सामान्य ज्ञान-फिल्म की शूटिंग के दौरान क्लैप क्यों दिया जाता है? 

फिल्म की शूटिंग के दौरान क्लैप क्यों दिया जाता है? 

सामान्य ज्ञान-फिल्म की शूटिंग के दौरान क्लैप क्यों दिया जाता है? 

जिस कथाक्रम में फिल्म दिखाई जाती है, उसकी शूटिंग उस क्रम के अनुसार नहीं की जाती, बल्कि स्टूडियों में निर्मित सेट्स तथा विभिन्न बाह्य स्थलों पर लिए जाने वाले दृश्य एकसाथ अलग-अलग छोटे-छोटे अंशों में फिल्माए जाते हैं।

फिल्म की शूटिंग के दौरान क्लैप क्यों दिया जाता है? 

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कथानक के विविध प्रसंगों के फिल्मांकित इन दृश्यों (सीन), दृश्यांशों (शाट्स), टेक्स तथा रीटेक्स की पहचान करके कथाक्रम के अनुसार संकलित व संपादित करने के लिए दृश्य क्रमांक की जरूरत होती है। यही क्रमांक लगाने के लिए दिया जाता है क्लैप। क्लैपर बोर्ड या दृश्य क्रमांक पट्टिका को हर दृश्य से पहले फिल्माया जाता है, जिसे संपादन के समय हटा दिया जाता है। 

फिल्म के मुहूर्त शाट से ले कर अंतिम शाट तक सब क्लैप के साथ चित्रित होता है। क्लैपर बोर्ड पर फिल्म, बैनर का नाम, शूटिंग की तारीख, सीन, शॉट, टेक व रीटेक क्रमांक लिख दिया जाता है। ब्लैक बोर्ड की तरह काले रंग से रंगे क्लैप पर भी प्रत्येक दृश्य के क्रमांक का उल्लेख होता है।

इस क्लैप को सहायक निर्देशक या क्लैपर ब्वाय हाथ में पकड़ कर कैमरे के सामने खड़ा हो जाता है तथा फिल्मांकन शुरू होने पर फिल्म, बैनर का नाम, शूटिंग दिनांक, सीन, शॉट, टेक रिटेक का क्रमांक को बोलकर क्लैप के ऊपर लगी एक पट्टी जोर से बजा कर हट जाता है, इसके बाद ही कलाकार अपना अभिनय, संवाद आदि करते हैं।

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