फुटबॉल का आविष्कार किसने किया-Football ka aviskar kisne kiya

Football ka aviskar kisne kiya

फुटबॉल का आविष्कार किसने किया-Football ka aviskar kisne kiya

फुटबॉल का आविष्कार किसने किया –  बहुत समय पहले यूनानी साम्राज्य कई टुकड़ों में बंटा हुआ था। उस समय यह परम्परा थी कि जो देश दूसरे देश पर विजय पा लेता था, उसके सैनिक पराजित देश के मृत वीरों के सिरों को पांव से ठोकर मार कर खेलते थे। जिस प्रकार आज फुटबाल को मनोरंजन का साधन बना दिया गया है। उस समय जीत की खुशी में सैनिक नरमुंडों को उछालते थे।

जब यूनानी शासक तथा विश्व विजेता जूलियस सीजर का उदय हुआ तब भी उससे सैनिक वही क्रम दोहराते थे, पर जूलियस सीजर को इसमें कतई रुचि नहीं थी, उल्टे उसे इससे घृणा हो गई। उसने फौरन इस पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन सैनिकों को बुरा न लगे इसलिए उसने सिर के बराबर ही रबड़ के एक गोले का निर्माण करवाया। यही गोला सैनिकों को विजय प्राप्ति के अवसर पर दिया जाता था।

वे इसे सिर की भांति पांव की ठोकर से उछाल कर खेलते थे। धीरे-धीरे यह खेल प्रगति करता रहा तथा शान्ति के समय, मनोरंजन के लिए भी खेला जाने लगा। रबड़ के उस गोले में भी जब तब सुधार होते गए। धीरे-धीरे यह खेल के रूप में अन्य देशों में प्रचलित होता गया। उन दिनों खिलाड़ियों की कोई निश्चित संख्या नहीं थी। खेल के कोई निश्चित नियम भी नहीं थे। अक्सर खेल के समय उपस्थित सभी लोग उसमें शामिल हो जाते थे। लोग अपनी मनमानी करते थे। आधुनिक फुटबाल खेल 100 साल से अधिक पुराना नहीं है। 

सन 1846 में केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पहली बार इस खेल के नियम निर्धारित किए गए। यह निश्चित किया गया कि खेल में एक तरफ से ग्यारह से ज्यादा खिलाड़ी भाग नहीं ले सकते। इससे खेल में पहली वाली अनियमितता नहीं रह गई। सन् 1863 में फुटबाल एसोसिएशन की स्थापना हुई तथा फुटबाल का आधुनिक रूप विकसित होना आरंभ हुआ। उन दिनों ज्यादातर खिलाड़ी आगे बढ़कर खेलते थे तथा विपक्ष पर गोल करने के प्रयत्न में ही लगे रहते थे।

लेकिन धीरे-धीरे कुछ खिलाड़ी अपने गोल की रक्षा के लिए पीछे खेलने लगे। सन् 1875 में गोल के खंभों के ऊपर लगने वाली रस्सी को हटाकर उसके स्थान पर लकड़ी की एक पट्टी लगा दी गई। उसके बाद गोल के खंभों के पीछे जाल भी लगाया जाने लगा। इससे गोलों के बारे में पहले जो वाद-विवाद होता था उसकी समाप्ति हो गई। इसके बाद सन् 1893 में रेफ्रीज एसोसिएशन की स्थापना हुई। आज यह आलम है कि शायद ही ऐसा कोई देश हो जहां पर फुटबाल नहीं खेला जाता हो। यह जितना लोकप्रिय यूरोप में है उतना ही अफ्रीका में भी है, जहां के लोग अक्सर नंगे पांव खेलते हैं। 

More from my site

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *