एक फुटबॉल मैच का वर्णन पर निबंध | Football Match Essay in Hindi

एक फुटबॉल मैच का वर्णन पर निबंध

एक फुटबॉल मैच का वर्णन पर निबंध | Football Match Essay in Hindi

अब तक मुझे फुटबॉल के अनेक मैच देखने के अवसर मिले हैं, लेकिन गतवर्ष 26 जनवरी को पटना के एक स्टेडियम में केरल और बंगाल की महिला टीमों के बीच खेला गया एक फुटबॉल मैच मुझे अधिक रोमांचक एवं आकर्षक लगा, जिसका वर्णन नीचे किया जा रहा है 

सर्वप्रथम दोनों टीमों के खिलाड़ियों का उपायुक्त से परिचय कराया गया। तत्पश्चात रेफरी की सीटी बजते ही दोनों टीमों के खिलाड़ी अपने-अपने कप्तान के नेतृत्व में मैदान में उतर गईं। रेफरी द्वारा दोनों कप्तानों के बीच सिक्का उछाला गया। इसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी अपने-अपने निर्धारित स्थान पर जा पहुंचे। इस प्रकार जो मैदान कुछ देर पूर्व वीरान सा दिखता था, अब खिलाड़ियों के हरे एवं पीले परिधानों से शोभायमान हो उठा। 

रेफरी ने मैदान के बीचोबीच गेंद रख दी और सीटी बजाई। सीटी बजते ही केरल की सेंटर खिलाड़ी के स्ट्राइक से खेल आरंभ हो गया। खेल के आरंभ से ही दोनों टीमों द्वारा एक दूसरे पर जबरदस्त हमले किए गए। दोनों टीमों के खेलने की तकनीक एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी। बंगाल की टीम जहां लंबे पास देकर धावा बोलती थी, वहीं केरल की टीम छोटे-छोटे पास देते हुए एक तेज लहर की तरह गोलपोस्ट में गेंद डालने की कोशिश कर रही थी। खेल की गति के बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि आंख एक पल से ज्यादा एक जगह नहीं टिकती थी। खेल में काफी उतार-चढ़ाव हो रहा था। कभी केरल की टीम भारी पड़ती, तो कभी बंगाल की। जैसे ही कोई खिलाड़ी तेजी से गेंद लेकर विपक्षी टीम की ओर भागता, वैसे ही दर्शक ऊंचे स्वर में शोर मचाकर उसका हौसला बुलंद करते। 

इस तरह दर्शक भी इस खेल का भरपूर आनंद ले रहे थे। सबसे रोमांचक दृश्य तो तब लगता, जब गेंद केरल के कप्तान के पास होती। दर्शकों ने तो उसे ‘भूखी शेरनी’ का नाम दे दिया। जब वह गेंद लेकर बढ़ती, तो बंगाल की टीम में भूचाल आ जाता। लेकिन बंगाल की फुलबैक खिलाड़ी एक दीवार की भांति गोलपोस्ट के सामने खड़ी हर आक्रमण को विफल कर देती थी। इस संघर्षपूर्ण मैच का पूर्वार्द्ध कब खत्म हुआ, कुछ पता ही नहीं चला। 

विश्राम के बाद उत्तरार्द्ध का खेल आरंभ हो गया। दर्शक तन्मय होकर खेल का आनंद ले रहे थे। खेल के अंतिम क्षण व्यतीत होने लगे। लगता था कि हार-जीत का फैसला नहीं हो पाएगा। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि केरल की टीम ने अपनी रणनीति पूरी तरह से बदल दी थी। अब उसके खिलाड़ी बीच-बीच में अच्छे-खासे लंबे पास दे रहे थे। इस बदले हुए खेल को समझने में बंगाल के खिलाड़ियों को परेशानी हो रही थी। अब कोच से सीधे निर्देश मिल पाना भी संभव नहीं था। रणनीति में बदलाव करना और उस पर 

पूरा नियंत्रण बनाना किसी टीम की जीत का आवश्यक अंग होता है। 

तभी बंगाल की फुलबैक खिलाड़ी गेंद बचाने के चक्कर में घायल होकर मैदान से बाहर चली गई। बंगाल की रक्षा पंक्ति की इस कमजोरी को भांपकर केरल ने एक जोरदार हमला बंगाल के गोलपोस्ट पर कर दिया। उसे बंगाल की टीम विफल नहीं कर पाई, जिससे गोल हो गया। अंत में केरल विजयी रहा। मैच समाप्त होने के बाद दोनों ओर के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को उनके खेल प्रदर्शन के लिए बधाई दी। 

इस प्रकार केरल और बंगाल की महिला टीमों के बीच खेला गया यह फुटबॉल मैच मात्र मुझे ही नहीं, बल्कि वहां उपस्थित दर्शकों को भी अत्यंत अच्छा लगा। यह मैच बहुत संघर्षपूर्ण और रोमांचक होने के साथ-साथ बड़ा आकर्षक भी रहा। इसीलिए दर्शकों को भरपूर आनंद आया। 

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