मजेदार रोचक कहानियां -स्वर्ग की धरती,जैस्पर और राक्षस,हाथियों की धरती 

मजेदार रोचक कहानियां-स्वर्ग की धरती

 मजेदार रोचक कहानियां-स्वर्ग की धरती

बहुत समय पहले की बात है। किसी देश के एक राजकुमार ने कहीं ‘स्वर्ग की धरती’ के बारे में पढ़ा। उस स्वर्ग की धरती में बहुत सुंदर बाग थे। उस बाग में खुशबूदार फूल खिलते और रंगीन फव्वारे दिखाई देते। यह सब पढ़कर राजकुमार मोहित हो उठा। 

एक दिन शाम को राजकुमार जंगल की सैर करके वापस लौट रहा था। अंधेरा हो गया था और तेज आंधी चल रही थी। आंधी से बचने के लिए राजकुमार एक चट्टान पर चढ़ गया। जब उसने अपने आसपास नजर दौड़ाई, तो उसे कुछ दूरी पर स्थित एक गुफा में आग जलती दिखाई दी। वह उस गुफा में चला गया। वहां आग के पास एक बूढ़ी औरत बैठी थी। वह बोली, “जब मेरे बेटे घर आते हैं, तो तेज हवा चलने लगती है। वे लोग स्वर्ग की धरती के चार पवन हैं और यह पवन गुफा है।” 

शीघ्र ही गुफा में उत्तर पवन ने प्रवेश किया और कहा, “मां, मैं पूरे एक माह से ध्रुव प्रदेश में था। उस जगह बहुत सुंदर जानवर पाए जाते हैं।” 

तभी पश्चिम पवन ने गुफा के भीतर आते हुए कहा, “मां! मैं जंगलों से होकर आ रहा हूं। मैंने वहां तूफानी हवा चलाई और बतखों को पानी में भेज दिया।” 

मजेदार रोचक कहानियां-स्वर्ग की धरती

कुछ देर बाद दक्षिण पवन ने आकर कहा, “मां, मैं अफ्रीका चला गया था। वहां मैंने खूब मस्ती की।” 

अंत में पूर्व पवन आया और बोला, “मैं चीन देश से आ रहा हूं।” 

बूढ़ी औरत ने अपने बेटे पूर्व पवन से कहा, “बेटा, तुम कल स्वर्ग की धरती पर जा रहे हो। वहां समझदारी के झरने का पानी जरूर पीना, ताकि तुम्हारी बुद्धि बढ़ सके।” । 

पूर्व पवन बोला, “मां! मैं ऐसा ही करूंगा। मैं वहां की राजकुमारी को सबका सलाम पहुंचा दूंगा।” 

यह सुनकर राजकुमार ने पूर्व पवन से आग्रह किया, “क्या मैं भी तुम्हारे साथ स्वर्ग की धरती में जा सकता हूं? कृपया मुझे अपने साथ ले चलो। मैं स्वर्ग की धरती देखना चाहता हूं।” 

पूर्व पवन ने हामी भर दी। वह बोला, “ठीक है, राजकुमार। मैं तुम्हें अपने साथ अवश्य ले चलूंगा।” 

अगले दिन पूर्व पवन और राजकुमार स्वर्ग की धरती की ओर निकल पड़े। बादलों के बीच तैरते हुए वे एक सुंदर जगह जा पहुंचे। वहां की हवा में फूलों और मीठे फलों की गंध फैली हुई थी। 

स्वर्ग की धरती की राजकुमारी ने उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें अपने महल में ले गई। राजकुमार को उससे प्यार हो गया। वह बोला, “मैं हमेशा के लिए यहीं रुकना चाहता हूं।” 

राजकुमार की बात सुनकर राजकुमारी अचंभित हो गई और बोली, “मैं तुम्हें प्रतिदिन कई तरह से लुभाने की कोशिश करूंगी, लेकिन तुम मेरी बातों में न आना। जिस दिन तुम लालच में आ गए, उसी दिन तुम्हें तुम्हारे देश में वापस भेज दिया जाएगा।” 

अगले कुछ दिनों तक राजकुमार को अनेक चीजों का लोभ दिया गया, लेकिन वह सीधा और ईमानदार युवक था। उसने किसी भी लालच या बहकावे में आने से इनकार कर दिया। 

यह देखकर राजकुमारी बहुत खुश हुई और बोली, “राजकुमार, तुम बहुत ईमानदार और बहादुर हो। मैं तुम्हारी ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुई। मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूं।” । 

मजेदार रोचक कहानियां-स्वर्ग की धरती

शीघ्र ही राजकुमारी ने राजकुमार के साथ शादी कर ली और वे दोनों प्रसन्नतापूर्वक रहने लगे। अब राजकुमार अपने राज्य के अलावा स्वर्ग की धरती पर भी शासन करने लगा था। 

रोचक कहानीजैस्पर और राक्षस

एक बार जैस्पर नामक एक व्यापारी अपने कुछ सहायकों के साथ जंगल से गुजर रहा था, तभी भारी तूफान आ गया। उन्होंने सोचा कि निकट स्थित गुफा में शरण ली जाए। फिर वे उस गुफा में चले गए। 

अंधेरा होते ही जैस्पर और उसके सहायकों पर राक्षसों ने हमला कर दिया। वे उन विशाल राक्षसों का सामना नहीं कर पाए। जैस्पर और उसके सहायक बंदी बना लिए गए। फिर उन लोगों को एक ऐसी गुफा में रखा गया, जहां मांस भूनने के लिए गड्ढा बना था। 

कुछ देर बाद एक आंख तथा लंबे-तीखे दांतों वाले एक राक्षस ने गुफा में कदम रखा और अपने लंबे नाखूनों वाले पंजे से एक सहायक को उठा लिया। फिर उसने जैस्पर के उस सहायक को निगलने में एक मिनट भी नहीं लगाया। इसके बाद वह गहरी नींद में सो गया। 

तब जैस्पर ने फुसफुसाकर अपने सहायकों से कहा, “हमारे घोड़े कहीं खो गए हैं। अब हमें लकड़ियां लाकर गाड़ी बनानी होगी, ताकि हम यहां से भाग सकें।” इसके बाद वह अपने सहायकों के साथ जंगल में गया और वे गाड़ी बनाने लगे। 

रोचक कहानी-जैस्पर और राक्षस

लेकिन कुछ देर बाद एक आंख वाले राक्षस की नींद टूट गई और वह उन्हें जंगल से खोजकर अपनी गुफा में वापस ले आया। 

इसके बाद राक्षस ने जैस्पर के एक अन्य सहायक को खा लिया। जब वह फिर सो गया, तो जैस्पर ने अपने शेष सहायकों से कहा, “इस राक्षस से बचने के लिए हमें एक अन्य कोशिश करनी चाहिए।” फिर उन्होंने मांस भूनने के लिए वहां रखी लोहे की सलाखें उठा लीं। वे सलाखें आग से तपकर लाल हो गई थीं। जैस्पर ने वह सलाख राक्षस की इकलौती आंख में घुसा दी। राक्षस दर्द के कारण बिलबिलाते हुए बाहर की तरफ भागा। 

तत्पश्चात जैस्पर और उसके सहायक जंगल की ओर दौड़ पड़े, परंतु वह राक्षस दो अन्य राक्षसों के साथ वहां पहुंच गया। राक्षसों ने उन लोगों पर भारी पत्थर बरसाने आरंभ कर दिए। ऐसे में कई लोग मारे गए, लेकिन जैस्पर अपने दो सहायकों सहित स्वयं को बचाने में कामयाब रहा। 

रोचक कहानी-जैस्पर और राक्षस

फिर वे तीनों तब तक भागते रहे, जब तक बुरी तरह थक नहीं गए। वे वहां जाकर रुके, जहां फलों के पेड़ थे। शीघ्र ही वे गहरी नींद में सो गए। 

अचानक फुफकारने की आवाज सुनकर जैस्पर और उसके सहायकों की आंखें खुल गईं। एक बड़े सांप ने जैस्पर के एक सहायक को निगल लिया। यह देखकर जैस्पर अपने दूसरे सहायक के साथ पेड़ पर चढ़ने लगा। तभी भयंकर सांप भी उनके पीछे पहुंच गया और उसके दूसरे सहायक को भी निगल गया। इसके बाद सांप चुपचाप पेड़ से नीचे उतर गया। 

रोचक कहानी-जैस्पर और राक्षस

थोड़ी देर बाद जैस्पर भी पेड़ से नीचे उतरा। उसने कंटीले झाड़ और कांटे जमा करके उन्हें पेड़ के आसपास बिछा दिया। फिर वह पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। आधी रात के बाद वह विशाल सांप फिर वापस आया, लेकिन कंटीले झाड़ों और कांटों की वजह से वह पेड़ पर नहीं चढ़ सका। 

अगले दिन जैस्पर को कुछ सौदागर जाते दिखाई दिए। वह पेड़ के इतना ऊपर था कि स्वयं नीचे नहीं उतर सकता था। उसने अपना कपड़ा नीचे गिरा दिया। तब दो लोगों ने पेड़ पर चढ़कर उसे नीचे उतारा। 

जैस्पर ने उन्हें अपने सहायकों के साथ घटी सारी घटना सुना दी। वे जैस्पर को अपने साथ ले गए। इस प्रकार व्यापारी जैस्पर अनेक कठोर कष्ट सहकर सही-सलामत अपने घर पहुंच गया। 

मजेदार कहानियां-चरवाहा राजकुमार

एक बार की बात है। किसी देश के राजकुमार को पड़ोसी देश की राजकुमारी से प्यार हो गया। वह उससे विवाह करना चाहता था। उसने फैसला किया कि वह उसे अनमोल उपहार भेजेगा।। 

अगले दिन राजकुमार ने राजकुमारी को एक ऐसे पौधे का गुलाब भेजा, जिस पर पूरे पांच साल में मात्र एक बार और एक गुलाब उगता था। इसके अलावा उसने राजकुमारी के लिए चांदी के पिंजरे में एक बुलबुल भी भेजी, जो बहुत मीठा गीत गाती थी। जब वह बुलबुल गीत गाती थी, तो सभी लोग अपना काम छोड़कर उसे सुनने के लिए आ जाते थे। 

मजेदार कहानियां-चरवाहा राजकुमार

राजकुमार के नौकर उपहार लेकर राजकुमारी को देने के लिए उसके महल की तरफ रवाना हो गए। महल में पहुंचकर उन्होंने उपहारों के बॉक्स खोले। उस अनूठे और दुर्लभ गुलाब को देखते ही राजकुमारी की सहेलियां चिल्लाईं, “अरे, ये तो दुनिया का सबसे सुंदर गुलाब है!” 

लेकिन राजकुमारी खुश नहीं हुई। वह बोली, “इस गुलाब को पौधे से तोड़ा गया है। यह कुछ ही घंटों में मुरझा जाएगा।” इसके बाद जब नौकरों ने चांदी के पिंजरे से पर्दा हटाया, तो बुलबुल मीठा गीत गाने लगी। बुलबुल का गीत सुनकर वहां उपस्थित सभी लोग बहुत खुश हुए, लेकिन राजकुमारी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने कहा, “यह पक्षी अपनी मर्जी से गाता है। अगर मेरे पास खिलौना पक्षी होता, तो मैं उसकी चाबी घुमाती और वह गाने लगता।” 

मजेदार कहानियां-चरवाहा राजकुमार

राजकुमारी की बात सुनकर राजकुमार निराश हो गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह सोचने लगा कि क्या किया जाए, जिससे राजकुमारी खुश हो सके। तभी उसे एक उपाय सूझा। वह एक आम आदमी का वेश धारण करके राजकुमारी के महल में पहुंचा और राजा से काम मांगा। राजा ने कहा, “तुम मेरी भेड़ों की देखरेख कर सकते हो।” इस तरह राजकुमार को शाही चरवाहे का काम मिल गया और उसे रहने के लिए एक झोंपड़ी दे दी गई। 

राजकुमार के पास एक जादुई बर्तन था, जिसके किनारों पर घंटियां लगी थीं। जब उस बर्तन में पानी उबाला जाता, तो घंटियों से मधुर धुन निकलती थी। उस बर्तन की भाप से सारे शहर में बनने वाले सभी प्रकार के स्वादिष्ट भोजनों एवं व्यंजनों की महक भी आती थी। 

एक दिन राजकुमारी अपनी दासियों के साथ राजकुमार की झोंपड़ी के पास से गुजर रही थी। बर्तन की आवाज और गंध को महसूस करके उसने एक दासी से कहा, “जाकर पूछो कि उस बर्तन का क्या मूल्य होगा।” 

राजकुमार ने दासी से कहा, “मैं चाहता हूं कि राजकुमारी इस झोंपड़ी के अंदर आकर मेरे लिए खाना पका दें।” 

जब राजकुमारी चरवाहे की झोंपड़ी में जा रही थी, तो उसके पिता (राजा) ने उसे देख लिया। ऐसे में राजा को बहुत गुस्सा आया। उसने राजकुमारी तथा उसकी दासियों और चरवाहे को अपने राज्य से बाहर जाने का आदेश दे दिया। लेकिन राजकुमारी बहुत विनम्र और समझदार थी। उसने कहा, “पिता जी, आप दासियों और चरवाहे को राज्य से न निकालें। इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, सारी गलती मेरी है।” 

मजेदार कहानियां-चरवाहा राजकुमार

राजकुमारी में आने वाले इस बदलाव को देखकर राजकुमार बहुत प्रसन्न हुआ। उसने राजकुमारी से कहा, “मैं कोई चरवाहा नहीं हूं। मैं वही राजकुमार हूं, जिसने तुम्हें उपहार भिजवाए थे। मुझसे विवाह कर लो।”

राजा राजकुमारी और राजकुमार की बातें सुन रहे थे। उन्हें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि वह चरवाहा नहीं, बल्कि पड़ोसी देश का राजकुमार है। फिर शीघ्र ही राजकुमार और राजकुमारी का विवाह हो गया। भविष्य में दोनों राज्यों पर राजकुमार और राजकुमारी ने राज किया। 

बहादुर नगाड़े वाला

एक बार किसी छोटे शहर में एक नि:संतान दंपति रहते थे। एक दिन वे लोग चर्च में प्रार्थना कर रहे थे, तभी पत्नी ने चर्च की दीवारों पर फरिश्तों की सुंदर तस्वीरें देखीं। उसने पति से कहा, “काश! हमारा भी कोई बच्चा हो, जिसके फरिश्तों की तरह सुनहरे बाल हों।” 

बहादुर नगाड़े वाला

शीघ्र ही उस नि:संतान दंपति की यह इच्छा पूरी हो गई। उनके घर एक सुनहरे बालों वाले लड़के ने जन्म लिया। उन्होंने बड़े प्यार-दुलार से उसका नाम चार्ली रखा। वह धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। 

चार्ली के पिता नगाड़े और ड्रम बजाकर सुंदर गीत गाते थे। चार्ली बचपन से ही बहुत दयालु, व्यवहार-कुशल, खुश-मिजाज और मदद करने वाला लड़का था। चार्ली की आवाज बहुत अच्छी और मधुर थी। वह भी अपने पिता की तरह ड्रम तथा नगाड़े बजाकर सुंदर गीत गाता था। सभी लोग उसके सुंदर गीत और व्यवहार के कारण उसे बहुत पसंद करते थे। 

चार्ली की मां चाहती थी कि वह चर्च में सबके साथ मिलकर गाना गाए। वहीं दूसरी ओर उसके पिता चाहते थे कि वह उनकी तरह ड्रम बजाने के बजाय कोई बड़ा काम करके नाम कमाए। चार्ली ने कहा, “मैं सैनिक बनना चाहता हूं। मैं वर्दी पहनकर अपने देश 

और जनता की सेवा करूंगा।” । 

बहादुर नगाड़े वाला

एक दिन चार्ली ने सुना कि उसके देश और पड़ोसी देश में लड़ाई होने वाली है। राजा चाहता है कि देश के सारे नौजवान सेना में भर्ती हो जाएं। यह सुनकर चार्ली की खुशी का ठिकाना न रहा। 

लड़ाई के मैदान में जीवन आसान नहीं है। सैनिकों को भोजन और पानी के बिना खुले आकाश के नीचे सोना पड़ता है। ऐसे में चार्ली अपना नगाड़ा बजाकर नौजवान सैनिकों का मन बहलाता था। 

धीरे-धीरे जंग का आखिरी दिन आ पहुंचा। सूरज न निकलने से काफी सर्दी हो रही थी। सैकड़ों सैनिक मारे जा चुके थे और बहुत से सैनिक घायल हुए थे। चार्ली ने अपना नगाड़ा बजाते हुए जोर से कहा, “हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। साथियो! आगे बढ़ो और दुश्मन का सफाया कर दो।” 

जब तक चार्ली की टुकड़ी को वापस जाने का आदेश नहीं मिला, तब तक वह नगाड़ा पीटकर अपने साथियों को जोश दिलाता रहा। सभी सैनिक आगे बढ़ते रहे। शीघ्र ही उसके साथियों ने दुश्मनों का सफाया कर दिया और उनकी जीत हुई। उस दिन चार्ली सबका हीरो बन गया। सभी सैनिकों ने उसे अपना रक्षक माना और उसके साथ ताल से ताल मिलाकर जीत के गीत गाने लगे। चार्ली जोर-जोर से नगाड़ा बजाने लगा। 

चार्ली को उसकी टुकड़ी के नेता ने अपने पास बुलाकर कहा, “चार्ली! अगर आज तुम न होते, तो हम यह लड़ाई हार जाते। हमारे सैनिकों का मनोबल टूट चुका था। तुमने अपने साहस के बल पर सबमें नया जोश भर दिया था। हमें तुम पर बड़ा गर्व है।” । 

जब चार्ली ने यह सुना, तो उसका सीना चौड़ा हो गया। उसे बहुत खुशी हुई कि उसका हुनर किसी तरह देश के काम आ सका। चार्ली का यह कारनामा राजा तक भी पहुंचा और उसे वीरता पुरस्कार के रूप में मेडल प्रदान किया गया। भरी सभा में उसका सम्मान हुआ और सबने तालियां बजाईं।

कुछ दिनों बाद जब चार्ली गले में चांदी का मेडल पहनकर अपने शहर लौटा, तो उसके माता-पिता ने उसे अपने गले लगाकर चूम लिया। उन्हें अपने बेटे के कार्यकलापों पर बहुत गर्व था। 

बहादुर नगाड़े वाला

वहां के सभी लोगों ने कहा, “किसने सोचा था कि चार्ली अपने नगाड़े की सहायता से सैनिकों में इतना जोश भर देगा कि हम हारी हुई बाजी जीत लेंगे।” इस तरह चार्ली के माता-पिता दोनों की इच्छा पूरी हुई। मानो उनके घर में 

चार्ली के रूप में एक फरिश्ते ने ही जन्म लिया था। 

मजेदार कथा- हाथियों की धरती 

बहुत समय पहले की बात है। अल-जहीर नाम का एक बादशाह था। एक दिन उसने अपने मंत्री रकीब को सेरिंदिब के राजा के पास बहुत से अनमोल उपहार सहित भेजा। राजा को वे उपहार बहुत पसंद आए। जब रकीब अपने राज्य वापस जाने लगा, तो राजा ने भी बादशाह अल-जहीर के लिए बहुत से अच्छे और अनूठे उपहार भिजवाए। 

मजेदार कथा- हाथियों की धरती 

रकीब अपने कारवां के साथ अपने राज्य की ओर चल पड़ा। रकीब का कारवां अभी कुछ ही दूर गया था कि उन पर रेगिस्तानी लुटेरों ने हमला कर दिया। उन्होंने कारवां का सारा सामान लूट लिया और कारवां के यात्रियों को गुलाम बनाकर बेच दिया। बादशाह अल-जहीर के मंत्री रकीब को हाथी-दांत के एक व्यापारी का गुलाम बना दिया गया। 

जब हाथी-दांत के व्यापारी को पता चला कि रकीब धनुष-बाण चलाने में निपुण है, तो उसने उसे पास वाले घने जंगल में भेजते हुए कहा, “जंगल में बहुत से हाथी रहते हैं। तुम रोजाना एक-एक हाथी मारकर मुझे खबर भेजते रहना।” अगले दिन रकीब एक हाथी को मारने में सफल रहा। यह देखकर व्यापारी बहुत खुश हुआ। उसने 

रकीब से कहा, “तुम इस जगह एक बड़ा-सा गड्ढा खोदो और इसे यहीं गाड़ दो। जब यह सड़ जाएगा, तो हमें इसके दांत मिल जाएंगे।” 

इस प्रकार रकीब पूरे दो महीने तक जंगल में हाथियों को मारकर वहीं दबाता रहा। एक दिन जब वह हाथियों के इंतजार में पेड़ पर बैठा था, तो हाथियों का एक झुंड उसके पेड़ के पास आकर दहाड़ उठा। ऐसे में रकीब बुरी तरह डर गया। तभी एक हाथी ने अपनी सूंड से वह पेड़ उखाड़ दिया। जब रकीब नीचे गिरा, तो दूसरे हाथी ने उसे उठाकर अपनी पीठ पर बिठा लिया। रकीब को एहसास हुआ कि अब उसका अंतिम समय आ गया है। हाथी उससे अपने साथियों की मौत का बदला अवश्य लेंगे। 

मजेदार कथा- हाथियों की धरती 

रकीब सोच रहा था कि अब उसका बचना मुश्किल है। उसे बचपन से लेकर अब तक का अपना सारा जीवन याद आने लगा। उसे अपने राज्य और परिवार की याद सताने लगी। वह अपने परिवार के साथ कितने सुख से रहता था। फिर उसकी किस्मत ने पलटा खाया और उसे ये दिन देखने पड़े। 

रकीब की आंखों में आंसू आ गए। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसके जीवन का आखिरी समय ऐसा होगा। आज न तो उसके परिवार का कोई सदस्य उसके साथ था और न ही वह अपने देश में था। उसने अपने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगी और अपने अंत की प्रतीक्षा करने लगा। 

हाथियों का झुंड रकीब को लेकर एक पर्वत पर पहुंचा और उसे वहां उतारकर वापस चला गया। रकीब ने अपने आसपास देखा-वह जगह हाथियों की हड्डियों और हाथी-दांतों से भरी पड़ी थी। उसने मन-ही-मन में कहा, ‘ओह! लगता है, यह हाथियों की कब्रगाह है। वे मुझे यहां इसलिए लाए हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उन्हें हाथी-दांत के लिए मारा जाए। वे चाहते हैं कि मैं यहीं से हाथी-दांत जमा कर लूं।’ 

मजेदार कथा- हाथियों की धरती 

रकीब जल्दी से शहर गया और व्यापारी को इस बारे में बताया। व्यापारी अपने सहायकों के साथ उस जगह पहुंचा। वहां उन्होंने इतना हाथी-दांत जमा कर लिया, जितना पूरे जीवन में नहीं किया था। व्यापारी ने हाथी-दांत बेचकर उस धन का कुछ हिस्सा रकीब को दे दिया और उसे कारवां के साथ उसके घर वापस भेज दिया। रकीब अपने देश पहुंचा और उसने बादशाह अल-जहीर को अपने रोमांच के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। रकीब की बात सुनकर बादशाह बहुत प्रसन्न हुआ। उसने हुक्म दिया, “रकीब के रोमांचक कारनामों को सुनहरे अक्षरों में लिखकर शाही खजाने में रखा जाए।” 

रोचक कहानियां- सैम्सी पर्वत

बहुत समय पहले जैक्स और मैक्स नामक दो भाई रहते थे। जैक्स गरीब और दयालु था, जबकि मैक्स अमीर तथा लालची इन्सान था।

 एक दिन जैक्स आग जलाने की लकड़ी प्राप्त करने के लिए जंगल में गया। जब वह घने जंगल में घूम रहा था, तो उसे एक बड़ा-सा पर्वत दिखाई दिया। वह पर्वत पेड़ों की ओट में छिपा था। जैक्स वहीं खड़ा होकर उसे हैरानी से देखने लगा। तभी अचानक उसने बारह दुष्ट डाकुओं को पर्वत की ओर जाते देखा। वह वहीं छिपकर उन्हें देखने लगा। 

रोचक कहानियां- सैम्सी पर्वत

डाकू उस पर्वत के आगे खड़े होकर चिल्लाए, “सैम्सी पर्वत! सैम्सी पर्वत!! खुल जा।” इतना कहना था कि अचानक बीच से पहाड़ खुला और सभी डाकू भीतर चले गए। जैक्स पेड़ों की ओट में छिपा उनका इंतजार करता रहा। कुछ देर बाद वे बाहर आए और चिल्लाए, “सैम्सी पर्वत! सैम्सी पर्वत!! बंद हो जा।” इतना कहते ही पहाड़ बंद हो गया। उस पहाड़ को देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता  था कि वह बीच से खुल सकता है।

जब वे डाकू वहां से चले गए, तो जैक्स उस पर्वत के पास गया और वही शब्द दोहराए। शीघ्र ही पर्वत खुल गया और वह उसके भीतर चला गया। जैक्स सोने, चांदी और हीरे-जवाहरात का खजाना देखकर हैरान रह गया। वह सब कुछ ले जाना चाहता था, लेकिन उसने दिमाग से काम लिया। जैक्स ने केवल उतना ही सोना-चांदी लिया, जितना उसकी जेबों में आ सकते थे। जब वह बाहर आया, तो उसी तरह चिल्लाकर पहाड़ को बंद होने का आदेश दिया और सैम्सी पर्वत बंद हो गया। रोचक कहानियां- सैम्सी पर्वत

जैक्स ने उस खजाने की मदद से अपने परिवार का जीवन सुखों से भर दिया। अब उसके पास भरपूर भोजन होता था। उसका घर भी पहले से बड़ा हो गया था। जैक्स गरीबों की मदद भी करने लगा था। जब पैसा खत्म हो जाता, तो वह सैम्सी पर्वत से थोड़ा सोना-चांदी ले आता। उसने अपनी जरूरतों से ज्यादा सोना कभी नहीं उठाया। मैक्स अपने भाई जैक्स के जीवन में आने वाला यह बदलाव देखकर बहुत क्षुब्ध हुआ। वह जानना चाहता था कि उसके भाई को इतना धन कहां से मिल रहा है। एक दिन उसने जैक्स का रहस्य जानने का फैसला किया और सब कुछ जान गया। 

अगले दिन मैक्स भी उस पर्वत पर अपनी गाड़ी ले गया और वही शब्द दोहराए। जब वह पहाड़ में घुसा, तो खजाना देखकर हैरान रह गया। उसे अपने भाई की अक्ल पर तरस आया। जब उसके भाई को इतने बड़े खजाने का पता मालूम था, तो वह सारा सोना एक साथ उठाकर क्यों नहीं ले गया। मैक्स ने निश्चय किया कि वह सारा सोना एक ही बार में अपने साथ ले जाएगा, ताकि अब उसके भाई को उस खजाने से कुछ न मिल सके। वह अपने साथ लाए बोरों में सोना, चांदी आदि भरने लगा। 

इस तरह कई घंटे बीत गए और मैक्स को समय का पता ही नहीं चला। जब वह सारा खजाना बोरों में भरकर अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था, तभी बाहर से आवाज सुनाई दी। 

रोचक कहानियां- सैम्सी पर्वत

वह झट से एक बोरे के पीछे छिप गया। कुछ लोगों के भीतर आने की आहट सुनाई दी। डाकू लूट का माल वहां रखने आए थे। जब उन्होंने सोने-चांदी से भरे बोरे देखे, तो सारा मामला समझ गए। डाकुओं ने गुफा में खोजबीन शुरू कर दी और कुछ ही देर में मैक्स उनके सामने था। उन्होंने उसी समय मैक्स को जान से मार डाला। 

लालची मैक्स को अपने लालच का फल मिल गया था। उसके बारे में कभी कोई नहीं जान सका। लेकिन जैक्स को सब कुछ मालूम हो गया था, जब वह दोबारा सैम्सी पर्वत से अपने लिए धन लेने गया था। 

More from my site

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

nineteen − ten =