में चली गई और समुद्र में अपने आप तैरने लगी। तीन दिनों तक वह नाव बिना किसी नाविक के समुद्र में घूमती रही और उसके बाद आयरलैंड के तट के निकट उस स्थान पर जाकर खड़ी हो गई, जहां ओलसेन को दफनाया गया था। समुद्र में लहरें आती रहीं किंतु वह नाव बिना किसी सहारे के उसी स्थान पर बारह वर्षों तक खड़ी रही। 

ठीक बारह वर्षों के बाद उसी दिन जिस दिन ओलसेन का देहांत हुआ था, वह नाव पुनः समुद्र के रास्ते स्वयं ही चलकर उस स्थान पर पहुंच गई, जहां ओलसेन ने उसे रखा था। इस घटना के बाद लोगों ने देखा कि ओलसेन का ताबूत उसी नाव के बीच में रखा था। जबकि ओलसेन को आयरलैंड के निकट दफनाया गया था। 

असली भूत की कहानी-नगाड़े के भूत का रहस्य 

जो लोग मरणोत्तर जीवन में विश्वास करते हैं, वे मानते हैं कि मरने के बाद सूक्ष्म शरीर कई बार तो जन्म ले लेता है। किन्तु कई बार वह बहुत समय तक पुरानी वस्तुओं, पुराने व्यक्तियों तथा पुरानी परिस्थितियों के साथ अत्यधिक मोह बढ़ जाने के कारण उन्हीं में रहना पसन्द करता है। तो आइए, इस कबाड़खाने के नगाड़े से सम्बन्धित भूत का रहस्य जान लें। 

जोसफ ग्लेन बिल इंग्लैण्ड की रॉयल सोसायटी के फैलो रहे थे। वे एक प्रामाणिक और सम्मानित नागरिक थे। उन्होंने अपने एक संस्मरण में इस घटना का उल्लेख किया है। जोसफ के अनुसार इंग्लैण्ड के विल्ट शायर नामक स्थान पर नियुक्त एक न्यायाधीश की अदालत में एक विचित्र केस आया। 

असली भूत की कहानी-नगाड़े के भूत का रहस्य 

हुआ यह कि एक अर्द्धविक्षिप्त-सा व्यक्ति कहीं से एक पुराना नगाड़ा खरीद लाया। नगाड़ा क्या खरीद लाया वह उसे सड़क पर खड़ा होकर विचित्र ढंग से बजाता, भीड़ इकट्ठी करता और पैसे बटोरता था। 

पुलिस ने उसे रास्ता रोकने । और अवांछनीय भीड़ एकत्रित करने के आरोप में पकड़कर नगाड़े सहित उक्त अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने उसे सिर्फ चेतावनी भर देकर छोड़ दिया और साथ ही उसके पुराने कबाड़खाने के नगाड़े को जब्त करने के आदेश भी प्रदान किए। 

पागल-सा लगने वाला वह व्यक्ति वहां से भाग खड़ा हुआ तथा नगाड़े को कौतूहलवश पुलिस ने न्यायाधीश महोदय के घर पर पहुंचा दिया जहां उसे निरर्थक समझ कर एक फालतू स्थान पर पटक दिया गया। जिस दिन नगाड़ा न्यायाधीश महोदय के घर पहुंचा तभी से भूत के उपद्रव शुरू हो गए। फिर क्या था किवाड़ों को खटखटाना, छत्त पर धमा-चौकड़ी मचाना, आंगन में उछल-कूद करना जैसी आम घटनाएं निरन्तर होने लगी। काफी तलाश करने पर भी कोई दिखलाई नहीं देता था। स्वयं प्रयत्न करने और नौकरों की सहायता लेने के बाद भी जब इस अदृश्य उपद्रव का समाधान न हो सका तो पुलिस की सहायता ली गई, किन्तु पुलिस देखते, सुनते हुए भी कुछ न कर सकी। 

एक दिन न्यायाधीश महोदय ने देखा कि किसी हट्टे-कट्टे आदमी ने जोर का धक्का देकर किवाड़ खोल लिए हैं, किवाड़ों की चटखनी टूट गई और वह मजबूत व्यक्ति ओवरकोट पहने हुए घर में भीतर घुसता ही चला आया। आंगन से होता हुआ वह सीढियों से छत पर जा पहुंचा। आश्चर्य की बात यह थी कि घर वालों को ओवरकोट तो आंखों से दीख रहा था। किन्तु उसे पहनने वाले के हाथ, पैर चेहरा आदि सब कुछ नदारद था। आंखों देखी इस घटना के कारण न्यायाधीश महोदय ने इसे भूत की ही करतूत मान लिया। अब वे इसका समाधान ढूंढ़ने लगे। 

जब न्यायाधीश महोदय ने काफी प्रयत्न किया तो एक कोने में कबाड़खाने का वह नगाड़ा ही उन्हें सन्देह की ओर ले जाता नजर आया, जिसे एक विक्षिप्त व्यक्ति द्वारा छीना गया था। आखिरकार उन्होंने उस नगाड़े को वहां से हटवा दिया। जब से नगाड़ा वहां से हटाया गया तभी से भूत के उपद्रव भी समाप्त हो गए। 

इतना ही नहीं उस पागल व्यक्ति का भी पता लगाया गया तो ज्ञात हुआ कि वह सदा से ही विक्षिप्तावस्था में नहीं था। सस्ता माल देखकर कबाड़खाने से वह इस नगाड़े को खरीद लाया था। जिस दिन से उसने यह खरीदा था तभी से पागल होकर भीड़ इकट्ठी करने लगा था। 

जिस दिन से यह नगाड़ा जब्त किया गया वह पुनः सामान्य स्थिति में पहुंच गया और मोक्सन के घर में भी शान्ति छा गई। इस प्रकार समझा गया कि नगाड़े के असली मालिक की प्रेतात्मा भूत बनकर अपनी प्रिय वस्तु नगाड़े से चिपक रही है और वह जहां पर भी पहुंचा उपद्रव निश्चित रूप से हुए। 

 

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