गेलिलियो गैलिली की जीवनी | Galileo Galilei Biography in Hindi

गैलिलियो का जीवनी

गेलिलियो गैलिली की जीवनी और आविष्कार| Galileo Galilei Biography in Hindi

आपलोगो ने दूरबीन देखी होगी, जिसमें से दूर की चीजें नजदीक और बड़ी-बड़ी दिखाई देती हैं। आम तौर पर इसका उपयोग जहाजों में होता है। दूरबीन से ही हम चाँद और सितारों को देखकर उनके बारे में जान सके हैं। इसको बनाने का श्रेय इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो को है। 

गैलीलियो आज से चार सौ साल पहले 14 फरवरी, 1564 में इटली के पीसा नगर में पैदा हुए थे। पीसा नगर का नाम तुमने सुना होगा। पीसा नगर में ही तो संसार का एक आश्चर्य है-पीसा मीनार । यह मीनार एक ओर को झुकी हुई है। इस विचित्र मीनार को देखने के लिए हजारों सैलानी दूर-दूर से इस नगर में जाते हैं। 

गैलिलियो का जीवनी

गैलीलियो के पिता अपने समय के बहुत बड़े विद्वान् थे। उन्होंने गैलीलियो को बड़े परिश्रम और लगन से पढ़ाया। वह उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे, पर भाग्य को तो कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने गैलीलियो को डॉक्टरी की शिक्षा दिलाने के लिए एक कॉलेज में भरती करवाया। गैलीलियो बचपन से ही बहुत समझदार और प्रखर बुद्धि का था।

वह दूसरे बच्चों से सदा अलग-थलग रहता था। वह हर वस्तु के बारे में सोचा करता था कि यह कैसे बनी, इसे किसने बनाया और इससे क्या-क्या काम लिये जा सकते हैं? क्या इससे भी अच्छी वस्तु बन सकती है? वह घंटों एकांत में ऐसे प्रश्नों को सुलझाने का प्रयत्न करता, जो उसके मस्तिष्क में भिन्न-भिन्न वस्तुओं को देखकर पैदा होते थे। 

अब एक रोचक घटना सुनो, जिसने गैलीलियो के जीवन में क्रांति ला दी। एक दिन बालक गैलीलियो गिरजाघर में प्रार्थना करने के लिए अपने माता-पिता के साथ गया था। गिरजे की छत नीची थी। उसके बीचोबीच एक बड़ा लैंप लटका हुआ था। उन दिनों बिजली तो थी नहीं, इसलिए लोग इस प्रकार के भारी लैंपों में चरबी और मोम जलाया करते थे। संयोग की बात है कि उस दिन आँधी आ गई।

तेज हवा के कारण गिरजे का लैंप जोर-जोर से हरकत करने लगा। हवा का तेज झोंका आता, तो लैंप झटके के साथ दूर चला जाता। जब हवा कम होती, तो फिर अपनी जगह पर वापस आ जाता । गैलीलियो बहुत समय तक लैंप को झूलते हुए देखता रहा। फिर उसने एक अजीब बात की खोज की कि लैंप चाहे कितनी ही दूरी पर जाकर वापस आए, उसे वापस लौटने में उतना ही समय लगता है, जितना कम दूरी को तय करने में लगता है ।

यह वैज्ञानिक सिद्धांत बाद में बड़ा लाभदायक सिद्ध हुआ। अब यह पेंडुलम का सिद्धांत कहलाता है। अब भी तुम्हारे घर में ऐसी घड़ी मौजूद होगी जिसमें पेंडुलम लगा होता है। यह पेंडुलम घड़ी चलने के साथ ही हरकत करने लगता है। यह पेंडुलम गैलीलियो  की खोज का ही नतीजा है। 

गैलीलियो जितना अधिक वस्तुओं की बनावट पर विचार करता, उतना ही उसका मस्तिष्क प्रखर होता जाता था। गैलीलियो की पैनी बुद्धि पर उसके माता-पिता और अध्यापक बहुत प्रसन्न थे। पर जल्दी ही उसके अध्यापक गैलीलियो से उकता गए, क्योंकि वह उनसे अजीब-अजीब प्रश्न पूछा करता था। कभी-कभी तो वह उनके उत्तरों पर बहस भी करने लगता, जो उस युग में सख्त गुस्ताखी समझी जाती थी।

एक दिन बहस के बीच गैलीलियो के अध्यापक ने उसे बताया कि यदि असमान वजन की दो वस्तुएँ ऊँचाई से धरती की ओर फेंकी जाएँ, तो भारी वस्तु धरती पर पहले गिरेगी और हलकी वस्तु बाद में गिरेगी। गैलीलियो अध्यापक की बात मानने को तैयार न हुआ। उसका कहना था कि सभी वस्तुएँ, चाहे हलकी . हों या भारी, एक ही समय में और एक ही गति से धरती पर गिरती हैं। अध्यापक ने अपनी बात मनवाने के लिए दबाव दिया, तो गैलीलियो ने उससे कहा कि प्रयोग करके देखे लेते हैं।

अस्तु उसने दो ईंटें उठाईं।एक हलकी थी और दूसरी उससे कई गुना भारी ! इन ईंटों को लेकर वह पीसा नगर की संसार-प्रसिद्ध पीसा मीनार की अंतिम मंजिल पर चढ़ गया। बहुत-से लोग यह तमाशा देखने के लिए जमा हो गए। गैलीलियो ने अंतिम मंजिल से दोनों ईंटें नीचे गिरा दी। लोग यह देखकर हैरान रह गए कि दोनों ईंटें एक ही समय में और एक साथ धरती पर गिरी।

चूंकि इस प्रयोग से गैलीलियो के अध्यापक का अपमान हुआ था इसलिए कॉलेज के सभी अध्यापक गैलीलियो से नाराज हो गए। उन्होंने उसकी शिक्षा में रोड़े अटकाने आरंभ कर दिए । विवश होकर वह कॉलेज से निकल गया। वह इटली के दूसरे नगर पीडुआ में चला गया। वहाँ वह गणित की शिक्षा प्राप्त करने लगा। थोड़े ही समय में वह गणित में होशियार हो गया और एक दिन ऐसा आया कि उसे पीडुआ विश्वविद्यालय में गणित का प्राध्यापक नियुक्त कर दिया गया।

1602 में गैलीलियो की आयु अड़तीस बरस थी। तब उसने एक यंत्र बनाया, जिसे थर्मामीटर कहते हैं। थर्मामीटर तो तुम जानते हो। इससे शरीर के ताप का सही अनुमान लगाया जाता है। बाद में उसने एक अन्य यंत्र बनाया, जिससे मनुष्य की नाड़ी के चलने की गति का पता लग सकता था। इस यंत्र से डॉक्टरों को रोगियों का इलाज करने में बड़ी सहायता मिली और दूर-दूर तक गैलीलियो की बुद्धि और विद्वत्ता की धाक जम गई। 

 

उन्हीं दिनों गैलीलियो वीनस गया। वहाँ उसे पता लगा कि बैलजियम के किसी व्यक्ति ने एक ऐसा यंत्र बनाया है जिससे दूर की वस्तुएँ बड़ी दिखाई देती हैं। पर, त्रुटि यह थी कि उसमें हर वस्तु उलटी नजर आती थी। गैलीलियो यह सुनकर दूरबीन बनाने की तैयारियाँ करने लगा। उसने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद दूरबीन के दो शीशे तैयार किए और उसे ताँबे की बनी हुई एक नलकी के सिरों पर फिट कर दिया। यह थी संसार की पहली सफल दूरबीन । इसमें कई-कई मील दूर की वस्तुएँ बड़ी दिखाई देती थीं तथा साफ और सीधी नजर आती थीं। 

यह दूरबीन क्या ईजाद हुई कि इटली में भूचाल आ गया । हजारों लोग इस दूरबीन को देखने के लिए टूट पड़े। लोग इसे जादू का खिलौना समझते थे और गैलीलियो के लिए उनके दिल में आदर के बजाय भय पैदा होने लगा। गैलीलियो ने कई प्राध्यापकों और बड़े-बड़े आदमियों के कहने पर कई दूरबीनें बनाकर दी। वह स्वयं भी अपनी दूरबीन को और अधिक उत्तम बनाने का प्रयत्न करता रहा। अपने इन प्रयत्नों में वह बहुत सफल रहा और आखिर एक दिन उसने ऐसी दूरबीन बनाई, जो दूर की चीजों को बत्तीस गुना बड़ा करके दिखाती थी।

उन दिनों चाँद, सूरज और सितारों के बारे में लोगों की जानकारी बहुत गलत और अजीब थी। लोगों का विचार था कि धरती एक स्थान पर ठहरी हुई है और सूरज धरती के चारों ओर घूमता है। चाँद और सितारे किसी.चमकदार धातु के छोटे-बड़े टुकड़े हैं, जिन्हें आकाश में जड़ दिया गया है और आकांश-गंगा वास्तव में एक रास्ता है, जिस पर देवता ही चल सकते हैं। 

गैलीलियो ने जब अपनी दूरबीन से चाँद, सितारों और सूरज को देखा, तो वह लोगों के गलत ज्ञान पर हैरान हुआ। उसे तुरंत पता लग गया कि चाँद धरती के गिर्द घूमता है और धरती सूरज के गिर्द घूमती है। आकाश-गंगा देवताओं का रास्ता नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों सितारों का पुंज है, जिसमें कई सितारे सूरज से भी लाखों गुना बड़े हैं। ये सितारे धरती से बहुत दूर होने के कारण चमकदार अणुओं के समान दिखाई देते हैं। 

जब गैलीलियो ने लोगों के सामने इन नई बातों को प्रकट किया, तो देश भर में एक हंगामा उठ खड़ा हआ। क्योंकि इन बातों से बड़े-बड़े पादरियों, प्रोफेसरों और विद्वानों के झूठ की पोल खुलती थी। ये सब लोग गैलीलियो के दुश्मन हो गए। इन्होंने गैलीलियो का इतना विरोध किया कि गैलीलियो को वीनस छोड़कर फ्लोरेन्स चले जाना पड़ा, जहाँ उसकी पुत्री रहती थी। 

फ्लोरेन्स में आकर भी गैलीलियो ने अपने प्रयोग जारी रखे। इस बार उसने एक नया यंत्र तैयार किया जिसे खुर्दबीन या सूक्ष्मदर्शक यंत्र कहते हैं। यह यंत्र दूरबीन के ही सिद्धांत पर बनाया गया था। इसकी सहायता से नजदीक की छोटी और सूक्ष्म चीजें बहुत बड़ी नजर आती थीं। इस यंत्र के शीशे इतने शक्तिशाली थे कि मनुष्य के बाल को जब शीशों से देखा जाता, तो वह एक मोटी रस्सी के समान नजर आता था। यह यंत्र बाद में मनुष्य के बहुत काम आया और अब तक आ रहा है। इसकी सहायता से पहले-पहल डॉक्टरों ने मनुष्य के रक्त में उन छोटे-छोटे अणुओं को देखा, जो रोग के कीटाणुओं का मुकाबला करते हैं। 

गैलीलियो ने सोचा कि इन सभी आविष्कारों को एक पुस्तक में इकट्ठा कर देना चाहिए, ताकि आनेवाली पीढ़ियाँ इससे लाभ उठा सकें। इस पुस्तक में उसने चाँद, सूरज, सितारों और धरती के बारे में अपने दृष्टिकोण को विस्तार और तर्क के साथ लिखा। इसका समाचार न जाने कैसे रोम में ईसाइयों के धर्मगुरु पोप तक पहुँच गया।

उसने गैलीलियो को रोम में बुलाया और उस पर मुकदमा चलाया। इस बार उसे मौत की सजा मिलती, यदि रोम के लोग उसका पक्ष न लेते। बड़े-बड़े लोगों की सिफारिश पर पोप ने उसे मुक्त तो कर दिया, पर उसकी पुस्तक को जब्त कर लिया और गैलीलियो से वचन ले. लिया कि वह अपने विचार किसी को न सुनाए और न ही कोई पुस्तक लिखे। गैलीलियो ने पोप के कहने पर यह लिख दिया कि “सूरज, चाँद और धरती के बारे में मेरे विचार गलत थे और अब मैं यह मानता हूँ कि धरती स्थिर है और सूरज इसके गिर्द घूम रहा है।” 

अदालत से जब वह बाहर आया, तो उसने अपने एक मित्र से कहा, “मैं बूढ़ा और बीमार हूँ, इसलिए मैंने पोप के कहने पर यह बात लिख दी है, पर सचाई अपनी जगह अटल है। इसे कोई नहीं बदल सकता। धरती सूरज के गिर्द घूम रही है और घूमती रहेगी।” 

पादरियों के अंधविश्वास और विरोध का परिणाम यह निकला कि गैलीलियो इस सदमे से दिन-प्रतिदिन बीमार होता गया। आखिर वह 8 जनवरी, 1642 में 78 वर्ष की आयु में स्वर्ग सिधार गया।

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