यूक्लिड ऑफ अलेक्जेंड्रिया की जीवनी |Biography of Euclid of Alexandria in hindi

यूक्लिड ऑफ अलेक्जेंड्रिया की जीवनी

यूक्लिड ऑफ अलेक्जेंड्रिया की जीवनी |Biography of Euclid of Alexandria in hindi

विश्व के महान् गणितज्ञ युक्लिड का जन्म 300 ई०पू० सिकन्दरिया (अलेक्जेड्रिया) में हुआ था। यूनानी भाषा में यूक्लिड का उच्चारण यूक्लिडस किया जाता था। उन दिनों सिकन्दरिया पर राजा टालमी का शासन था। टालमी स्वयं विद्वान् पुरुष था। कवियों, कलाकारों, ज्योतिषियों और गणितज्ञों का बड़ा सम्मान करता था। उसने अपने देश में एक संग्रहालय स्थापित किया था, जो समय के साथ-साथ एक ग्रंथालय में बदल गया था। उस ग्रंथालय में भोजपत्र पर लिखी करीब सात लाख पुस्तकें थीं। 

युक्लिड के विषय में लोगों का कहना है कि उन्होंने गणित की शिक्षा प्लेटों की प्रसिद्ध पाठशाला में प्राप्त की थी। पर राजनैतिक उथल-पुथल के कारण उन्हें वापस सिकन्दरिया आना पड़ा। वहां आकर उन्हें टालमी की ओर से विशेष सम्मान मिला। तत्पश्चात् उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की और ज्यामिति पर एक प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘स्टोइकेइया’ रचा। 

ईसा से करीब तीन सौ वर्ष-पूर्व ज्यामिति से सम्बन्धित जो भी सामग्री उपलब्ध थी, उसे एकत्रित करके युक्लिड ने नियम बद्धता के साथ अपने विशाल ग्रन्थ में प्रस्तुत किया। यह ग्रन्थ यूनानी भाषा में लिखा गया था। उस ग्रन्थ की तेरह पुस्तकें या फिर अध्याय थे। बारहवीं शताब्दी में उसका अनुवाद लैटिन भाषा में किया गया और उसका नाम ‘स्टोइकेइया’ से बदलकर ‘एलीमेन्ट्स’ रख दिया गया। इस ग्रन्थ को भी तेरह पुस्तकों में बांटा गया है। 

प्रथम पुस्तक में बिन्दु, रेखा, वृत्त, त्रिभुज आदि की परिभाषाएं दी गई हैं, तथा कुछ अभिगृहीत दिए गए हैं। दूसरी पुस्तक में ज्यामितीय बीजगणित द्वारा रेखागणित को विभिन्न आकृतियों को बनाने के तरीके दिए गए हैं। तीसरी और चौथी पुस्तक वृत्त से सम्बन्धित है। पांचवी और छठी पुस्तक में अनुपात सिद्धान्त और उसके उपयोगों को प्रस्तुत किया गया है। 

सातवीं, आठवीं और नवीं पुस्तकों में अंकगणित विषय को प्रस्तुत किया गया है। ग्यारहवीं, बारहवीं और तेरहवीं पुस्तकें ठोस से सम्बन्धित हैं। इन पुस्तकों में धन, पिरामिड, अष्टाफलक, गोला आदि का विवरण प्रस्तुत किया गया है। 

यूक्लिड ने इन ग्रन्थों में पाइथागोरस, हिप्पोक्रेटिस, थियोडोरिस आदि प्राचीन गणितज्ञों की खोजों का समावेश किया था। इन स्वरचित पुस्तकों में यूक्लिड ने अपने से पहले किए गए सभी गणितज्ञों के कार्यों का ब्यौरा तो पेश किया ही है, साथ ही अपने अनुसंधानों को भी सम्मिलित किया है। यह मात्र एक पाठ्य-पुस्तक ही नहीं है, बल्कि यूक्लिड द्वारा प्राप्त जानकारी और अनुसंधानों का प्रस्तुतीकरण है। 

इस ग्रन्थ की विशेषता यह है कि उस समय तक ज्ञात समस्त ज्यामितीय ज्ञान को एक तार्किक रूप में पेश किया गया है। इसके अलावा युक्लिड द्वारा खोजे गए अनेक गणितीय तथ्य भी दिए गए हैं। 

अधिकांश विशेषज्ञों का ऐसा विचार है कि यूक्लिड को इस विशाल ग्रन्थ की प्रेरणा महान् दार्शनिक अरस्तू से मिली थी, किन्तु उनके इस विशाल ग्रन्थ का अध्ययन करने से पता चलता है कि यह सब उनकी अपनी सूझ-बूझ तथा अनुसंधानों द्वारा ही सम्भव हो सका। यह प्रसिद्ध ग्रन्थ अब तक अनेक भाषाओं में आ चुका है। छठी शताब्दी में इसका अनुवाद सीरियाई भाषा में हुआ था। आठवीं शताब्दी में इसका अनुवाद अरबी भाषा में किया गया। इसके अलावा अंग्रेजी और लैटिन में भी इसके अनुवाद मिलते हैं। 

भारतवर्ष में भी इस विशाल ग्रन्थ का अनुवाद हो चुका है। पिछले तेईस सौ वर्षों से इस विशाल ग्रन्थ ने ज्यामिती के प्रचार व प्रसार में जो योगदान दिया है, वह सराहनीय है। इसी के आधार पर जर्मन गणितज्ञ रीमान ने ‘ए-यूक्लिडीय ज्यामिति’ रची। आइन्सटीन जैसे महान् वैज्ञानिक ने ‘सापेक्षिकता के सिद्धान्त’ के प्रतिपादन के लिए इसी ग्रन्थ का सहारा लिया। उनकी नजरों में यूक्लिड ऐसे वैज्ञानिक थे, जिसने तार्किक योजना को जन्म दिया। इस महान् गणितज्ञ का योगदान केवल ज्योमिति में ही नहीं, अपितु प्रकाशिकी, विभाजन सिद्धान्त आदि में भी था। इस पर भी उन्हें ज्यामिति का जन्मदाता कहा जाए, तो अनुचित नहीं होगा। 

आज भी आरम्भिक कक्षाओं में जो रेखागणित पढ़ाया जाता है, वह युक्लिड के ग्रन्थ पर भी आधारित है। वास्तव में ज्यामिति और यूक्लिड एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। युक्लिड का ग्रन्थ अपने-आप में तथा विश्व की दृष्टि में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रहा है। 

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